फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   story behind latthmar holi

क्यों खेली जाती है लट्ठमार होली?

Thu, 21 Mar 2013 01:41 PM IST
बरसाना/ब्यूरो
बरसाना/ब्यूरो Updated Thu, 21 Mar 2013 01:41 PM IST
विज्ञापन
story behind latthmar holi

आज महिलाओं को आत्मरक्षा की ट्रेनिंग दी जा रही है लेकिन ब्रज में यह काम सैकड़ों वर्ष पहले ही शुरू हो चुका था। गुलामी के दौर में पुरुषों ने ब्रज ललनाओं को भी लाठी चलाना सिखाया। आगे चलकर यही लाठी लट्ठमार बन गई।

विज्ञापन


ब्रज साहित्य की पुस्तकों में इसी तरह का उल्लेख मिलता है। द्वापर के होली साहित्य में कहीं भी लट्ठमार के पद, गीत नहीं हैं। यह परंपरा 16वीं सदी के आसपास शुरू हुई मानी जाती है।
विज्ञापन


लठामार होली नंदगांव और बरसाने ही नहीं बल्कि ब्रज के कई गांवों में अलग-अलग दिन होती है। जाव बठैन में भी होरी पर लाठी चलती है।

साहित्यकार स्व. गोपाल प्रसाद व्यास ने अपने लेख ब्रज की रंगीली होली में लट्ठमार के इतिहास का वर्णन किया है। लेख के अनुसार गुलामी के दौर में महिलाएं सुरक्षित नहीं थी। ऐसे में ब्रज के पुरुषों ने महिलाओं को लाठी चलाने में निपुण किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


ब्रिटिश काल में मथुरा के कलेक्टर रहे ग्राउस ने लठामार को कृत्रिम युद्ध लिखा है। नारियों ने अपने बल का प्रदर्शन कर यह जता दिया कि कोई भी उनकी तरफ आंख उठाएगा तो ‘मार मार लट्ठ धूर कर आए’ का दिन देखना पड़ेगा।

महिलाओं की इस लाठी का दम अब भी लट्ठमार होली पर नजर आता है। जब कोई राह से गुजरने वाला उनसे कुछ कहता है, तो उस पर लाठी चल पड़ती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed