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एक चुनाव ऐसा भी: जब विधानसभा सीटें थीं आठ, विधायक चुने गए 10, अनूठी है यह चुनावी कहानी
Sat, 15 Jan 2022 11:05 AM IST
मुकेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 15 Jan 2022 11:05 AM IST
सार
आजादी के बाद दूसरे विधानसभा चुनाव में आगरा जिले के नाम अनूठा इतिहास है। 1957 में आठ विधानसभा सीटों के लिए चुनाव हुए थे, लेकिन जनता ने 10 विधायकों को चुनकर विधानसभा भेजा था।
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आगरा चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आजादी के बाद उत्तर प्रदेश में 1952 के पहले विधानसभा चुनाव में जहां कांग्रेस की आंधी चली। वहीं ठीक पांच साल बाद ही आगरा जिले ने कांग्रेस की रफ्तार धीमी कर दी और 10 में से 5 विधायक ही कांग्रेस के विधानसभा पहुंचाए। इस चुनाव में विधानसभा क्षेत्र तो आठ थे, लेकिन इनसे विधायक 10 चुने गए।
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आगरा सिटी-2 और एत्मादपुर विधानसभा से दो-दो विधायकों को जनता ने चुनकर लखनऊ भेजा। दोनों ही सीटों पर एक-एक विधायक अनुसूचित जाति के चुने गए। पहली बार इस चुनाव में परिसीमन के बाद फतेहपुर सीकरी, फतेहाबाद, आगरा सिटी-1 और आगरा सिटी-2 सीटें अस्तित्व में आईं।
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इन नेताओं ने रोकी थी कांग्रेस की आंधी
1952 के चुनाव के बाद कांग्रेस की आंधी को आगरा जिले में स्वामी विशेश्वरानंद ने फतेहपुर सीकरी में, खेरागढ़ में श्रीकृष्ण दत्त पालीवाल, एत्मादपुर में राम सिंह, फिरोजाबाद में जगन नाथ लाहिरी और बाह में राजा महेंद्र रिपुदमन सिंह ने रोका।
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इनमें स्वामी विशेश्वरानंद प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी थे, जबकि बाकी चारों विधायक निर्दलीय चुने गए। कांग्रेस के पांच विधायक ही चुने जा सके। बाह से पहली बार भदावर राज परिवार ने चुनाव में हिस्सा लिया और सबसे ज्यादा 64.47 फीसदी वोट हासिल किए।
1957 में चुनाव का परिणाम
1957 में चुनाव का परिणाम
| विधानसभा | विजेता | वोट | दल | निकट प्रतिद्वंद्वी | वोट | दल |
| फतेहपुर सीकरी | स्वामी विशेश्वरानंद | 23,832 | प्रजा सोशलिस्ट पार्टी | चंपावती | 14,599 | कांग्रेस |
| खेरागढ़ | श्रीकृष्ण दत्त पालीवाल | 19,411 | निर्दलीय | जगन प्रसाद रावत | 13754 | कांग्रेस |
| आगरा सिटी 1 | आदिराम सिंघल | 27561 | कांग्रेस | बालोजी बाल कृष्ण | 14148 | भारतीय जनसंघ |
| आगरा सिटी 2 | छत्रपति अंबेश | 46595 | कांग्रेस | देवकीनंदन विभव | 44,373 | कांग्रेस |
| एत्मादपुर | राम सिंह | 27366 | निर्दलीय | गंगाधर | 22112 | कांग्रेस |
| फिरोजाबाद | जगन नाथ लाहिरी | 16498 | निर्दलीय | हैदर बख्श | 11909 | कांग्रेस |
| फतेहाबाद | लक्ष्मीनारायण बंसल | 11529 | कांग्रेस | हुकुम सिंह | 9408 | निर्दलीय |
| बाह | महेंद्र रिपुदमन सिंह | 34,721 | निर्दलीय | शंभूनाथ चतुर्वेदी | 12,439 | कांग्रेस |
65 साल पहले अस्तित्व में आई फतेहपुर सीकरी सीट
1952 के चुनाव में किरावली सीट का नाम पहली और आखिरी बार सुना गया। इसके पांच साल बाद 1957 में हुए चुनाव में किरावली सीट का नाम बदलकर फतेहपुर सीकरी कर दिया गया। इस तरह 65 साल पहले फतेहपुर सीकरी विधानसभा क्षेत्र बना, जिसके पहले विधायक स्वामी विशेश्वरानंद चुने गए।
पहले चुनाव में कांग्रेस की आंधी के बाद इस दूसरे चुनाव में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के स्वामी विशेश्वरानंद ने कांग्रेस की चंपावती को 9233 वोटों से हराया था। जाटलैंड फतेहपुर सीकरी पर तब केवल तीन प्रत्याशी मैदान में थे, जिनमें निर्दलीय उम्मीदवार पंछिया भी थे, जिन्हें 11665 वोट मिले थे। कांग्रेस की उम्मीदवार को हराने में पंछिया का योगदान रहा था।
1952 के चुनाव में किरावली सीट का नाम पहली और आखिरी बार सुना गया। इसके पांच साल बाद 1957 में हुए चुनाव में किरावली सीट का नाम बदलकर फतेहपुर सीकरी कर दिया गया। इस तरह 65 साल पहले फतेहपुर सीकरी विधानसभा क्षेत्र बना, जिसके पहले विधायक स्वामी विशेश्वरानंद चुने गए।
पहले चुनाव में कांग्रेस की आंधी के बाद इस दूसरे चुनाव में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के स्वामी विशेश्वरानंद ने कांग्रेस की चंपावती को 9233 वोटों से हराया था। जाटलैंड फतेहपुर सीकरी पर तब केवल तीन प्रत्याशी मैदान में थे, जिनमें निर्दलीय उम्मीदवार पंछिया भी थे, जिन्हें 11665 वोट मिले थे। कांग्रेस की उम्मीदवार को हराने में पंछिया का योगदान रहा था।