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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   story of bandit Chhaviram who challenged Mulayam Singh in Mainpuri seat strong interference in many seats

UP: मुलायम सिंह को चुनौती देने वाले दस्यु की कहानी, खौफ से लोग बुलाते थे 'नेताजी'; इन सीटों पर था जबरदस्त दखल

Mon, 15 Apr 2024 10:21 AM IST
भूपेन्द्र सिंह दीपक जैन, आगरा
दीपक जैन, आगरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Mon, 15 Apr 2024 10:21 AM IST
सार

मुलायम सिंह को चुनौती देने वाले दस्यु छविराम की कहानी। खौफ से लोग उसे 'नेताजी' बुलाते थे। आगरा, मैनपुरी, एटा सहित कई सीटों पर जबरदस्त दखल था। 

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story of bandit Chhaviram who challenged Mulayam Singh in Mainpuri seat strong interference in many seats
दस्यु छविराम , मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के आगरा में एक वक्त ऐसा भी था जब डकैतों का राजनीति में दखल था। उन्हीं डकैतों में एक दस्यु छविराम भी था। मैनपुरी के गांव में जन्मे छविराम का राजनीति में इतना दखल था कि उसे नेताजी कहा जाने लगा। बीहड़ में रहने वाले इस डकैत ने बंदूक के बल पर वोट डलवाए। 
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सपा संरक्षक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव की राजनीतिक कर्मभूमि इटावा और मैनपुरी क्षेत्र में छविराम, मुलायम सिंह यादव को ही चुनौती देने लगा था। छविराम के आतंक से छुटकारा पाने के लिए खुद मुलायाम सिंह को आगे आना पड़ा था। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री वीपी सिंह को पत्र लिखा था। 
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दस्यु छविराम से इटावा, मैनपुरी और कानपुर के अलावा अन्य मध्य प्रदेश और राजस्थान राज्यों के ग्रामीण भी खौफ खाते थे। उस समय मुलायम सिंह के अलावा उनके समर्थकों के लिए डकैत सिरदर्द बन चुका था। मैनपुरी और इटावा में वह मुलायम के समर्थकों को परेशान करने लगा था। 
 
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1982 में मुलायम सिंह बीकेडी पार्टी में थे। छविराम, मुलायम सिंह के कार्यकर्ताओं को धमकी देने के साथ ग्रामीणों को शिकार बनाता था। मुलायम दखल के बाद तब यूपी सरकार ने छविराम को किसी भी कीमत पर जिंदा या मुर्दा पकड़ने के आदेश दिए थे। 
 
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20 साल की उम्र में उठा ली थी बंदूक 

जिला मैनपुरी के औछा गांव में छविराम का जन्म हुआ था। बताते हैं 20 साल की उम्र में छविराम बंदूक उठा ली थी। 1970 से लेकर 1982 तक छविराम की तूती उत्तर प्रदेश में बोलती थी।  छविराम को गैंग के अन्य सदस्य नेताजी के नाम से पुकारते थे। गांव वाले भी डकैत को नेताजी कहते थे।
 

ऐसे मारा गया था दस्यु 

1982 में छविराम ने एटा के अलीगंज तहसील के तत्कालीन सीओ को पकड़ कर यूपी सरकार को चुनौती दी। छविराम ने एक दिन बाद ही सीओ को छोड़ दिया था। तत्कालीन एसपी कर्मवीर सिंह को छविराम के खात्मे की जिम्मेदारी दी गई थी। एसपी व उनकी टीम ने छविराम और उसके गिरोह को मैनपुरी जिले के बरनाहल ब्लाक के पास सेंगर नदी की तलहटी पर घेर लिया था। लगभग 20 घंटे तक मुठभेड़ चली। छविराम के साथ-साथ 8 डकैतों को मौत के घाट उतार दिया गया था।
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