विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार: भुगतान बिल में ओवरराइटिंग, तारीख भी बदल दी, जांच में एसटीएफ को मिले साक्ष्य
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में प्रभारी कुलपति रहे प्रो. विनय पाठक के कार्यकाल में हुए बिल भुगतानों में भी छेड़छाड़ की गई है। जांच में एसटीएफ को इसके साक्ष्य मिले हैं।
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आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में प्रभारी कुलपति रहे प्रो. विनय पाठक के कार्यकाल में भ्रष्टाचार की परतें खुल रही हैं। जांच कर रही एसटीएफ को अब भुगतान बिल में छेड़छाड़ के साक्ष्य मिले हैं। इनमें ओवरराइटिंग हुई है और तारीख बदली गई है। एसटीएफ की शिकायत के बाद कुलपति ने मामले की जांच के लिए समिति बना दी है।
प्रभारी कुलपति प्रो. पाठक के कार्यकाल (जनवरी से सितंबर) तक परिणाम तैयार करने वाली एजेंसी के बिल, भुगतान, टेंडर, नियुक्तियां और अन्य विकास कार्यों की जांच एसटीएफ कर रही है। टीम ने 20 दिन की जांच में संबंधित दस्तावेज जब्त किए हैं। भुगतान के बिल में ओवरराइटिंग मिली है। पूर्व की जानकारी से छेड़छाड़ कर नए तथ्य लिखे गए हैं। एक बिल में आदेश की तारीख से भी छेड़छाड़ कर उसे बदल दिया गया है।
कई दस्तावेज अधूरे मिले हैं। कई रिकॉर्ड जो एसटीएफ को नहीं मिल रहे हैं, उनके गायब होने की आशंका जताई गई है। इस मामले में एसटीएफ ने कुलपति को पत्र लिखा है। आपत्ति जताते हुए दस्तावेज व अन्य साक्ष्यों में किसी तरह के बदलाव न करने की हिदायत देने को भी कहा है। एसटीएफ का पत्र मिलने के बाद कुलपति ने इसकी जांच शुरू करा दी है।
कुलसचिव के नेतृत्व में बनाई समिति
कुलपति प्रो. आशु रानी ने बताया कि एसटीएफ ने कुछ दस्तावेजों में ओवरराइटिंग और तारीख बदलने की शिकायत की है, इसे गंभीरता से लेते हुए जांच करा रहे हैं। कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह और वित्त अधिकारी सत्येंद्र कुमार के नेतृत्व में जांच समिति बनाई है।
किसी बदलाव पर मुहर और हस्ताक्षर जरूरी
कुलपति ने बताया कि एसटीएफ जो भी दस्तावेज मांग रही है, उनको मुहैया कराया जा रहा है। कागजात में छेड़छाड़ की शिकायत के बाद आदेश जारी किया है कि भूलवश त्रुटि होने पर सुधार किया गया है तो भी संबंधित को अपना नाम, हस्ताक्षर और तिथि दर्ज करना, मुहर लगाना अनिवार्य है। इससे जरूरत के समय संबंधित व्यक्ति से इसकी वजह भी पूछी जा सकेगी।
पांच की टीम पर संदेह
एसटीएफ को जांच में प्रो. पाठक के विश्वविद्यालय में पांच खासमखास लोगों पर संदेह है। उनका मानना है कि इनके जरिए ही सभी कार्य होते थे। एसटीएफ ने इन पांचों (प्रोफेसर व कर्मचारी) पर ही साक्ष्य में बदलाव और छेड़छाड़ का संदेह जताया है। इनसे हाल ही में पूछताछ में एसटीएफ ने विश्वविद्यालय के परीक्षा, गोपनीय और संबद्धता, वित्त विभाग में लगातार चक्कर काटने की वजह भी पूछी थी।