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शिक्षामित्रों का धैर्य देने लगा जवाब, अपने खून से लिखा मुख्यमंत्री योगी को पत्र
Mon, 05 Aug 2019 12:20 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 05 Aug 2019 12:20 AM IST
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अपने खून से पत्र लिखते शिक्षामित्र
- फोटो : अमर उजाला
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समायोजन समाप्त होने के बाद दो साल से परेशान चल रहे शिक्षामित्रों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। मैनपुरी में रविवार को शिक्षामित्रों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खून से लिखे पत्र भेजे हैं। इनमें मांग की गई है कि शिक्षामित्र की समस्या का स्थाई समाधान किया जाए।
शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के आह्वान पर जिले के शिक्षामित्र जनियुगनगर स्थित जिला कार्यालय पर एकत्रित हुए। यहां जिल संगठन मंत्री अनुराग मिश्रा की अगुवाई में सबसे पहले शिक्षामित्र एक पौथोलॉजी पर पहुंचे।
शिक्षामित्रों ने अपना खून निकलवाया और इसके बाद कार्यालय पर पहुंचकर खून से मुख्यमंत्री के नाम पत्र लिखे। खून से लिखे गए पत्रों में कहा गया है कि प्रदेश में लगभग डेढ़ लाख शिक्षामित्र समायोजन निरस्त होने के बाद परेशानी में आ गया। वे लोग पिछले 18 वर्ष से परिषदीय विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि लंबे समय से उनके द्वारा की गई सेवाओं को देखते हुए उनकी समस्या का समाधान किया जाए। खून से पत्र लिखने वालों में जिला संगठन मंत्री अनुराग मिश्रा, जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजा ठाकुर, नीरज यादव, आदित्य कुमार, देवेश यादव आदि शिक्षामित्र शामिल थे।
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शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के आह्वान पर जिले के शिक्षामित्र जनियुगनगर स्थित जिला कार्यालय पर एकत्रित हुए। यहां जिल संगठन मंत्री अनुराग मिश्रा की अगुवाई में सबसे पहले शिक्षामित्र एक पौथोलॉजी पर पहुंचे।
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शिक्षामित्रों ने अपना खून निकलवाया और इसके बाद कार्यालय पर पहुंचकर खून से मुख्यमंत्री के नाम पत्र लिखे। खून से लिखे गए पत्रों में कहा गया है कि प्रदेश में लगभग डेढ़ लाख शिक्षामित्र समायोजन निरस्त होने के बाद परेशानी में आ गया। वे लोग पिछले 18 वर्ष से परिषदीय विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि लंबे समय से उनके द्वारा की गई सेवाओं को देखते हुए उनकी समस्या का समाधान किया जाए। खून से पत्र लिखने वालों में जिला संगठन मंत्री अनुराग मिश्रा, जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजा ठाकुर, नीरज यादव, आदित्य कुमार, देवेश यादव आदि शिक्षामित्र शामिल थे।