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एक्सक्लूसिव: 'जुर्म की कुंडली' बनने के बाद मिली चौंकाने वाली जानकारी
Mon, 12 Oct 2020 01:37 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 12 Oct 2020 01:37 PM IST
सार
जेल से छूटकर कर रहे अपराध, एसएसपी ने कराया 9655 अपराधियों का सत्यापन, 695 परिवार सहित घर छोड़कर लापता हो गए
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विस्तार
ताजनगरी में 280 अपराधियों ने 44 थानों की पुलिस की नाक में दम कर रखा है। ये हाथ ही नहीं आ रहे हैं और वारदात पर वारदात किए जा रहे हैं। इनके अलावा 695 ऐसे हैं जो परिवार घर छोड़ने के बाद लापता हो गए हैं। यह डाटा एसएसपी बबलू कुमार ने ईगल मोबाइल को एक -एक अपराधी के घर भेजकर तैयार कराया है। कुल 9655 अपराधियों की सूची लेकर पुलिस टीमों ने सत्यापन किया।
पुलिस का यह अभियान हर अपराधी की कुंडली बनाने के लिए था। इसके लिए जेल से छूटे सभी अपराधियों के घर ईगल मोबाइल (पुलिस की विशेष टीम) को भेजा गया। जिलेभर का डाटा तैयार हुआ तो पता चला कि 7,418 अपराधी जेल से बाहर हैं। ये अपराधी 280 गिरोह के सदस्य हैं। इनमें से 1,725 हिस्ट्रीशीटर हैं। 2,237 अपराधी जेल में बंद हैं।
जुर्म की कुंडली तैयार होने के बाद इन्हें थानावार भेज दिया गया। फरार चल रहे 280 अपराधियों की धरपकड़ के लिए हर थाने को जिम्मेदारी दी गई है। इनमें से बड़े अपराधियों की कुंडली क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है।
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पुलिस का यह अभियान हर अपराधी की कुंडली बनाने के लिए था। इसके लिए जेल से छूटे सभी अपराधियों के घर ईगल मोबाइल (पुलिस की विशेष टीम) को भेजा गया। जिलेभर का डाटा तैयार हुआ तो पता चला कि 7,418 अपराधी जेल से बाहर हैं। ये अपराधी 280 गिरोह के सदस्य हैं। इनमें से 1,725 हिस्ट्रीशीटर हैं। 2,237 अपराधी जेल में बंद हैं।
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जुर्म की कुंडली तैयार होने के बाद इन्हें थानावार भेज दिया गया। फरार चल रहे 280 अपराधियों की धरपकड़ के लिए हर थाने को जिम्मेदारी दी गई है। इनमें से बड़े अपराधियों की कुंडली क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है।
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आगरा पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
1. गिरोह 300 से ज्यादा, पंजीकृत सिर्फ 82
पुलिस ने पिछले तीन साल में 300 से ज्यादा गैंगस्टर एक्ट लगाए हैं। इसका अर्थ यह है कि जिले में गिरोह की संख्या भी 300 से ज्यादा है। लेकिन पंजीकृत गिरोह सिर्फ 82 हैं। दरअसल, पंजीकृत वे ही गिरोह किए गए हैं जो लगातार सक्रिय हैं और जिनका रिकार्ड पुलिस के पास है।
2. इनामी होकर भी 65 अपराधी हाथ नहीं आए
पुलिस रिकार्ड में 65 ऐसे अपराधी हैं जिनकी गिरफ्तारी पर इनाम है। इसके बावजूद इन्हें पकड़ा नहीं जा सका है। हालांकि इस साल पुलिस 90 इनामी अपराधियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
ये भी पढ़ें- शर्मनाकः ताजनगरी में सुरक्षित नहीं बालिकाएं, हैरान करने वाले हैं पुलिस के आंकड़े
पुलिस ने पिछले तीन साल में 300 से ज्यादा गैंगस्टर एक्ट लगाए हैं। इसका अर्थ यह है कि जिले में गिरोह की संख्या भी 300 से ज्यादा है। लेकिन पंजीकृत गिरोह सिर्फ 82 हैं। दरअसल, पंजीकृत वे ही गिरोह किए गए हैं जो लगातार सक्रिय हैं और जिनका रिकार्ड पुलिस के पास है।
2. इनामी होकर भी 65 अपराधी हाथ नहीं आए
पुलिस रिकार्ड में 65 ऐसे अपराधी हैं जिनकी गिरफ्तारी पर इनाम है। इसके बावजूद इन्हें पकड़ा नहीं जा सका है। हालांकि इस साल पुलिस 90 इनामी अपराधियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
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एसएसपी बबलू कुमार, आगरा
- फोटो : अमर उजाला
सबसे पुराना गिरोह : मोहन डॉन का। डॉन मर चुका है। न्यू आगरा में गिरोह 1997 में पंजीकृत हुआ। सदस्य जेल में हैं।
सबसे नया गिरोह : यह मलपुरा के संतोष यादव का है। इसके सदस्य जेल में हैं। यह गिरोह भाड़े पर हत्या करता है।
सबसे बड़ा गिरोह : यह सैंया के राम नरेश का है। लूट और अपहरण करता है। इस गिरोह में 21 सदस्य हैं।
सबसे ज्यादा वारदात : बाइकर्स गैंग सबसे ज्यादा वारदात कर रहा है। दस से ज्यादा गिरोह हैं। चेन, पर्स और मोबाइल लूटते हैं।
8,960 अपराधियों की कुंडली बनाई है
ईगल मोबाइल से सत्यापन कराकर 8,960 अपराधियों का डोजियर तैयार कराया गया है। इनके परिजन, रिश्तेदार, छिपने के ठिकाने, अब तक किए अपराध, मोबाइल नंबर तक की जानकारी इसमें है। इससे न केवल अपराधियों पर नजर रखने में मदद मिलेगी बल्कि फरार अपराधी को पकड़ने में सुविधा भी होगी - बबलू कुमार, एसएसपी
सबसे नया गिरोह : यह मलपुरा के संतोष यादव का है। इसके सदस्य जेल में हैं। यह गिरोह भाड़े पर हत्या करता है।
सबसे बड़ा गिरोह : यह सैंया के राम नरेश का है। लूट और अपहरण करता है। इस गिरोह में 21 सदस्य हैं।
सबसे ज्यादा वारदात : बाइकर्स गैंग सबसे ज्यादा वारदात कर रहा है। दस से ज्यादा गिरोह हैं। चेन, पर्स और मोबाइल लूटते हैं।
8,960 अपराधियों की कुंडली बनाई है
ईगल मोबाइल से सत्यापन कराकर 8,960 अपराधियों का डोजियर तैयार कराया गया है। इनके परिजन, रिश्तेदार, छिपने के ठिकाने, अब तक किए अपराध, मोबाइल नंबर तक की जानकारी इसमें है। इससे न केवल अपराधियों पर नजर रखने में मदद मिलेगी बल्कि फरार अपराधी को पकड़ने में सुविधा भी होगी - बबलू कुमार, एसएसपी