फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Six-year-old, four years is tied to poles

छह साल का बच्चा, चार साल से बंधा है खंभे से

Wed, 11 Feb 2015 02:04 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
ब्यूरो, अमर उजाला Updated Wed, 11 Feb 2015 02:04 AM IST
विज्ञापन
दो बेटे, दोनों मानसिक मंदित और बीमार। मां-बाप का कलेजा फटता है, फिर भी कहीं भाग न जाएं इसलिए एक को रस्सी से तो दूसरे को घर में बंद करके रखते हैं। थोड़े दिन नहीं चार साल से यही दशा है। रोज उनका और अपना पेट भरने के लिए रोटी जुटाने की जद्दोजहद ही इतनी भारी कि वह उनके इलाज का इंतजाम नहीं कर पा रहे। ऐसा भी नहीं ‘कैद’ में इस बचपन के बारे में किसी को खबर न हो, इस दृश्य को रोजाना सैकड़ों लोग देखते हैं लेकिन अब तक किसी का दिल उसकी मदद के लिए नहीं पसीजा।
विज्ञापन

खेड़ा राठौर क्षेत्र के लोहिया गांव गोहरा नदी से कुछ गज की दूरी पर चंबल के टीले पर बसा है। इसी गांव में शौकीराम और उनकी पत्नी गुड्डी देवी रहते हैं। उनका छह साल का बेटा विष्णु है। जन्म से ही वह मानसिक मंदित है। दो साल की उम्र में घर से बाहर निकलकर एक बार बीहड़ में गुम हो गया। बाद में फिर निकला तो टीले से सरक कर गिरा और चोटिल हुआ। इससे परेशान मां-बाप ने बचपन से ही उसे घर में खंभे से बांधकर रखना शुरू कर दिया। बीते चार साल से एक ही खंभे से बंधे विष्णु का खाना-सोना सब यहीं होता है। सिर पर छप्पर जरूर है। जब सो जाता है तो कुछ ओढ़ा दिया जाता है। सिर्फ शौच के लिए उसे खोला जाता है। हालांकि इसके बाद भी कपड़े गंदे कर लेता है। इसलिए प्राय: नंगा ही रहता है।
विज्ञापन

इस बारे में शौकीराम और गुड्डी ने कहा, ‘भला कौन मां-बाप चाहेगा कि अपने छोटे से बेटे को इस तरह बांधकर रखे। उसके साथ कोई अनहोनी न हो जाए इसलिए मजबूरी में ऐसा कदम उठाना पड़ा है।’ मजदूरी करने वाले ये विवश मां-बाप बताते हैं कि इलाज के लिए कम से कम भी जितने धन की जरूरत होगी, वह भी वे जुटा नहीं पाते। रोटी खिलाना ही बड़ी चुनौती है, इस कारण उनका इलाज भी नहीं करा पाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

बड़े बेटे को बंद रखते हैं घर में
शौकीराम का बड़ा बेटा अंकित (8) भी मानसिक रोगी है। उसे भी पहले बांधकर ही रखा जाता था। थोड़ा बड़ा हुआ तो वह बंधन खोलकर भाग जाता। वह भागने न पाए इसलिए मां-बाप उसे घर के भीतर बंद करके रखने को विवश हैं।

गांव में डाक्टरों की टीम और जांच के लिए राजस्व निरीक्षक को भेजा जा रहा है। प्रशासन बच्चे के इलाज में हर संभव मदद करेगा।
- उमाशंकर, एसडीएम बाह
(अमर उजाला द्वारा जानकारी दिए जाने के बाद)
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed