स्वनिधि योजना: कासगंज में 50 हजार का ऋण पाने के लिए आए मात्र तीन आवदेन, स्ट्रीट बैंडर नहीं दिखा रहे रुचि
कोरोना संकट के चलते बेपटरी हुए पटरी कारोबार को ढर्रे पर लाने के लिए शुरू की गई स्वनिधि योजना से लोगों का मोह भंग होने लगा है। 50 हजार रुपये का ऋण पाने के लिए मात्र तीन स्ट्रीट बैंडरों ने ही आवेदन किए हैं। इन लोगों को 10 हजार व 20 हजार रुपये का ऋण पाने में तमाम पापड़ बेलने पड़े।
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कोरोना के चलते वर्ष 2020 में लॉकडाउन लग जाने से सबसे अधिक नुकासान स्ट्रीट बैंडरों, गली कूंचों में या फिर पटरियों पर फड़ लगाकर काम करने वाले छोटे कारोबारियों को उठाना पड़ा। शासन ने ऐसे कारोबारियों के लिए जून 2020 में स्वनिधि योजना का शुभारंभ किया। योजना के तहत पहले चरण में 10 हजार रुपये तक के ऋण की व्यवस्था की गई, ताकि वे इस धन से अपने कारोबार को फिर से खड़ा कर सकें। उस समय लोगों ने इस योजना का लाभ पाने में काफी दिलचस्पी दिखाई। काफी लोगों ने अपने आवेदन किए, लेकिन योजना का लाभ पाने में लोगों को तमाम पापड़ बेलने पड़े। लगभग 7 हजार आवेदन आए। इनमें से 5921 को तमाम कोशिशों के बाद ऋण मिल सका, लेकिन अब इस योजना से लोगों का मोह भंग होने लगा।
योजना के दूसरे चरण में आवेदनों की संख्या में तेजी से गिरावट आ गई। योजना के लिए 1949 आवेदन आए, जिसमें से अभी तक 796 लोगों को ही योजना के तहत 20 हजार रुपये का ऋण मिल सका। अब योजना का तीसरा चरण शुरू हो चुका है, लेकिन आवेदन करने वाले ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। योजना के तहत 50 हजार का ऋण पाने के लिए अभी तक मात्र तीन लोगों ने ही अपने आवेदन किए हैं।
ये ले सकते हैं योजना का लाभ
- खोखा चलाने वाले छोटे व्यवसायी
- ढ़केल के माध्यम से चाय, पकोड़े, अंडा, चाऊमीन आदि के विक्रेता
- नाई की दुकान चलाने वाले
- जूता पालिश करने वाले
- सड़क किनारे फल, स्टेशनरी, खाना बेचने वाले
- पान बेचने वाले पनबाड़ी
- कपड़ा धोने वाले धोवी की दुकान पर
- सभी प्रकार के छोटे खुदरा कारोबारी
ये बोले डूडा के जेई
डूडा के जेई अभिषेक कुमार ने बताया कि स्वनिधि योजना के तहत 50 हजार रुपये के ऋण के लिए जो आवेदन आए हैं उनके सत्यापन का कार्य चल रहा है। अभी दूसरे चरण के जो आवेदन शेष रह गए हैं, उनके लिए योजना का लाभ देने के लिए प्रक्रिया चल रही है।