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श्री पारस अस्पताल प्रकरण: सोशल मीडिया पर प्रशासन के खिलाफ पोस्ट, मेरा कातिल ही मेरा मुंसिफ है...
Sun, 20 Jun 2021 09:38 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sun, 20 Jun 2021 09:38 AM IST
सार
जांच से एक ओर परिजनों का विश्वास डगमगा गया है तो दूसरी तरफ भाजपा सरकार की छवि भी धूमिल हो रही है। इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की कड़ी आलोचना हो रही है।
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श्री पारस अस्पताल आगरा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
22 मरीजों की मौत के आरोपों में घिरे श्री पारस अस्पताल को क्लीन चिट मिलने पर शनिवार को फिर देशभर में बहस शुरू हो गई है। सूबे की राजनीति भी गर्म हो गई है। ट्विटर, फेसबुक से लेकर सोशल मीडिया पर दिनभर यह मामला छाया रहा। हर कोई प्रशासन की मंशा पर सवाल उठा रहा है। जांच को लेकर मृतकों के परिजनों ने आक्रोश व्यक्त किया। किसी ने उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई तो किसी ने कहा कि यह धनबल की जीत है।
सोशल मीडिया पर प्रशासन के खिलाफ पोस्ट वायरल होती रहीं। एक पोस्ट में लिखा था कि मेरा कातिल ही मुंसिफ है... क्या मेरे हक में फैसला देगा। दिनभर हुई आलोचना के बाद जिलाधिकारी ने रात आठ बजे चुप्पी तोड़ी। कहा कि आगे की जांच पुलिस कर रही। अगर किसी को शिकायत है तो थाना पुलिस को दर्ज कराएं।
एसएन चिकित्सकों के डेथ ऑडिट में 16 मौतों की पुष्टि हो चुकी है। जिला प्रशासन इन मौतों की वजह ऑक्सीजन की कमी नहीं बल्कि अन्य बीमारियां व मरीजों की गंभीर अवस्था स्थिति को माना है। इधर, मृतकों के परिजन और उन दिनों के हालात चीख-चीख कर ऑक्सीजन संकट की गवाही दे रहे हैं। जांच से एक ओर परिजनों का विश्वास डगमगा गया है तो दूसरी तरफ भाजपा सरकार की छवि भी धूमिल हो रही है। इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की कड़ी आलोचना हो रही है।
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सोशल मीडिया पर प्रशासन के खिलाफ पोस्ट वायरल होती रहीं। एक पोस्ट में लिखा था कि मेरा कातिल ही मुंसिफ है... क्या मेरे हक में फैसला देगा। दिनभर हुई आलोचना के बाद जिलाधिकारी ने रात आठ बजे चुप्पी तोड़ी। कहा कि आगे की जांच पुलिस कर रही। अगर किसी को शिकायत है तो थाना पुलिस को दर्ज कराएं।
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एसएन चिकित्सकों के डेथ ऑडिट में 16 मौतों की पुष्टि हो चुकी है। जिला प्रशासन इन मौतों की वजह ऑक्सीजन की कमी नहीं बल्कि अन्य बीमारियां व मरीजों की गंभीर अवस्था स्थिति को माना है। इधर, मृतकों के परिजन और उन दिनों के हालात चीख-चीख कर ऑक्सीजन संकट की गवाही दे रहे हैं। जांच से एक ओर परिजनों का विश्वास डगमगा गया है तो दूसरी तरफ भाजपा सरकार की छवि भी धूमिल हो रही है। इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की कड़ी आलोचना हो रही है।
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सामाजिक कार्यकर्ता नरेश पारस
- फोटो : अमर उजाला
फूट-फूट कर रोई थी महिला चिकित्सक
श्री पारस अस्पताल कांड के बाद ऑक्सीजन संकट के उस दौर में प्रतापपुरा स्थित आगरा कॉर्डियक सेंटर की महिला चिकित्सक डॉ. तूलिका अग्रवाल का डीएम को भेजा वीडियो वायरल हुआ था। जिसमें वह फूट-फूट कर रोते हुए अपने मरीजों के लिए ऑक्सीजन दिलाने की गुहार लगा रही थीं। वीडियो से यह तस्दीक होती है कि उन दिनों ऑक्सीजन का संकट था। महिला चिकित्सक ने आईएमए व प्रशासन के संयुक्त व्हाट्सएप ग्रुप में अपनी वीडियो भेजी। जिसके तीन घंटे बाद डीएम ने दस सिलिंडर मुहैया कराए थे।
हार नहीं मानी है जंग अभी जारी
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराने वाले सामाजिक कार्यकर्ता नरेश पारस का कहना है कि मामले में मौत के सौदागर जीत गए। मॉकड्रिल के नाम पर 22 लोगों की हत्या करने वाले श्री पारस अस्पताल को क्लीन चिट...असहाय मरीजों का कत्लेआम करने वालों को बचाने का काम है। उन्होंने कहा कि जंग अभी जारी है... हार नहीं मानी है। नरेश पारस ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की बात भी कही है। वहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य राजेश तोमर ने कहा कि फिर जांच के नाम पर प्रशासन ने नौटंकी क्यों की।
