Agra: लिफ्ट कंपनी के सुपरवाइजर ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में मौत के लिए अधिकारी को ठहराया जिम्मेदार
कुलबीर सिंह नेगी मूलरूप से उत्तराखंड के पौढ़ी गढ़वाल के थाना रिखनीखाल के रहने वाले थे। आगरा में एक लिफ्ट कंपनी में सुपरवाइजर की नौकरी करते थे। उनकी पत्नी और बच्चे दिल्ली में रहते हैं।
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आगरा के सिकंदरा की गुरु तेग बहादुर कॉलोनी में एक लिफ्ट कंपनी के सुपरवाइजर कुलबीर सिंह नेगी (48) ने बृहस्पतिवार रात को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह किराये पर कमरा लेकर रहते थे। पुलिस को डायरी में लिखा सुसाइड नोट मिला है। इसमें उन्होंने कंपनी के अधिकारी पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है, जिससे वो तनाव में थे। पुलिस जांच कर रही है।
कुलबीर सिंह नेगी मूलरूप से उत्तराखंड के पौढ़ी गढ़वाल के थाना रिखनीखाल के रहने वाले थे। परिजन ने बताया कि वह मेकेनिकल इंजीनियर थे। पत्नी सविता, दो बेटियों शालिनी और कुसुम के साथ दिल्ली में रह रही हैं। कुलबीर आगरा के आवास विकास कॉलोनी स्थित एक लिफ्ट कंपनी में सुपरवाइजर थे।
वह गुरुतेग बहादुर कॉलोनी में सतेंद्र सिंह के मकान में किराये पर रहते थे। शुक्रवार सुबह सविता ने पति के मोबाइल पर कॉल किया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं होने, कर्मचारियों से कुछ पता न चलने पर एक परिचित को घर भेजा। वो मकान मालिक के साथ कमरे पर गए तो कुलबीर का शव जंगले पर रस्सी से बने फंदे से लटका था।
सुसाइड नोट में अधिकारी को ठहराया जिम्मेदार
सूचना पर पुलिस व फॉरेंसिक टीम ने पहुंचकर जांच की। कमरे से एक डायरी मिली, जिसमें सुसाइड नोट लिखा था। थाना सिकंदरा के प्रभारी निरीक्षक आनंद कुमार शाही ने बताया कि सुसाइड नोट में कंपनी के एक अधिकारी को जिम्मेदार ठहराया गया है। लिखा है कि अधिकारी अक्सर डांटा करते थे। उत्पीड़न करते थे। इससे वो तनाव में थे। पत्नी और बेटियों को लेकर भावुक करने वाली बातें भी लिखी हैं। जांच की जा रही है। परिजन से तहरीर मिलने पर विधिक कार्रवाई होगी।
भाई ने जताई साजिश की आशंका
दोपहर बाद पत्नी, बेटियां और भाई मोहन सिंह नेगी आगरा आ गए। भाई ने कुलबीर की मृत्यु के पीछे साजिश की आशंका जाहिर की। उनका कहना था कि जंगले में फांसी नहीं लगाई जा सकती। जंगले के पास ही कुर्सी रखी थी। इस पर कुलबीर का एक पैर भी था, जबकि दूसरा जमीन पर लगा था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्थिति स्पष्ट होगी।
दो साल में दो बार किराये पर रहने आए
मकान मालिक सत्येंद्र ने पुलिस को बताया कि कुलबीर दिल्ली में नौकरी करते थे। दो साल पहले ट्रांसफर होकर आगरा आए थे। उनके मकान में दो कमरे किराये पर लिए थे। मगर, मकान में पानी भरने की वजह से छोड़ दिया था। छह महीने पहले दोबारा आकर रहने लगे। रक्षाबंधन पर पत्नी और बच्चे भी आए थे। त्योहार के बाद चले गए थे। कुलबीर शांत स्वभाव के थे। आसपास के लोगों से कम ही संपर्क रखते थे।