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आगरा: जमीन के एक मीटर नीचे के बजाय छह इंच ऊपर डाल दी पानी की लाइन, जांच के आदेश

Tue, 19 Jan 2021 12:43 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 19 Jan 2021 12:43 PM IST
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Smart city workers irregularities in laying water pipeline in agra
आगरा: जमीन से छह इंच ऊपर है पाइपलाइन - फोटो : अमर उजाला

आगरा के जीवनी मंडी वाटरवर्क्स से ताजगंज तक पानी की जो लाइन जमीन के एक मीटर नीचे डालनी थी, उसे 'स्मार्ट सिटी' के कर्मचारियों ने छह इंच ऊपर डाल दी। महीने भर पहले किए गए इस काम के बाद अब सड़क बनाने की बारी आई तो पांच विभागों के अफसरों की टीम इसकी जांच करेगी और उपाय बताएगी कि सड़क  कैसे बनेगी और लाइन में पानी कैसे चल पाएगा?

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1200 मिमी की 40 मीटर लंबी यह लाइन जीवनी मंडी में लक्ष्मी मिल और मंदिर के सामने डाली गई है। सात दिन पहले सड़क बनाने का काम शुरू हुआ। जैसे ही गिट्टी डाली गई ,ठेकेदार ने हाथ खड़े कर दिए। अफसरों को बताया कि सड़क बनाई तो लाइन टूट सकती है। क्षेत्र के लोगों ने भी इसकी शिकायत की। 
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इसके बाद स्मार्ट सिटी सीईओ एवं नगर आयुक्त निखिल टीकाराम फुंडे ने पांच विभागों की कमेटी बनाई है, जिसमें पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता, जलनिगम इंजीनियर, जलकल इंजीनियर, स्मार्ट सिटी महाप्रबंधक और अपर नगर आयुक्त शामिल किए गए हैं। संकट यह भी है कि लाइन को अब गहराई में डाला भी नहीं जा सकता है क्योंकि इसके नीचे सीवर की लाइन है।

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दलील : पता नहीं चल पाया, सड़क को ऊंचा उठा सकते हैं
जीवनी मंडी में जहां पाइप सड़क से ऊपर है, उसके ठीक नीचे पानी की और सीवर की जर्जर पुरानी पाइप लाइन पड़ी है। स्मार्ट सिटी अधिकारियों की दलील है कि जीआईआर सर्वे में केवल लोहे के पाइप का ही पता चलता है, लेकिन सीवर की लाइन डीआई पाइप की है। ऐसे में उसकी जानकारी तब मिली, जब खोदाई हुई। 

अगर पाइप लाइन शिफ्ट की गई और शिफ्टिंग में टूट गई तो मुसीबत हो जाएगी। ऐसे ही पानी की जर्जर लाइन बदलने पर कम से कम एक सप्ताह तक जलापूर्ति बंद करनी होगी। इसकी जगह सड़क को ऊंचा करने का विकल्प है। अगर सड़क को दो फुट ऊंचा कर दिया जाए तो यह समस्या खत्म हो जाएगी।

समस्या : बगैर सर्वे के बिछा दी लाइन
जलनिगम के रिटायर्ड अभियंता आरके सिंह का कहना है कि इसमें पाइप लाइन बिछाने वाली कंपनी की भारी लापरवाही है। कोई भी लाइन बिछाने से पहले उसका सर्वे होता है कि कौन-कौन सी लाइनें भूमिगत हैं। अगर सीवर और पानी की लाइन के साथ नाला आ गया तो पाइप लाइन बिछानी नहीं चाहिए थी।

सुझाव : जहां नीचे पुरानी लाइन, वहां नहीं नहीं डालते

ट्रेंचलेस तकनीक से डालते हैं। जहां पहले से लाइन है, नई लाइन उसके साइड से निकाली जा सकती है।  पुरानी लाइन वाला हिस्सा छोड़ दिया जाना चाहिए था। फिलहाल जो स्थिति है, उसमें भारी ट्रकों और वाहनों से पाइप को नुकसान पहुंच सकता है।

स्मार्ट सिटी के सीईओ निखिल टी फुंडे ने बताया कि जीवनी मंडी पर पाइप लाइन बिछाने के काम में यह शिकयत मिली कि पानी की लाइन सड़क से ऊपर है, जबकि यह मौजूदा सड़क तल से नीचे होनी चाहिए। पाइप लाइन नीचे कैसे हो या सड़क ऊंची बनाई जाए। इन सभी विकल्पों के लिए कमेटी बनाई है, जो अपनी रिपोर्ट देगी। उसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
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