अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वार का आगरा का जूता कारोबार उठाए फायदा
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आगरा में अमेरिका और चीन के बीच जबरदस्त ट्रेड वार चल रहा है। यह सही मौका है, जब भारत खासकर आगरा का जूता उद्योग इस ट्रेड वार का फायदा उठाए और अमेरिकी बाजार में अपनी हिस्सेदारी अपनी गुणवत्ता के आधार पर हासिल करे।
रूस के पुराने बाजार में अपनी पकड़ बनाने का भी यही मौका है। काउंसिल फार लेदर एक्सपोर्ट के चेयरमैन मुख्तारुल अमीन ने आगरा के जूता निर्यातकों से खुद को अपग्रेड करने और केंद्र सरकार द्वारा दिए गए 2600 करोड़ रुपये के पैकेज का इस्तेमाल करने की अपील की।
अमर उजाला से खास बातचीत में सीएलई चेयरमैन मुख्तारुल अमीन ने कहा कि चिली, वियतनाम, रूस में काउंसिल नए साझेदारों की तलाश कर रहा है। आगरा दुनिया के बड़े ब्रांड्स को जूता तैयार कर भेज रहा है। यहां के निर्यातक अपनी मशीनरी को अपग्रेड करने के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं की मदद लें।
2600 करोड़ रुपये का पैकेज मिला है तो इसमें अपनी नई तकनीक की मशीनरी खरीदने पर जोर दें। अपग्रेड होंगे तो जूते की गुणवत्ता बढ़ेगी। उत्पादकता बढ़ने के साथ लागत में कमी आएगी तो विश्व बाजार में दूसरे देशों की चुनौतियों से मुकाबला कर पाएंगे।
चीन, बांग्लादेश से सबक की जरूरत
बांग्लादेश ने आजादी के बाद खुद को गारमेंट के बड़े निर्यातक के रूप में पेश किया है, वहीं चीन हर देश को कई उत्पाद निर्यात कर रहा है। परिश्रम और गुणवत्ता के आधार पर दोनों ने अपनी जगह बनाई है। हमें भी यही करने की जरूरत है।
दिल के करीब है हिंदुस्तान
बांग्लादेश से आए मो. सहफुल इस्लाम अपने साथ पूरा प्रतिनिधिमंडल लाए हैं। बांग्लादेश ने गारमेंट के साथ फुटवियर निर्माण में तेजी दिखाई है। सहफुल इस्लाम के मुताबिक हिंदुस्तान उनके दिल के करीब है। यहां से कारोबार करना ज्यादा बेहतर है। यहां बड़ा बाजार है और बेहद तेजी से भारत आगे बढ़ रहा है।