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सॉफ्टवेयर इंजीनियर को ही ठग लिया: साइबर ठगों ने बिछाया ऐसा जाल, रकम ही नहीं कार भी गवां बैठा
Mon, 26 Jun 2023 12:10 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला, आगरा
अमर उजाला, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 26 Jun 2023 12:10 PM IST
सार
सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपनी कार को बेंगलुरु भेजने के लिए इंटरनेट पर नंबर सर्च किया था। वहां से आए दो ठगों के जाल में वो ऐसा फंसा कि कार और रकम दोनों ही दी दीं। बाद में जब उसे ठगी के बारे में पता चला तो उसके पसीने छूट गए।
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साइबर फ्रॉड
- फोटो : Social media
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विस्तार
कानपुर के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को ठगों ने अपने जाल में फंसा लिया। तबादला होने पर कार को बेंगलुरु भेजने के चक्कर में इंटरनेट पर नंबर सर्च किया। साइबर ठगों ने फर्जी वेबसाइट मूवर्स एंड पैकर्स के नाम से बना रखी थी। कम किराए पर कार को ट्रांसपोर्ट करने का झांसा दिया। पीड़ित से ठगों ने कार ही नहीं रकम भी ऐंठ ली। इसके बाद और रकम लेने के लिए पीड़ित को आगरा बुलाया। यहां जब वो पहुंचा तो पता चला कि उसके साथ धोखा हो गया है।
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ये है मामला
केडीए कॉलोनी दहेली निवासी बौबी सिंह आईटी कंपनी में नौकरी करते हैं। इनका हाल ही में तबादला बेंगलुरु हो गया। उन्हें अपनी हुंडई वरना कार को बेंगलुरु ले जाना था। इसके लिए उन्होंने ऑनलाइन एक मूवर्स एंड पैकर्स कंपनी का नंबर गूगल पर सर्च किया। यहां उन्हें एक बेवसाइट मिली जोकि आरआर मूवर्स एंड पैकर्स के नाम से थी। उन्होंने वेबसाइट को खोल लिया और एक एप्लीकेशन फॉर्म भरकर सबमिट कर दिया।ये भी पढ़ें - पांच हत्या फिर खुदकुशी: बारिश ने धो दिए खून के दाग, आंखों से नहीं हट रहा मंजर; हर तरफ बिखरे थे लहूलुहान शव
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दो दिन बाद घर आए दो लोग
दो दिन बाद एक नंबर से उनके पास कॉल आया कि कार सुरक्षित पहुंचा दी जाएगी। इसके लिए 16 हजार 600 रुपये लगेंगे। 21 जून को दो लोग उनके घर पर आ गए। अपना नाम राहुल और इंतियाज बताया और गाड़ी को लेकर चले गए।ये भी पढ़ें - मौत बनकर दौड़ी ईको कार: हाईवे पर वाहनों का इंतजार कर रहे लोगों को रौंदा, बुजुर्ग की मौत; कई घायल
किया था ये वादा
27 जून तक गाड़ी को बेंगलुरु पहुंचाने का वादा किया था। कुछ देर बाद ही कॉल करके जीएसटी और बीमा के नाम पर 40 हजार रुपये अतरिक्त मांगने लगे। मना करने पर गाड़ी को गायब करने की धमकी दी। इस धमकी के बाद वे रुपये देने के लिए राजी हो गए।ये भी पढ़ें - पांच हत्या फिर खुदकुशी: बहते रहे आंसू... अपनों को तलाशती रहीं नजरें, बर्बरता को याद कर सहम जाते हैं परिजन