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कोरोना काल में बच्चों की मानसिक सेहत का रखें खास ख्याल
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कासगंज। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को लेकर हर कोई इस समय मानसिक तनाव से गुजर रहा है। ऐसे में बच्चे भी इससे अछूते नहीं बचे हैं। स्कूल कॉलेज बंद होने के कारण बच्चे घर पर ही रह रहे हैं। इससे उनमें तनाव बढ़ रहा है। इसका असर उनकी सेहत पर पड़ सकता है। ऐसे में अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे समय रहते अपने बच्चों के अंदर बढ़ रहे तनाव को पहचान कर उसका उचित इलाज कराएं।
साइकेट्रिक काउंसिलर अरुण कुमार का कहना है कि बच्चों में पैदा हो रहे तनाव को चार तरीकों से दूर किया जा सकता है। माता - पिता बच्चों के अंदर चल रही बातों को पहचानने। प्यार से उनकी बात सुने और महत्व दें। कभी भी बच्चों को अकेला महसूस न होने दें। रिसर्च कहती है कि अच्छी डाइट का मानसिक स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है। खाने में सलाद फाइबर डाइट के साथ-साथ दिन में एक सेब जरूर लें। सेब एंटी ऑक्सीडेंट होता है जो ऑक्सीडेशन डैमेज में मदद करता है। स्लीप फाउंडेशन के अनुसार पूरी नींद न लेने से न्यूरोट्रांसमीटर सेरोटोनिन का लेवल प्रभावित होता है। 6 से 12 साल के बच्चों को 9 से 11 घंटे की नींद लेनी चाहिए। जिससे तनाव का स्तर बढ़ता है। इसके अलावा मास्क, सामाजिक दूरी व साफ सफाई का पूरा ध्यान रखें टीवी, मोबाइल कम उपयोग करें। पर्यावरण स्वास्थ्य का ध्यान रखें। मायो क्लिनिक स्टडी के अनुसार खेलकूद के कारण खुशी देने वाला हार्मोन एंडोर्फिन निकलता है जिससे नकारात्मक विचार कम होते हैं और तनाव का स्तर घटता है। छोटे बच्चों को 25 से 30 मिनट जरूर खेलना चाहिए इससे उनका आत्मविश्वास और सामाजिक रुझान भी बढ़ता है।
तीन चीजों से पहचान सकते हैं कि बच्चा तनाव
पहला है व्यवहार में परिवर्तन - जैसे बच्चा कहे कि मैं अच्छा नहीं हूं मैं बेकार हूं, बात - बात में गुस्सा कर, रोए जोर-जोर से बातें करें । घबराहट व चिड़चिड़ापन महसूस हो। हाथ पैरों को बिना बात के फेंके आदि।
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दूसरा- सिम्टम्स है चेंज ऑफ एक्टिविटीज जैसे सोते हुए अचानक जगना, समय से पहले जगना, कम बोलना या ज्यादा बोलना।
तीसरा- परफॉर्मेंस में गिरावट आना जैसे ऑनलाइन क्लास में मन न लगना, होमवर्क न करना, पढ़ाई की बात न करना अगर आप उससे बात करें तो वह अनदेखा करें आदि।
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साइकेट्रिक काउंसिलर अरुण कुमार का कहना है कि बच्चों में पैदा हो रहे तनाव को चार तरीकों से दूर किया जा सकता है। माता - पिता बच्चों के अंदर चल रही बातों को पहचानने। प्यार से उनकी बात सुने और महत्व दें। कभी भी बच्चों को अकेला महसूस न होने दें। रिसर्च कहती है कि अच्छी डाइट का मानसिक स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है। खाने में सलाद फाइबर डाइट के साथ-साथ दिन में एक सेब जरूर लें। सेब एंटी ऑक्सीडेंट होता है जो ऑक्सीडेशन डैमेज में मदद करता है। स्लीप फाउंडेशन के अनुसार पूरी नींद न लेने से न्यूरोट्रांसमीटर सेरोटोनिन का लेवल प्रभावित होता है। 6 से 12 साल के बच्चों को 9 से 11 घंटे की नींद लेनी चाहिए। जिससे तनाव का स्तर बढ़ता है। इसके अलावा मास्क, सामाजिक दूरी व साफ सफाई का पूरा ध्यान रखें टीवी, मोबाइल कम उपयोग करें। पर्यावरण स्वास्थ्य का ध्यान रखें। मायो क्लिनिक स्टडी के अनुसार खेलकूद के कारण खुशी देने वाला हार्मोन एंडोर्फिन निकलता है जिससे नकारात्मक विचार कम होते हैं और तनाव का स्तर घटता है। छोटे बच्चों को 25 से 30 मिनट जरूर खेलना चाहिए इससे उनका आत्मविश्वास और सामाजिक रुझान भी बढ़ता है।
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तीन चीजों से पहचान सकते हैं कि बच्चा तनाव
पहला है व्यवहार में परिवर्तन - जैसे बच्चा कहे कि मैं अच्छा नहीं हूं मैं बेकार हूं, बात - बात में गुस्सा कर, रोए जोर-जोर से बातें करें । घबराहट व चिड़चिड़ापन महसूस हो। हाथ पैरों को बिना बात के फेंके आदि।
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दूसरा- सिम्टम्स है चेंज ऑफ एक्टिविटीज जैसे सोते हुए अचानक जगना, समय से पहले जगना, कम बोलना या ज्यादा बोलना।
तीसरा- परफॉर्मेंस में गिरावट आना जैसे ऑनलाइन क्लास में मन न लगना, होमवर्क न करना, पढ़ाई की बात न करना अगर आप उससे बात करें तो वह अनदेखा करें आदि।