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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Shri Krishna Janmabhoomi timing changed from 1 May 2022 mathura temple  

मथुरा: श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर 1 मई से बदल रहा दर्शन का समय, जानें नया टाइम टेबल 

Sat, 30 Apr 2022 06:31 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sat, 30 Apr 2022 06:31 PM IST
सार

भगवान श्रीकृष्ण की नगरी में प्रभु के दर्शन के लिए ग्रीष्मकाल में नई समय सारणी जारी की गई है। यदि ऐसे में आप श्रीकृष्ण जन्मभूमि दर्शन करने की योजना बना रहे हैं तो दर्शन का नया  समय जरूर नोट कर  लें।
 

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Shri Krishna Janmabhoomi timing changed from 1 May 2022 mathura temple  
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मथुरा में गर्मी का कहर जारी है। ऐसे में कई मंदिरों के समय में दर्शन के लिए समय में बदलाव किया गया है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के अनुसार ग्रीष्मकाल में श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर स्थित सभी मंदिरों के दर्शन का समय बदला गया है।

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दर्शन का नया समय 

श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार श्रीकृष्ण जन्मभूमि के सभी मंदिरों के ग्रीष्मकालीन समय में वैशाख शुक्ल प्रतिपदा यानि 01 मई की सुबह से दर्शन के समय में परिवर्तन किया गया है। इसके तहत श्रीभागवत भवन एवं अन्य मंदिरों में प्रात: 6:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक तथा सायं 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक दर्शन होंगे। इसके अलावा श्रीगर्भ गृह मंदिर में दर्शन का समय प्रात: 6:30 बजे से रात 9:00 बजे तक रहेगा।

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अक्षय तृतीया पर होंगे श्रीबांकेबिहारी के चरण दर्शन

वृंदावन में अक्षय तृतीया का उत्सव ग्रीष्म काल का सबसे सर्वोत्तम उत्सव है। वैशाख शुक्ल पक्ष की तीज को अक्षय तृतीया या अखा तीज के नाम से जाना जाता है। इस दिन श्रीधाम वृंदावन के मंदिरों में चंदन यात्रा महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस उत्सव के अंतर्गत भगवान को चंदन अर्पित किया जाता है। श्रीबांकेबिहारी के मंदिर में ठाकुरजी के चरण दर्शन वर्ष भर में केवल एक बार अक्षय तृतीया के दिन होते हैं। 

ब्रज संस्कृति शोध संस्थान के प्रकाशन अधिकारी गोपाल शरण शर्मा ने बताया कि ब्रज में चंदन महोत्सव के नाम से विख्यात इस उत्सव के दिन वृंदावन के मंदिरों में ठाकुरजी का शृंगार बड़ा ही अद्भुत होता है। ठाकुरजी का मुकुट, चंद्रिका, कान के कुंडल, झुमका, गले का हार, बाजूबंद, कंगन आदि सब चंदन से ही निर्मित होते हैं। इतना ही नहीं इस दिन ठाकुरजी को चंदन से बनी पोशाक धारण कराई जाती है। चंदन की लकड़ी से बने सिंहासन पर ठाकुरजी को विराजमान कराया जाता है। सर्वांगे हरि चंदनं सु ललितं की भावना के अनुसार सेवायत ठाकुरजी के प्रत्येक अंग में चंदन का लेपन करते हैं। 

चंदन लेपन के उपरांत ठाकुरजी के भाल (मस्तक) पर मृगमद (कस्तूरी) का तिलक लगाया जाता है। ठाकुरजी के वर्षभर में केवल एक बार अक्षय तृतीया पर चरणों के दर्शन भक्तों को कराए जाते हैं। त्रिभंगी मुद्रा में भक्तों को दर्शन देते ठाकुरजी के चरणों में चंदन का लड्डू (गोला) धराया जाता है। बांकेबिहारी मंदिर के साथ ही श्रीराधा श्यामसुंदर मंदिर, श्रीराधा दामोदर मंदिर, श्रीराधारमण मंदिर में यह चंदन महोत्सव मनाया जाता है। संतों एवं रसिक भक्तों द्वारा ठाकुरजी के समक्ष बैठकर अक्षय तीज पर नीकौ, चंदन बागो तन पर सोहे भाल अरगजा टीकौ को, पदों का गान किया जाता है।

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