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Agra News: मां बनने के सपने पर ग्रहण लगा रही गर्भाशय में टीबी का संक्रमण

Sun, 17 Nov 2024 11:23 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Updated Sun, 17 Nov 2024 11:23 PM IST
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TB infection in the uterus is putting an end to the dream of becoming a mother.
कासगंज। आपकी शादी को कई साल हो चुके हैं, इसके बाद भी मां बनने का सपना पूरा नहीं हो रहा तो सतर्क हो जाइए। क्योंकि इस समय महिलाओं के गर्भाशय में तेजी से टीबी संक्रमण बढ़ने के मामले सामने आ रहे हैं। इस संक्रमण से कम उम्र में ही महिलाओं में बांझपन का खतरा बढ़ जा रहा है।
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टीबी की बीमारी नाखून और बाल को छोड़कर शरीर के किसी भी अंग को प्रभावित कर सकती है। महिलाओं और पुरुषों में पेल्विक ट्यूबरक्लोसिस (जननांग) की टीबी का भी संक्रमण हो सकता है। इससे दोनों के प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। इन दिनाें जिले के अस्पतालों में महिलाओं के गर्भाशय में टीबी संक्रमण के मामले तेजी से सामने आ रहे है।
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अधिकतर मामले 20-40 साल की उम्र वाली महिलाओं में पाए जा रहे हैं। जो महिलाओं में बांझपन का कारण बन रही है। जिले में जांच कराने पर चिह्नित मरीजों में से चार प्रतिशत तक गर्भाशय की टीबी होना पाया जा रहा।
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स्त्री रोग विशेषज्ञ नबीला अब्बासी बताती हैं कि महिलाओं में गर्भाशय की टीबी के मामले तेजी से बढ़ रहें हैं। जो महिलाओं के लिए खतरनाक है। यदि समय रहते इसका उपचार नहीं कराया गया तो आगे चलकर बांझपन का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन समय से उपचार करने पर बीमारी से मुक्ति मिल जाती है।
आंकडे़ की नजर में
वर्ष महिलाओं की संख्या
2020-80
2021-92
2022-130
2023-150
2024 अब तक- 152
- शहर की निवासी 28 वर्षीय महिला बताती हैं उनके पहला बच्चा तो समय पर हुआ, लेकिन दूसरे बच्चे में दिक्कत आने लगी। जब चिकित्सक को दिखाया तो गर्भाशय में टीबी का संक्रमण पाया गया। इलाज कराने के बाद दूसरा बच्चा हुआ।
- शहर की 24 वर्षीय महिला बताती हैं कि शादी के चार साल बाद भी बच्चा नहीं हुआ, डॉक्टर को दिखाया। जांच में गर्भाशय में संक्रमण मिला। इलाज कराने के बाद मातृत्व सुख प्राप्त हो गया।

यह हैं टीबी के लक्षण
पसीना अधिक आना, थकान रहना, पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द रहना, अनियमित मासिक धर्म, सफ़ेद पानी आना, हेवी ब्लीडिंग, उबकाई या उल्टी, वजन का कम होना, हल्का बुखार, हार्ट की पल्स रेट का तेज हो जाना, अल्प समय में गर्भपात हो जाना आदि।
- इस तरह से पता चलता है गर्भाशय की टीबी का
ट्यूबरकुलीन स्किन टेस्ट के साथ ही ब्लड टेस्ट कराया जाता है। यूट्रस की बायोप्सी भी कराई जाती है। इसके अलावा जेनेटिक टेस्ट भी होता है, इससे टीबी के इंफेक्शन का पता चलता है। ऐसे मरीजों को 6 महीने तक टीबी की दवा नियमित तौर पर खिलाई जाती है।

यह बरतें सावधानी
नियमित रूप से शारीरिक जांच करवाएं, टीबी का इंजेक्शन लगवाएं, हरी सब्जियां और फल खाएं, नियमित रूप से एक्सरसाइज करें, प्रदूषण से बचकर रहें, जंक और फास्ट फूड से परहेज करें।


वर्जन
टीबी के बैक्टीरिया सीधा गर्भाशय पर हमला करते हैं, इससे महिलाओं को गर्भ धारण करने में दिक्कतें आती हैं। गर्भाशय की सबसे अंदरूनी परत कमजोर हो जाती है, इसकी वजह से भ्रूण ठीक तरीके से विकसित नहीं हो पाता। खानपान एवं साफ सफाई पर ध्यान न देने से खतरा बढ़ जाता है। - धर्मेंद्र यादव, डीपीएम
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