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Shukra Asta: शुक्र हो रहे अस्त... तीन माह नहीं बज सकेगी शहनाई; मांगलिक कार्यों को करने की क्यों है मनाही
Tue, 12 Dec 2023 09:21 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Tue, 12 Dec 2023 09:21 AM IST
सार
शुक्र अस्त होने के साथ ही 16 दिसंबर से 14 जनवरी तक और मई व जून में विवाह नहीं हो सकेंगे। जुलाई में मांगलिक कार्य शुरू होंगे।
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शादी
- फोटो : istock
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विस्तार
शुक्र 15 दिसंबर को अस्त हो जाएंगे। इससे 16 से 14 जनवरी तक खरमास लग जाएगा और वैवाहिक कार्य नहीं हो सकेंगे। नये साल 2024 में 15 जनवरी से विवाह के शुभ मुहूर्त हैं। इसके बाद मई और जून माह में भी शुक्र के अस्त होने से दो माह विवाह नहीं होंगे। जुलाई में मांगलिक कार्य शुरू होंगे। ऐसी स्थिति वर्ष 2000 में भी बनी थी, तब भी मई और जून में विवाह मुहूर्त नहीं थे। यह कहना है पुरोहित पंडित मुन्ना मिश्रा का।
उन्होंने बताया कि खरमास में विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं होंगे। जनवरी माह में नौ शुभ मुहूर्त विवाह के लिए हैं। नये साल 2024 में सबसे ज्यादा सहालग वाला महीना फरवरी और नवंबर है। दोनों महीनों में कुल 11-11 दिन शुभ मुहूर्त हैं। जुलाई और दिसंबर में भी विवाह के 6-6 शुभ मुहूर्त हैं। मार्च महीने में 10 दिन सहालग के रहेंगे। सबसे कम दिन अप्रैल महीने में विवाह के लिए हैं। इस महीने केवल पांच दिन ही शहनाइयां बज पाएंगीं।
बिना मुहूर्त भी कर सकते हैं विवाह
साल में कुछ ऐसे मुहूर्त भी होते हैं जिनमें विवाह के लिए शुभ मुहूर्त देखना जरूरी नहीं होता। इन्हें अबूझ मुहूर्त कहते हैं। अक्षय तृतीय (वैशाख शुक्ल तृतीया), देवोत्थान एकादशी (कार्तिक शुक्ल एकादशी), बसंत पंचमी (माघ शुक्ल पंचमी) और भडल्या नवमी (अषाढ़ शुक्ल नवमी) ऐसे ही मुहूर्त हैं। जिन लोगों की भी विवाह की शुभ तिथि में किसी प्रकार की समस्या हो या तारीख आदि तय न हो पा रही है वह इन तिथियों में से किसी भी एक तिथि पर विवाह कर सकते हैं।
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उन्होंने बताया कि खरमास में विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं होंगे। जनवरी माह में नौ शुभ मुहूर्त विवाह के लिए हैं। नये साल 2024 में सबसे ज्यादा सहालग वाला महीना फरवरी और नवंबर है। दोनों महीनों में कुल 11-11 दिन शुभ मुहूर्त हैं। जुलाई और दिसंबर में भी विवाह के 6-6 शुभ मुहूर्त हैं। मार्च महीने में 10 दिन सहालग के रहेंगे। सबसे कम दिन अप्रैल महीने में विवाह के लिए हैं। इस महीने केवल पांच दिन ही शहनाइयां बज पाएंगीं।
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बिना मुहूर्त भी कर सकते हैं विवाह
साल में कुछ ऐसे मुहूर्त भी होते हैं जिनमें विवाह के लिए शुभ मुहूर्त देखना जरूरी नहीं होता। इन्हें अबूझ मुहूर्त कहते हैं। अक्षय तृतीय (वैशाख शुक्ल तृतीया), देवोत्थान एकादशी (कार्तिक शुक्ल एकादशी), बसंत पंचमी (माघ शुक्ल पंचमी) और भडल्या नवमी (अषाढ़ शुक्ल नवमी) ऐसे ही मुहूर्त हैं। जिन लोगों की भी विवाह की शुभ तिथि में किसी प्रकार की समस्या हो या तारीख आदि तय न हो पा रही है वह इन तिथियों में से किसी भी एक तिथि पर विवाह कर सकते हैं।
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