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उपचार न मिलने से मासूम ने मां की गोद में दम तोड़ा, परिवार में मचा कोहराम

Thu, 30 Apr 2020 09:33 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Thu, 30 Apr 2020 09:33 AM IST
सार

11 दिन में सातवीं मौत

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Eight Month Old Baby Dies Due To Lack Of Treatment
मृत बच्चे का फाइल फोटो और घर पहुंची पुलिस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छीपीटोला के तेलीपाड़ा निवासी व्यापारी बिलाल हमजा के आठ माह के बेटे हमजा गौरी की बुधवार सुबह एसएन मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि तुरंत उपचार देने के बजाय एसएन में उनसे पर्चा बनवाकर लाने के लिए कहा गया। इसमें 20 मिनट लगे, इसी बीच बच्चे ने अपनी मां अफसाना गौरी की गोद में दम तोड़ दिया। उपचार न मिलने से ताजनगरी में 11 दिनों में यह सातवीं मौत है।
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बिलाल की छीपोटोला बाजार में रस्सियों और बांस की दुकान है। दो साल पहले शादी हुई थी। अफसाना गौरी ने सुबह बेटे को दूध पिलाया। थोड़ी देर बाद ही बच्चे की नाक से खून आने लगा।
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बिलाल के भाई शान ने बताया कि जिला अस्पताल घर के पास में ही है, हम उसे वहां ले गए। स्टाफ ने सवालों की झड़ी लगा दी, इसमें समय बर्बाद हो रहा था, बच्चे की नाक से खून बंद नहीं हुआ था।
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इसलिए हम उसे पहले शाहगंज और फिर प्रतापपुरा में निजी अस्पताल में ले गए। दोनों बंद थे। इसके बाद उसे एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में ले गए। शान का आरोप है कि यहां सिक्योरिटी गार्ड ने उन्हें रोका। कहा कि पहले पर्चा बनवाओ, तब उपचार मिलेगा।

बिलाल पर्चा बनवाने के लिए गया। इसमें करीब 20 मिनट लग गए। इसके बाद डॉक्टर ने बच्चे को देखते ही कहा, आप लेट हो गए, बच्चे की जान जा चुकी है। शान का कहना है कि यदि पर्चा बनवाने के बजाय तुरंत बच्चे को उपचार दिया गया होता तो उसकी जान बच जाती।

पुलिस ने खुलवाई दुकान, तब मिला कफन
आगरा। हमजा को एसएन से घर ले गए। सुपुर्द ए खाक के लिए ले जाना था, लेकिन कफन नहीं मिल रहा था, क्योंकि दुकानें बंद थीं। रकाबगंज थाने के इंस्पेक्टर विकास तोमर को फोन किया। उन्होंने अपनी गाड़ी भेज दी। नाई की मंडी में दुकानदार को बुलाकर पुलिस ने दुकान खुलवाई और कफन दिलवाया।

एक घंटे में ही चिराग बुझ गया
अफसाना गौरी की आंखों से आंसू नहीं रुक रहे। वह कह रही हैं कि एक घंटे पहले तक  उनके साथ खेल रहा था। बच्चे की नाक से खून निकलना कोई बड़ी बीमारी नहीं है, यदि समय रहते उपचार मिलता तो उनके घर का चिराग न बुझता।
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