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खुशखबर: 798 हेक्टेयर हुआ सूर सरोवर पक्षी विहार का दायरा, शून्य ईको जोन की अधिसूचना रद्द; जारी किया नया गजट
Thu, 24 Sep 2026 09:33 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 24 Sep 2026 09:33 AM IST
सार
छह साल की कानूनी लड़ाई के बाद कीठम स्थित सूर सरोवर पक्षी विहार का दायरा करीब 395 हेक्टेयर बढ़कर 798.1505 हेक्टेयर हो गया है। यूपी सरकार ने शून्य ईको सेंसिटिव जोन का विवादित गजट भी वापस ले लिया है। एनजीटी में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की है।
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798 हेक्टेयर हुआ सूर सरोवर पक्षी विहार का दायरा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छह साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद कीठम स्थित सूर सरोवर पक्षी विहार का दायरा करीब 395 हेक्टेयर बढ़ाकर 798.1505 हेक्टेयर कर दिया गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में बुधवार को उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) ने शपथपत्र के साथ अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की। इसके साथ ही प्रदेश सरकार ने पक्षी विहार के ईको सेंसिटिव जोन को शून्य करने का अपना पुराना फैसला भी वापस ले लिया है।
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पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रमुख सचिव वी. हेकाली झिमोमी द्वारा जारी अधिसूचना के तहत 14.5025 हेक्टेयर सरकारी भूमि को आधिकारिक तौर पर पक्षी विहार का हिस्सा बना लिया गया है। पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता ने पूर्व में संरक्षित क्षेत्र का दायरा घटाने के खिलाफ एनजीटी में याचिका दायर की थी। ट्रिब्यूनल के सख्त रुख के बाद शासन को संशोधित अधिसूचना जारी करनी पड़ी।
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इस तरह बढ़ा जंगल
सेंक्चुअरी का मूल क्षेत्रफल: 403.09 हेक्टेयर
सूरदास वन ब्लॉक: 380.558 हेक्टेयर
सरकारी भूमि पर जंगल: 14.5025 हेक्टेयर
पक्षी विहार का कुल क्षेत्रफल: 798.1505 हेक्टेयर
सेंक्चुअरी का मूल क्षेत्रफल: 403.09 हेक्टेयर
सूरदास वन ब्लॉक: 380.558 हेक्टेयर
सरकारी भूमि पर जंगल: 14.5025 हेक्टेयर
पक्षी विहार का कुल क्षेत्रफल: 798.1505 हेक्टेयर
शून्य ईको सेंसिटिव जोन का गजट वापस
यूपी सरकार ने 27 दिसंबर 2024 को जारी उस विवादित गजट को भी वापस ले लिया, जिसके तहत जमीन तो जोड़ी गई थी लेकिन ईको सेंसिटिव जोन को शून्य कर दिया गया था। डॉ. शरद गुप्ता की आपत्ति पर सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी (सीईसी) ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया था। कमेटी ने स्पष्ट किया था कि राज्य सरकार को यह अधिकार नहीं है और ऐसा निर्णय केवल केंद्र सरकार ले सकती है। सीईसी की इसी रिपोर्ट के आधार पर शासन को कदम पीछे खींचने पड़े।
यूपी सरकार ने 27 दिसंबर 2024 को जारी उस विवादित गजट को भी वापस ले लिया, जिसके तहत जमीन तो जोड़ी गई थी लेकिन ईको सेंसिटिव जोन को शून्य कर दिया गया था। डॉ. शरद गुप्ता की आपत्ति पर सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी (सीईसी) ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया था। कमेटी ने स्पष्ट किया था कि राज्य सरकार को यह अधिकार नहीं है और ऐसा निर्णय केवल केंद्र सरकार ले सकती है। सीईसी की इसी रिपोर्ट के आधार पर शासन को कदम पीछे खींचने पड़े।
याचिकाकर्ता डॉ. शरद गुप्ता ने बताया कि यह आगरावासियों की जीत है। शहर को करीब 395 हेक्टेयर अतिरिक्त जंगल की सुरक्षा ढाल मिली है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए शुद्ध हवा सुनिश्चित करेगी। छह साल के संघर्ष ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक भी किया है।