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Snoring: खर्राटे लेना बेहद खतरनाक, हो सकती है मौत, संगीतकार बप्पी लहरी की भी इसी वजह से गई थी जान
Mon, 06 Mar 2023 02:55 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 06 Mar 2023 02:55 PM IST
सार
खर्राटे जानलेवा भी हो सकते हैं। ऑक्सीजन लेवल 80 फीसदी से कम होने या फिर डेढ़ से दो मिनट तक सांस रुकने पर जान भी जा सकती है।
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सोने के समय खर्राटे
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
लोगों में खर्राटे की समस्या बढ़ती जा रही है। मुख्य वजह मोटापा है। खर्राटे आना अच्छी बात नहीं है। इसके बढ़ने से ब्लड प्रेशर, एसिडिटी की समस्या भी बढ़ जाती है। देहरादून से आए डॉ. हिमांशु काला ने ये बातें कहीं। वो यूपी ईएनटी एसोसिएशन व एसएन मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग की ओर से होटल क्लार्क्स शीराज में आयोजित राज्य स्तरीय सम्मेलन-यूपीएओआईकॉन के समापन अवसर पर व्याख्यान दे रहे थे।
डॉ. हिमांशु काला ने बताया कि खर्राटे जानलेवा भी हो सकते हैं। ऑक्सीजन लेवल 80 फीसदी से कम होने या फिर डेढ़ से दो मिनट तक सांस रुकने पर जान भी जा सकती है। संगीतकार बप्पी लहरी की मौत इसी बीमारी की वजह से हुई थी। खर्राटे तेज होने पर बीच-बीच में हृदय में ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो पाती है। हृदय तेजी से काम करने लगता है। ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि ईएनटी विभाग में ही खर्राटे के विशेषज्ञ होते हैं। वजन कम करके भी खर्राटे पर 30 फीसदी तक नियंत्रण पाया जा सकता है। आखिरी दिन सैफई मेडिकल कॉलेज के डॉ. जितेंद्र चौहान ने कान की हड्डी गलने के बाद दूसरी हड्डी लगाने, दिल्ली के डॉ. सौरभ अरोड़ा ने ऑपरेशन में नसों को नुकसान से बचाने के लिए नई तकनीक पर व्याख्यान दिया।
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डॉ. हिमांशु काला ने बताया कि खर्राटे जानलेवा भी हो सकते हैं। ऑक्सीजन लेवल 80 फीसदी से कम होने या फिर डेढ़ से दो मिनट तक सांस रुकने पर जान भी जा सकती है। संगीतकार बप्पी लहरी की मौत इसी बीमारी की वजह से हुई थी। खर्राटे तेज होने पर बीच-बीच में हृदय में ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो पाती है। हृदय तेजी से काम करने लगता है। ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है।
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उन्होंने बताया कि ईएनटी विभाग में ही खर्राटे के विशेषज्ञ होते हैं। वजन कम करके भी खर्राटे पर 30 फीसदी तक नियंत्रण पाया जा सकता है। आखिरी दिन सैफई मेडिकल कॉलेज के डॉ. जितेंद्र चौहान ने कान की हड्डी गलने के बाद दूसरी हड्डी लगाने, दिल्ली के डॉ. सौरभ अरोड़ा ने ऑपरेशन में नसों को नुकसान से बचाने के लिए नई तकनीक पर व्याख्यान दिया।
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