फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Supreme Court Questions UP Govt Over Closure of 13 Lakh Traffic Challan Cases

UP: 13 लाख वाहनों के ट्रैफिक चालान माफ, यूपी सरकार के अध्यादेश पर सुप्रीम कोर्ट असंतुष्ट; जानें क्या कहा

Sat, 16 May 2026 09:05 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Sat, 16 May 2026 09:05 AM IST
सार

उत्तर प्रदेश में 2017 से 2021 के बीच के लाखों लंबित ट्रैफिक मामलों को खत्म करने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त सवाल उठाए हैं। अदालत ने पूछा है कि नए अध्यादेश के बाद कितने मामले फिर से चालू होंगे और उनका निपटारा कैसे किया जाएगा।

विज्ञापन
Supreme Court Questions UP Govt Over Closure of 13 Lakh Traffic Challan Cases
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2023 में एक कानून बनाकर 1 जनवरी 2017 से 31 दिसंबर 2021 के बीच के लाखों लंबित यातायात मामलों को स्वतः समाप्त कर दिया। सरकार का उद्देश्य पुराने मामलों का बोझ कम करना था। सड़क सुरक्षा कार्यकर्ताओं ने इस पर गंभीर चिंता व्यक्त की, क्योंकि बिना जुर्माना और सुनवाई के मामले समाप्त करना गलत संदेश देता है। वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन ने 14 मई 2024 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
विज्ञापन



 

मामले की सुनवाई 13 मई को न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने की। न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से लाए गए नए अध्यादेश के बाद भी गहन विचार-विमर्श आवश्यक बताया। याचिका के मद्देनजर, उत्तर प्रदेश सरकार ने 8 अप्रैल 2026 को एक अध्यादेश प्रस्तुत किया। इस अध्यादेश में गैर-शमनीय, अनिवार्य कारावास और पुनरावृत्ति वाले ट्रैफिक अपराधों को समाप्त न करने का प्रावधान है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट इस अध्यादेश से भी संतुष्ट नहीं हुआ। न्यायालय ने प्रदेश सरकार को यह बताने का आदेश दिया कि वर्ष 2017 से 2021 के बीच कितने ट्रैफिक उल्लंघन के अपराध समाप्त होंगे। इस मुद्दे पर और गहराई से सुनवाई के लिए 3 सितंबर की तिथि नियत की है। अध्यादेश लाने के बाद भी यह मामला समाप्त नहीं हुआ है।

 
विज्ञापन

सड़क सुरक्षा की चिंताजनक स्थिति
परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 से 2021 के बीच कुल 30,52,090 ई-चालान हुए थे। इनमें से न्यायालय में लंबित 10,84,732 मामले बिना जुर्माना अदा किए समाप्त कर दिए गए। यह कुल चालानों का 42.37 फीसदी था। इसके अतिरिक्त 1,29,163 कार्यालय-स्तरीय प्रकरण समय-बाधित बताकर बंद कर दिए गए। लगभग 13 लाख वाहन स्वामियों को पूर्ण छूट मिल गई। उत्तर प्रदेश लगातार पांच वर्षों से सड़क मृत्यु में राष्ट्रीय स्तर पर पहले स्थान पर है, जो यातायात कानूनों के कड़ाई से पालन की आवश्यकता दर्शाता है।

 

न्यायालय की टिप्पणियां
न्यायालय ने 13 मई की सुनवाई में उत्तर प्रदेश सरकार के अध्यादेश का संज्ञान लिया। न्यायालय ने यूपी सरकार की अधिवक्ता रुचिरा गोयल को निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई पर बताएं कि अध्यादेश के बाद कितने मामले पुनः जीवित होंगे। साथ ही उनके निपटारे की क्या व्यवस्था होगी, इसकी जानकारी भी मांगी गई। अधिवक्ता केसी जैन ने कहा कि सड़क पर होने वाली हर मृत्यु किसी परिवार का जीवनभर का दुख है। उन्होंने यह भी कहा कि 43 फीसदी मामलों को बिना जुर्माना समाप्त करना कानून का पालन करने वालों के साथ अन्याय है।

 

सड़क सुरक्षा की चिंताजनक तस्वीर
 
वर्ष देश में सड़क हादसों में हुई मौतें यूपी में हादसों में मौतें यूपी में ओवरस्पीडिंग से मौतें
2020 1,38,383 19,149 7,356
2021 1,53,972 21,227 8,485
2022 1,68,491 22,595 9,297
2023 1,72,890 23,652 8,726
2024 1,77,177 24,118 12,010
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed