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आगरा नगर निगम: कागजों में बंद है स्लॉटर हाउस, फिर भी आ गया चार लाख का बिजली बिल; पार्षदों ने उठाए सवाल
Sat, 17 Feb 2024 10:01 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 17 Feb 2024 10:01 AM IST
सार
आगरा नगर निगम का कुबेरपुर स्लॉटर हाउस अगस्त से बंद है, लेकिन बिजली का मीटर चालू है। पार्षदों ने पूछा कि जब मशीनें नहीं चलीं तो चार लाख रुपये का बिल कैसे आ गया।
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आगरा नगर निगम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा के कुबेरपुर स्थित नगर निगम का स्लॉटर हाउस कागजों पर अगस्त 2023 से बंद पड़ा है। इसका बिजली का बिल 4 लाख रुपये से ज्यादा आया है। स्लॉटर हाउस में भारी मशीनों के चोरी छिपे चलने पर बिजली बिल आने की बात कही जा रही है। भाजपा के पार्षदों ने बिजली के बिल पेश किए, स्लॉटर हाउस से निकले मीट को ले जाने वाले वाहनों के गेट पास की रसीदें भी सार्वजनिक की हैं।
नगर निगम कार्यकारिणी के उप सभापति रवि माथुर का कहना है कि जब स्लॉटर हाउस बंद था तो विद्युत बिल कैसे आए। नगर निगम ने जिस कंपनी को ठेका दिया है, उसके पास प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी नहीं है। शहर में मीट की आपूर्ति ठप है। पार्षद राकेश जैन का आरोप है कि नगर निगम के अधिकारियों ने बंदी के दौरान स्लाॅटर हाउस का संचालन किया है और उस दौरान वसूली गई पशु कटान की राशि में खेल किया है। यह मुद्दा नगर निगम सदन में भी उठ चुका है। भाजपा के कई पार्षद इस मामले में विशेष सदन बुलाने की तैयारी कर रहे हैं। 17 पार्षदों के प्रस्ताव पर विशेष सदन बुलाया जा सकता है।
दिसंबर में 4.22 लाख का बिल कैसे
पार्षद रवि माथुर ने अगस्त 2023 से फरवरी 2024 तक के बिल पेश किए हैं। उनका कहना है कि हर महीने में दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के औसतन 1.50 लाख रुपये से 2.25 लाख रुपये तक के बिल हैं। दिसंबर माह में करीब 4.22 लाख रुपये का बिल है। उन्होंने बिलों की जांच कराने की मांग की है। पार्षद मुरारी लाल गोयल ने सवाल उठाया कि स्लॉटर हाउस के बंद होने पर केवल एलईडी लाइटों का बिल इतना कैसे आ सकता है, जरूर भारी भरकम मशीनें चली हैं। गेट पास से स्पष्ट है कि मीट की आपूर्ति स्लॉटर हाउस से हुई है। जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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नगर निगम कार्यकारिणी के उप सभापति रवि माथुर का कहना है कि जब स्लॉटर हाउस बंद था तो विद्युत बिल कैसे आए। नगर निगम ने जिस कंपनी को ठेका दिया है, उसके पास प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी नहीं है। शहर में मीट की आपूर्ति ठप है। पार्षद राकेश जैन का आरोप है कि नगर निगम के अधिकारियों ने बंदी के दौरान स्लाॅटर हाउस का संचालन किया है और उस दौरान वसूली गई पशु कटान की राशि में खेल किया है। यह मुद्दा नगर निगम सदन में भी उठ चुका है। भाजपा के कई पार्षद इस मामले में विशेष सदन बुलाने की तैयारी कर रहे हैं। 17 पार्षदों के प्रस्ताव पर विशेष सदन बुलाया जा सकता है।
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दिसंबर में 4.22 लाख का बिल कैसे
पार्षद रवि माथुर ने अगस्त 2023 से फरवरी 2024 तक के बिल पेश किए हैं। उनका कहना है कि हर महीने में दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के औसतन 1.50 लाख रुपये से 2.25 लाख रुपये तक के बिल हैं। दिसंबर माह में करीब 4.22 लाख रुपये का बिल है। उन्होंने बिलों की जांच कराने की मांग की है। पार्षद मुरारी लाल गोयल ने सवाल उठाया कि स्लॉटर हाउस के बंद होने पर केवल एलईडी लाइटों का बिल इतना कैसे आ सकता है, जरूर भारी भरकम मशीनें चली हैं। गेट पास से स्पष्ट है कि मीट की आपूर्ति स्लॉटर हाउस से हुई है। जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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