{"_id":"6913550da0f1e00d7606ec51","slug":"strawberry-cultivation-will-open-new-employment-opportunities-for-farmers-kasganj-news-c-175-1-kas1003-139369-2025-11-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Agra News: स्ट्रॉबेरी की खेती से किसानों के लिए खुलेंगे रोजगार के नए अवसर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Agra News: स्ट्रॉबेरी की खेती से किसानों के लिए खुलेंगे रोजगार के नए अवसर
विज्ञापन
फाेटो 11 कासगंज मोहनपुरा कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. अंकित सिंह भदौरिया स्ट्रोबेरी की फसल दिखात
कासगंज। जिले के अधिकांश किसान परंपरागत खेती पर निर्भर हैं। सामान्य खेती से अलग स्ट्रॉबेरी की खेती से किसानों को रोजगार के नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र मोहनपुरा के उद्यानिकी विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. अंकित सिंह भदौरिया ने बताया कि इस समय स्ट्रॉबेरी की फसल लगाने का सही समय है।
स्ट्रॉबेरी एक अत्यंत लोकप्रिय, पौष्टिक और उच्च मूल्य वाली फसल है। इसके फल विटामिन सी, एंटी-ऑक्सीडेंट्स एवं खनिजों से भरपूर होते हैं। फसल को पूरी तरह लाल रंग आने पर तोड़ा जाता है। औसतन प्रति हेक्टेयर 15 से 25 टन उत्पादन आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। जनपद के किसान किसी भी सहायता अथवा अधिक जानकारी के लिए कृषि विज्ञान केंद्र मोहनपुरा में किसी भी कार्य दिवस में संपर्क कर सकते हैं। डॉ. अंकित सिंह भदौरिया ने बताया कि इसकी रोपाई मध्य अक्तूबर से नवंबर तक की जाती है। जनपद की जलवायु के अनुसार यह रोपाई का उपयुक्त समय है। जैविक खाद में गोबर की 20 से 25 टन खाद प्रति हेक्टेयर या फिर 80 से 100 किग्रा नाइट्रोजन, 60 किग्रा फास्फोरस और 60 से 80 किग्रा पोटाश प्रति हेक्टेयर खेत के लिए पर्याप्त है।
खेत में जलभराव न होने दे
स्ट्रॉबेरी की फसल में फल बनने की स्थिति में नियमित सिंचाई की जरूरत होती है। जल एवं पोषक तत्वों की बचत होने के कारण ड्रिप इरिगेशन सबसे कारगर विधि है। इस बात का विशेष ध्यान रहे कि खेत में जलभराव नहीं होने पाए वरना पौधे की जड़ें खराब हो सकती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
स्ट्रॉबेरी एक अत्यंत लोकप्रिय, पौष्टिक और उच्च मूल्य वाली फसल है। इसके फल विटामिन सी, एंटी-ऑक्सीडेंट्स एवं खनिजों से भरपूर होते हैं। फसल को पूरी तरह लाल रंग आने पर तोड़ा जाता है। औसतन प्रति हेक्टेयर 15 से 25 टन उत्पादन आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। जनपद के किसान किसी भी सहायता अथवा अधिक जानकारी के लिए कृषि विज्ञान केंद्र मोहनपुरा में किसी भी कार्य दिवस में संपर्क कर सकते हैं। डॉ. अंकित सिंह भदौरिया ने बताया कि इसकी रोपाई मध्य अक्तूबर से नवंबर तक की जाती है। जनपद की जलवायु के अनुसार यह रोपाई का उपयुक्त समय है। जैविक खाद में गोबर की 20 से 25 टन खाद प्रति हेक्टेयर या फिर 80 से 100 किग्रा नाइट्रोजन, 60 किग्रा फास्फोरस और 60 से 80 किग्रा पोटाश प्रति हेक्टेयर खेत के लिए पर्याप्त है।
विज्ञापन
खेत में जलभराव न होने दे
स्ट्रॉबेरी की फसल में फल बनने की स्थिति में नियमित सिंचाई की जरूरत होती है। जल एवं पोषक तत्वों की बचत होने के कारण ड्रिप इरिगेशन सबसे कारगर विधि है। इस बात का विशेष ध्यान रहे कि खेत में जलभराव नहीं होने पाए वरना पौधे की जड़ें खराब हो सकती हैं।
विज्ञापन

फाेटो 11 कासगंज मोहनपुरा कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. अंकित सिंह भदौरिया स्ट्रोबेरी की फसल दिखात