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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Such a big sin in Pitru Paksha Abandoned parents while alive took shelter in old age home

Pitru Paksha 2024: पितृपक्ष में ऐसा महापाप...जीते जी त्याग दिए मां-बाप, रुला देगी इन बुजुर्गों की कहानी

Mon, 23 Sep 2024 03:15 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Mon, 23 Sep 2024 03:15 PM IST
सार

पितृपक्ष में अपने मृत पितरों की आत्मशांति के लिए लोग न जाने क्या-क्या जतन करते हैं, वहीं आगरा के रामलाल वृद्धाश्रम में ऐसे पांच बुजुर्ग पहुंचे, जिनके बच्चों ने उन्हें जीते जी त्याग दिया। 
 

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Such a big sin in Pitru Paksha Abandoned parents while alive took shelter in old age home
जीते जी त्याग दिए माता-पिता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पितृपक्ष में जहां अपनों के तर्पण श्रद्धा के साथ किए जा रहे हैं, वहीं 5 बुजुर्गों को उनकी ही संतान ने जीते जी त्याग दिया। वे किसी तरह रामलाल वृद्धाश्रम पहुंचे। वहां गैरोें ने जब संभाला तो रो पड़े। वृद्धाश्रम में ऐसे 300 से अधिक बुजुर्ग अपने दिन काट रहे हैं।
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पितृपक्ष शुरू होते ही सिकंदरा स्थित रामलाल वृद्धाश्रम में दान-पुण्य करने वालों की कतार लग रही है। चार दिनों में रामलाल वृद्धाश्रम में 5 बुजुर्ग शरण लेने पहुंचे। आश्रम के अध्यक्ष शिवप्रसाद शर्मा ने बताया कि बुजुर्गों की ऐसी हालत देख मन करुणा से भर जाता है। उन्होंने बताया कि हर दिन बुजुर्ग अपनों और अपने घर को याद कर रो पड़ते हैं।


 

बेटा खुद को पड़ोसी बता छोड़ गया
भगवान टॉकीज निवासी राम प्रकाश ने बताया कि बहू ने सेवा करने से मना कर दिया तो बेटा खुद को पड़ोसी कहकर आश्रम के गेट पर छोड़ गया। दुख तो बहुत हुआ लेकिन जिसमें बेटे की खुशी वही मंजूर है।

 
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स्टेशन पर मांगती थी भीख
फतेहपुर निवासी सरस्वती ने बताया कि 80 वर्ष की उम्र में स्टेशन पर भीख मांगने को मजबूर थी। कोई सहारा नहीं था। पुलिस वाले आश्रम में छोड़ गए।


 

हर दिन देते थे ताना
 जबलपुर के रहने वाले राम स्वरूप ने कहा कि बीमार होने के बाद कोई हाथ नहीं लगाता था। हर दिन बहू-बेटे ताना देते थे। उनकी खुशी के लिए घर छोड़ भटकते हुए आश्रम तक पहुंचे।


 

बीमार पड़ा तो छोड़ दिया
दौरेठा निवासी हरीश कुमार शर्मा ने बताया कि शादी की नहीं और जिंदगी अपनों के नाम कर दी। बीमार पड़ा तो बहन-भाई आश्रम की दहलीज पर छोड़ गए। किसी ने मुड़कर नहीं देखा।

 

जान के दुश्मन बन गए
मई गांव की रहने वाली रजनी ने बताया कि पति की मौत के बाद से 7 बीघा खेत के लिए अपने ही जान के दुश्मन बन गए। भाई अपने साथ रखना नहीं चाहता था। वृद्धाश्रम में छोड़ गए।
 
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