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दुनिया को भाया संगमरमरी इमारतों की खूबसूरती बचाने का ये भारतीय फार्मूला
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
Updated Wed, 15 Nov 2017 03:44 PM IST
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ताज महल
- फोटो : SELF
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अत्याधुनिक तकनीक के लेजर की जगह ताज के दाग मिटाने के लिए जिस मडपैक ट्रीटमेंट को एएसआई ने अपनाया, अब दुनिया भर के स्मारक उसी मडपैक ट्रीटमेंट को अपनाकर अपने संगमरमरी स्मारकों के दाग हटाएंगे।
लेजर तकनीक से संगमरमर को पहुंच रहे नुकसान के मद्देनजर यूरोपीय देशों ने प्राकृतिक पद्वति को अपनाने पर जोर दिया है। यही नहीं, देश में भी संगमरमर से बनी इमारतों की सफाई अब ताज की तर्ज पर मडपैक से ही की जाने लगी है।
दुनिया के सातवें अजूबे के दागों को मिटाने और पीलापन हटाने के लिए दो साल से किए जा रहे मडपैक ट्रीटमेंट को अब दुनिया भर के स्मारक अपना रहे हैं। यूनेस्को के साथ कई देशों के पुरातत्व विशेषज्ञ मडपैक को जानने और परिणाम देखने के लिए ताज का दौरा कर चुके हैं।
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तकनीक की जगह अब विशेषज्ञ प्राकृतिक पद्वति को ही अपनाने की संस्त़ुति कर रहे हैं। आने वाले दिनों में दुनिया भर के स्मारकों में ताज की तरह ही मडपैक ट्रीटमेंट नजर आ सकता है।
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लेजर तकनीक से संगमरमर को पहुंच रहे नुकसान के मद्देनजर यूरोपीय देशों ने प्राकृतिक पद्वति को अपनाने पर जोर दिया है। यही नहीं, देश में भी संगमरमर से बनी इमारतों की सफाई अब ताज की तर्ज पर मडपैक से ही की जाने लगी है।
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दुनिया के सातवें अजूबे के दागों को मिटाने और पीलापन हटाने के लिए दो साल से किए जा रहे मडपैक ट्रीटमेंट को अब दुनिया भर के स्मारक अपना रहे हैं। यूनेस्को के साथ कई देशों के पुरातत्व विशेषज्ञ मडपैक को जानने और परिणाम देखने के लिए ताज का दौरा कर चुके हैं।
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तकनीक की जगह अब विशेषज्ञ प्राकृतिक पद्वति को ही अपनाने की संस्त़ुति कर रहे हैं। आने वाले दिनों में दुनिया भर के स्मारकों में ताज की तरह ही मडपैक ट्रीटमेंट नजर आ सकता है।
उम्मीद से अधिक परिणाम
राधास्वामी मत के संस्थापक परम पुरुष पूरनधनी हुजूर स्वामीजी महाराज के 200वें जयंती समारोह से पहले स्वामीबाग और दयालबाग के बीच दिलों के फासले कम हो सकते हैं।
- फोटो : file photo
अधीक्षण पुरातत्व रसायनविद डा. एमके भटनागर के अनुसार मुल्तानी मिट्टी और केवल पानी का प्रयोग कर ताज के दाग हटाने की यह कवायद दुनिया भर के विशेषज्ञों के लिए कौतूहल भरी है। इसके परिणाम बेहद शानदार रहे हैं। उम्मीद से कहीं ज्यादा मडपैक ट्रीटमेंट कारगर रहा है।
अधीक्षण पुरातत्वविद डा. भुवन विक्रम ने बताया कि लेजर और बायोलोजिकल तरीकों का प्रयोग यूरोप के देश कर रहे हैं, लेकिन ताजमहल के पूरी तरह से रसायन रहित मडपैक ट्रीटमेंट ने उन्हें भी इसका प्रयोग करने के लिए विकल्प दिया है।
अधीक्षण पुरातत्वविद डा. भुवन विक्रम ने बताया कि लेजर और बायोलोजिकल तरीकों का प्रयोग यूरोप के देश कर रहे हैं, लेकिन ताजमहल के पूरी तरह से रसायन रहित मडपैक ट्रीटमेंट ने उन्हें भी इसका प्रयोग करने के लिए विकल्प दिया है।
स्वामीबाग ने भी अपनाया
राधास्वामी मत के प्रवर्तक और प्रथम गुरू की पवित्र समाधि पर लेजर तकनीक से सफाई और दाग मिटाने की कवायद शुरू की गई थी। राधास्वामी सत्संग सभा ने इसके लिए एएसआई अधिकारियों को लेजर तकनीक के परिणाम जानने को आमंत्रित किया था, लेकिन स्वामीबाग स्थित समाधि से लेजर तकनीक को हटा दिया गया है।
लेजर से संगमरमर की सतह खुरदुरी पड़ जाने, पहली परत के लगभग जल जाने के दुष्प्रभाव के मद्देनजर सभा प्रबंधन ने मडपैक ट्रीटमेंट को ही उपयुक्त पाया। सभा अब दीवारों की सफाई और दाग मिटाने के लिए परंपरागत और प्राकृतिक मुल्तानी मिट्टी का लेप ही प्रयोग कर रही है।
लेजर से संगमरमर की सतह खुरदुरी पड़ जाने, पहली परत के लगभग जल जाने के दुष्प्रभाव के मद्देनजर सभा प्रबंधन ने मडपैक ट्रीटमेंट को ही उपयुक्त पाया। सभा अब दीवारों की सफाई और दाग मिटाने के लिए परंपरागत और प्राकृतिक मुल्तानी मिट्टी का लेप ही प्रयोग कर रही है।