ये तो होना ही था ‘चोर-चोर मौसेरे भाई’
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन आईएमए के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. हरेन्द्र गुप्ता ने जांच पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यह तो होना ही था। चोर-चोर मौसेर भाई। न तू कह मेरी और न मैं कहूं तेरी। प्रशासन तो फायर प्रूफ है। अर्जुन गुर्जर ने कहा कि अगर अस्पताल दोषी मिलता तो प्रशासन ही फंस जाता। पूर्व प्रोफेसर ई. एसपी वर्मा ने कहा कि मृतकों के परिजनों को कोर्ट जाना चाहिए। बीजेपी राज में अंधेर नगरी-चौपट राजा वाली कहावत चरितार्थ होती दिख रही है।
श्री पारस अस्पताल कांड के बाद ऑक्सीजन संकट के उस दौर में प्रतापपुरा स्थित आगरा कॉर्डियक सेंटर की महिला चिकित्सक डॉ. तूलिका अग्रवाल का डीएम को भेजा वीडियो वायरल हुआ था। जिसमें वह फूट-फूट कर रोते हुए अपने मरीजों के लिए ऑक्सीजन दिलाने की गुहार लगा रही थीं। वीडियो से यह तस्दीक होती है कि उन दिनों ऑक्सीजन का संकट था। महिला चिकित्सक ने आईएमए व प्रशासन के संयुक्त व्हाट्सएप ग्रुप में अपनी वीडियो भेजी। जिसके तीन घंटे बाद डीएम ने दस सिलिंडर मुहैया कराए थे।
हार नहीं मानी है जंग अभी जारी
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराने वाले सामाजिक कार्यकर्ता नरेश पारस का कहना है कि मामले में मौत के सौदागर जीत गए। मॉकड्रिल के नाम पर 22 लोगों की हत्या करने वाले श्री पारस अस्पताल को क्लीन चिट...असहाय मरीजों का कत्लेआम करने वालों को बचाने का काम है। उन्होंने कहा कि जंग अभी जारी है... हार नहीं मानी है। नरेश पारस ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की बात भी कही है। वहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य राजेश तोमर ने कहा कि फिर जांच के नाम पर प्रशासन ने नौटंकी क्यों की।
ये तो होना ही था ‘चोर-चोर मौसेरे भाई’
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन आईएमए के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. हरेन्द्र गुप्ता ने जांच पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यह तो होना ही था। चोर-चोर मौसेर भाई। न तू कह मेरी और न मैं कहूं तेरी। प्रशासन तो फायर प्रूफ है। अर्जुन गुर्जर ने कहा कि अगर अस्पताल दोषी मिलता तो प्रशासन ही फंस जाता। पूर्व प्रोफेसर ई. एसपी वर्मा ने कहा कि मृतकों के परिजनों को कोर्ट जाना चाहिए। बीजेपी राज में अंधेर नगरी-चौपट राजा वाली कहावत चरितार्थ होती दिख रही है।
जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह
- फोटो : अमर उजाला
ऑक्सीजन कमी से 22 मौतों के आरोप निराधार
अस्पताल को सील किया है। लाइसेंस निलंबन के लिए सीएमओ को पत्र भेजा है। महामारी और आईपीसी धाराओं में पुलिस चार्जशीट दायर करेगी। जिन दस लोगों ने शिकायत दर्ज कराई थी उनकी शिकायतें और मृतकों की डेथ ऑडिट रिपोर्ट थाना न्यू आगरा पुलिस को भेजी गई है।
अगर किसी को कोई शिकायत है तो वह थाना प्रभारी को दर्ज कराएं। उनके द्वारा मामले को देखा जाएगा। मॉकड्रिल व ऑक्सीजन की कमी से 22 लोगों की मौत के बात निराधार है। अस्पताल को ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति की गई। उस समय स्थिति गंभीर थी लेकिन उसे मैनेज कर लिया था। मामले की आगे जांच पुलिस करेगी। -प्रभु नारायण सिंह, जिलाधिकारी
श्री पारस अस्पताल प्रकरण: जांच के नाम पर धोखा, प्रशासन पर नहीं भरोसा, क्लीन चिट के बाद मृतकों के परिजनों में आक्रोश
अस्पताल को सील किया है। लाइसेंस निलंबन के लिए सीएमओ को पत्र भेजा है। महामारी और आईपीसी धाराओं में पुलिस चार्जशीट दायर करेगी। जिन दस लोगों ने शिकायत दर्ज कराई थी उनकी शिकायतें और मृतकों की डेथ ऑडिट रिपोर्ट थाना न्यू आगरा पुलिस को भेजी गई है।
अगर किसी को कोई शिकायत है तो वह थाना प्रभारी को दर्ज कराएं। उनके द्वारा मामले को देखा जाएगा। मॉकड्रिल व ऑक्सीजन की कमी से 22 लोगों की मौत के बात निराधार है। अस्पताल को ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति की गई। उस समय स्थिति गंभीर थी लेकिन उसे मैनेज कर लिया था। मामले की आगे जांच पुलिस करेगी। -प्रभु नारायण सिंह, जिलाधिकारी
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