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‘प्रदेश सरकार की बेरुखी का दंश झेल रही सोरोंजी’

Sun, 10 Oct 2021 11:03 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sun, 10 Oct 2021 11:03 PM IST
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'Soronji is facing the brunt of the state government's indifference'
सोरों की हरि की पौड़ी गंगा। - फोटो : KASGANJ
संवाद न्यूज एजेंसी
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सोरोंजी(कासगंज)। जनपद की अमूल्य धरोहर सोरोंजी सूकरक्षेत्र पौराणिक और प्राचीन तीर्थस्थल होने के बावजूद देश के तीर्थस्थलों की सूची में शामिल न होने से पुरोहितों में आक्रोश है। यहां के पौराणिक प्रमाण की ओर भी सरकार की नजर नहीं है। पुराणों में जिक्र है कि यह क्षेत्र 52 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है।
वराह पुराण में भगवान वराह के अवतरण के संबंध में श्लोक, यत्र भागीरथी गंगा, मम: सौकरवे स्थिता का उल्लेख मिलता है। सूकरक्षेत्र की प्राकट्य भूमि की परिधि 5 योजन (52 किलोमीटर) तक बताई गई है। इस संबंध में पद्मपुराण के एक श्लोक पंचयोजन विस्तीर्ण सूकरे मम: मंदिरे में यह उल्लेख किया गया है। वहीं तीर्थंनगरी में हरि की पौड़ी गंगा के संबंध में यह सत्य है कि इस कुंड में विसर्जित की जाने वाली अस्थियां स्वत: ही जल रूप ले लेतीं हैं। वराह पुराण में इसका भी उल्लेख किया गया है।
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इस मान्यता के चलते प्रतिदिन लोग अस्थि विसर्जन के लिए यहां पहुंचते हैं। ऐसी ऐतिहासिक और पौराणिक तीर्थस्थल एवं धार्मिक महत्व के बाबजूद तीर्थस्थल की सूची में सोरों सूकरक्षेत्र का नाम शामिल न होने से लोग मायूस हैं। तीर्थपुरोहितों का कहना है कि सरकार की बेरुखी का दंश यह क्षेत्र झेल रहा है।
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अत्यंत प्राचीन है तीर्थस्थल
सोरोंजी सूकरक्षेत्र अत्यंत प्राचीन तीर्थस्थल है। यहां भगवान वराह ने सतयुग में अवतार लिया था, लेकिन यह तीर्थस्थल पूरी तरह से उपेक्षित है। किसी भी सरकार ने यहां के विकास पर ध्यान नहीं दिया। -रवि पाराशर, तीर्थपुरोहित
सरकार ध्यान दे
सोरोंजी तीर्थंनगरी अन्य तीर्थो की तुलना में काफी प्राचीन है। कभी भी किसी सरकार ने यहां के विकास के लिए कोई पैकेज नहीं दिया। न ही इसे तीर्थस्थल की सूची में शामिल किया गया। सरकार इस पर ध्यान दे। -अनिल तिवारी, व्यवसायी
जनपद का गौरव है तीर्थनगरी
तीर्थनगरी जनपद का गौरव है, लेकिन इस पर सरकार का ध्यान नहीं है। तीर्थ पर्यटकों के लिए यहां कोई सुविधा नहीं मिलती। इससे पर्यटन पर असर पड़ता है। तीर्थंनगरी को तीर्थस्थल घोषित करे। -कुशलपाल सिंह पुंढीर, पूर्व विज्ञान प्रवक्ता

देवभूमि है सूकरक्षेत्र
सूकरक्षेत्र राजनीतिक दृष्टि से काफी उपेक्षित है, जबकि यह देवभूमि है। प्राचीन इतिहास और धरोहरों का संरक्षण भी नहीं किया गया है। तीर्थंनगरी घोषित होने के बाद यहां विकास के अच्छे अवसर पर पैदा होंगे। -स्वतंत्र अग्रवाल, कारोबारी
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