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ब्रिटिश हुकूमत से बगावत करने वालों मेें बाह के भी थे चार रणबांकुरे
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
Updated Sun, 24 Jan 2016 01:11 AM IST
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जापान में कैद किए गए सैनिकों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस का भाषण सुनकर ब्रिटिश हुकूमत से बगावत कर दी थी। आजाद हिंद फौज में शामिल होकर क्रांति का झंडा बुलंद करने वालों में तीन जांबाज बाह के भी थे। कलियानपुर भरतार के अगर सिंह, रीछापुरा के विश्वनाथ सिंह, उमरैठा के बाबू सिंह ने जंग ए आजादी में गोरो की पल्टन के खिलाफ मोर्चा संभाला था। तीनों ही अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनकी यादें आज भी यहां के लोगों के जेहन में जिंदा है।
1936 में राजपूत रेजीमेंट के सिपाही के रूप में बाह के कलियानपुर भरतार गांव के अगर सिंह, रीछापुरा गांव के विश्वनाथ सिंह, उमरैठा के बाबू सिंह, कोरथ के शिवधार सिंह को हांगकांग के मोर्चे पर भेजा गया था। शिवधार सिंह ने बताया कि 1939 में जापान में भारतीय सैनिकों को कैद कर लिया गया था। सेना की कैद की खबर पर जर्मनी से वाया टोकियो नेताजी सुभाष चंद्र बोस जापान पहुंचे थे। वहां उनका भाषण सुनकर सेना के तमाम जवान ब्रिटिश हुकूमत से बगावत कर आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए थे। जंग ए आजादी के मोर्चे पर तैनात रहे बाबू सिंह और अगर सिंह का दो साल पहले निधन हो गया। जबकि विश्वनाथ सिंह का पिछले साल निधन हुआ। नेताजी के करीबी रहे कोरथ गांव के शिवधार सिंह ने बताया कि ब्रिटिश हुकूमत ने नेताजी की घेराबंदी की लेकिन सेना के जवान इस कदर उनसे प्रभावित थे कि वे हवाई फायर करते थे। उन्होंने कभी क्रांतिकारियों पर गोली नहीं चलाई। नेताजी से जुड़ी यादों का जिक्र करते ही 93 साल की उम्र में भी शिवधार सिंह रोमांचित हो उठते हैं। उन्हें इसका अफसोस है कि वे बी अपने साथियों की तरह क्रांति की मुख्य धारा से नहीं जुड़ सके।
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देशभक्ति के जज्बे से सराबोर है शिवधार का परिवार
बाह। 1939 से 1945 तक जंग लडे़ शिवधार सिंह का परिवार देशभक्ति के जज्बे से सराबोर है। इनके भाई मेवाराम 1962 में चीन युद्ध में शहीद हुए थे। जबकि पिता शिवदयाल 1939 से 1945 तक के युद्ध में शामिल हुए थे। दादा नौरंग सिंह ने सोमालिया, ईराक की जंग में अपने जौहर दिखाए थे। असाधारण युद्ध कौशल के लिए शिवधार सिंह को सरकार ने सम्मानित किया था।
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नेताजी के अंगरक्षक रहे थे विश्वनाथ
बाह। रीछापुरा गांव के आजाद हिंद फौज के सिपाही और सुभाष चंद्र बोस के अंगरक्षक रहे कैप्टन विश्वनाथ सिंह के परिवार में क्रांति की यादें आज भी जिंदा हैं। तीन पुत्रों में सेना से रिटायर हुए हरेंद्र सिंह, उपेंद्र सिंह, भूपेंद्र सिंह और पत्नी कोकिला देवी उन दिनों की यादें कर सिहर उठती हैं। उनका कहना है कि विश्वनाथ सिंह नेताजी के बहुत करीबी थे। इसलिए उन्हें अपना अंगरक्षक बनाया था।
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1936 में राजपूत रेजीमेंट के सिपाही के रूप में बाह के कलियानपुर भरतार गांव के अगर सिंह, रीछापुरा गांव के विश्वनाथ सिंह, उमरैठा के बाबू सिंह, कोरथ के शिवधार सिंह को हांगकांग के मोर्चे पर भेजा गया था। शिवधार सिंह ने बताया कि 1939 में जापान में भारतीय सैनिकों को कैद कर लिया गया था। सेना की कैद की खबर पर जर्मनी से वाया टोकियो नेताजी सुभाष चंद्र बोस जापान पहुंचे थे। वहां उनका भाषण सुनकर सेना के तमाम जवान ब्रिटिश हुकूमत से बगावत कर आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए थे। जंग ए आजादी के मोर्चे पर तैनात रहे बाबू सिंह और अगर सिंह का दो साल पहले निधन हो गया। जबकि विश्वनाथ सिंह का पिछले साल निधन हुआ। नेताजी के करीबी रहे कोरथ गांव के शिवधार सिंह ने बताया कि ब्रिटिश हुकूमत ने नेताजी की घेराबंदी की लेकिन सेना के जवान इस कदर उनसे प्रभावित थे कि वे हवाई फायर करते थे। उन्होंने कभी क्रांतिकारियों पर गोली नहीं चलाई। नेताजी से जुड़ी यादों का जिक्र करते ही 93 साल की उम्र में भी शिवधार सिंह रोमांचित हो उठते हैं। उन्हें इसका अफसोस है कि वे बी अपने साथियों की तरह क्रांति की मुख्य धारा से नहीं जुड़ सके।
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देशभक्ति के जज्बे से सराबोर है शिवधार का परिवार
बाह। 1939 से 1945 तक जंग लडे़ शिवधार सिंह का परिवार देशभक्ति के जज्बे से सराबोर है। इनके भाई मेवाराम 1962 में चीन युद्ध में शहीद हुए थे। जबकि पिता शिवदयाल 1939 से 1945 तक के युद्ध में शामिल हुए थे। दादा नौरंग सिंह ने सोमालिया, ईराक की जंग में अपने जौहर दिखाए थे। असाधारण युद्ध कौशल के लिए शिवधार सिंह को सरकार ने सम्मानित किया था।
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नेताजी के अंगरक्षक रहे थे विश्वनाथ
बाह। रीछापुरा गांव के आजाद हिंद फौज के सिपाही और सुभाष चंद्र बोस के अंगरक्षक रहे कैप्टन विश्वनाथ सिंह के परिवार में क्रांति की यादें आज भी जिंदा हैं। तीन पुत्रों में सेना से रिटायर हुए हरेंद्र सिंह, उपेंद्र सिंह, भूपेंद्र सिंह और पत्नी कोकिला देवी उन दिनों की यादें कर सिहर उठती हैं। उनका कहना है कि विश्वनाथ सिंह नेताजी के बहुत करीबी थे। इसलिए उन्हें अपना अंगरक्षक बनाया था।