{"_id":"5c9109a2bdec22142544642d","slug":"sooraj-singh-shakya-congress-candidate-from-etah-in-lok-sabha-elections-2019","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सलमान और सलीम को 'शक्ति' देंगे एटा के सूरज, कांग्रेस ने बिछाई है यह बिसात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सलमान और सलीम को 'शक्ति' देंगे एटा के सूरज, कांग्रेस ने बिछाई है यह बिसात
Wed, 20 Mar 2019 07:47 AM IST
मुकेश कुमार
विजय मिश्रा, अमर उजाला, एटा
विजय मिश्रा, अमर उजाला, एटा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Wed, 20 Mar 2019 07:47 AM IST
विज्ञापन
कांग्रेस ने सूरज सिंह शाक्य को बनाया प्रत्याशी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजनीति में अक्सर एक तीर से कई निशाने लगाए जाते हैं। इस बार कांग्रेस ने भी जन अधिकार पार्टी से गठबंधन कर सूरज सिंह शाक्य को एटा के चुनावी मैदान में उतारा है। प्रत्याशी के सामने आते ही रणनीतिक बिसात बिछानी शुरू कर दी गई है।
माना जा रहा है कि एटा से सूरज सिंह शाक्य के प्रत्याशी हो जाने से फर्रुखाबाद और कासगंज के शाक्य कांग्रेस की ओर झुक सकते हैं। यह भी कह सकते हैं कि एटा से सूरज बदायूं के सलीम और फर्रुखाबाद में सलमान को शक्ति देंगे।
कांग्रेस ने ऐसी सियासी बिसात बिछा रही है, जिसका फायदा दूसरी सीटों पर भी मिले। सूरज सिंह शाक्य को समर्थन देकर एक बार फिर ऐसा ही लक्ष्य साधा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों की मानें इनकी प्रत्याशिता के पीछे नेहरू गांधी परिवार के खासे करीबी रहे दो पूर्व मंत्रियों की जीत पक्की करना है।
विज्ञापन
विज्ञापन
माना जा रहा है कि एटा से सूरज सिंह शाक्य के प्रत्याशी हो जाने से फर्रुखाबाद और कासगंज के शाक्य कांग्रेस की ओर झुक सकते हैं। यह भी कह सकते हैं कि एटा से सूरज बदायूं के सलीम और फर्रुखाबाद में सलमान को शक्ति देंगे।
विज्ञापन
कांग्रेस ने ऐसी सियासी बिसात बिछा रही है, जिसका फायदा दूसरी सीटों पर भी मिले। सूरज सिंह शाक्य को समर्थन देकर एक बार फिर ऐसा ही लक्ष्य साधा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों की मानें इनकी प्रत्याशिता के पीछे नेहरू गांधी परिवार के खासे करीबी रहे दो पूर्व मंत्रियों की जीत पक्की करना है।
विज्ञापन
सलमान और सलीम यहां से हैं प्रत्याशी
बदायूं संसदीय क्षेत्र से पूर्व मंत्री सलीम इकबाल शेरवानी और फर्रुखाबाद (अलीगंज) संसदीय क्षेत्र से पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद प्रत्याशी हैं। दोनों ही क्षेत्रों में शाक्य मतदाताओं की बड़ी संख्या है। इनके रुख से यहां की जीत तय होती है।
कई बार सांसद रहे दयाराम शाक्य, महादीपक शाक्य, सुशील शाक्य, बृजपाल सिंह शाक्य आदि कांग्रेस को हमेशा चुनौती देते रहे हैं। कांग्रेसी चाणक्यों का मानना है कि केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव जीतने वाली भाजपा ने योगी को सिंहासन सौंप कर मौर्य को पीछे धकेल दिया। इससे आहत शाक्य मतदाताओं की सहानुभूति भी कांग्रेस के लिए संजीवनी बन सकती है।
पहले भी कुछ ऐसी रही थी रणनीति
वर्ष 2009 के चुनाव में भी ऐसी ही रणनीति के चलते इन दोनों प्रत्याशियों को लाभ पहुंचाने के लिए छह बार के सांसद रहे डॉ महादीपक को कांग्रेस ने एटा से चुनाव लड़ाया था। सूत्रों के अनुसार फाइट में न होने के बाद भी इन्हें पार्टी द्वारा बड़ी आर्थिक मदद की गई ताकि यह बीच में चुनावी दंगल से पीछे न हट जाएं।
बाबूजी से नाखुश रहे शाक्य नेता
दशकों तक एटा, फर्रुखाबाद संसदीय क्षेत्र से परचम लहराने वाले शाक्यों को बाबूजी परिवार के आने के बाद वनवास झेलना पड़ रहा है। उन्होंने अपने चहेतों को टिकट दिलाकर दोनों सीटें लोधियों के नाम कर दीं। इसके चलते शाक्य जाति के लोगों में उनको लेकर खासी नाराजगी है। वह किसी भी कीमत पर नहीं चाहेंगे कि परिवारवाद और आगे बढ़ सके।
कई बार सांसद रहे दयाराम शाक्य, महादीपक शाक्य, सुशील शाक्य, बृजपाल सिंह शाक्य आदि कांग्रेस को हमेशा चुनौती देते रहे हैं। कांग्रेसी चाणक्यों का मानना है कि केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव जीतने वाली भाजपा ने योगी को सिंहासन सौंप कर मौर्य को पीछे धकेल दिया। इससे आहत शाक्य मतदाताओं की सहानुभूति भी कांग्रेस के लिए संजीवनी बन सकती है।
पहले भी कुछ ऐसी रही थी रणनीति
वर्ष 2009 के चुनाव में भी ऐसी ही रणनीति के चलते इन दोनों प्रत्याशियों को लाभ पहुंचाने के लिए छह बार के सांसद रहे डॉ महादीपक को कांग्रेस ने एटा से चुनाव लड़ाया था। सूत्रों के अनुसार फाइट में न होने के बाद भी इन्हें पार्टी द्वारा बड़ी आर्थिक मदद की गई ताकि यह बीच में चुनावी दंगल से पीछे न हट जाएं।
बाबूजी से नाखुश रहे शाक्य नेता
दशकों तक एटा, फर्रुखाबाद संसदीय क्षेत्र से परचम लहराने वाले शाक्यों को बाबूजी परिवार के आने के बाद वनवास झेलना पड़ रहा है। उन्होंने अपने चहेतों को टिकट दिलाकर दोनों सीटें लोधियों के नाम कर दीं। इसके चलते शाक्य जाति के लोगों में उनको लेकर खासी नाराजगी है। वह किसी भी कीमत पर नहीं चाहेंगे कि परिवारवाद और आगे बढ़ सके।