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अनाथालय सील होने के बाद अब उठने लगीं 'आवाजें', युवतियां बोलीं छोटे भाई बहनों को मत करो दूर
Fri, 11 Oct 2019 01:23 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 11 Oct 2019 01:23 PM IST
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अनाथालय के बाहर तैनात पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
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जिस अनाथ आश्रम के आंगन में बचपन गुजरा, युवा होने पर जहां से डोली उठी, उस पर ताला लगने से ये युवतियां आहत हैं। वह चीख-चीख कह रही हैं कि यहां रहने वाले छोटे भाई-बहनों को उनसे दूर मत करो। यही उनका परिवार है। अनाथ आश्रम ही उनका मायका है। उनका दो टूक कहना है कि भले ही अनाथालय की समिति बदल दो लेकिन बच्चों को वहीं रहने दो।
पिछले दिनों अनियमितताओं के बाद यमुनापार स्थित अनाथालय को सील कर दिया था। यहां रहने वाले बच्चे, युवक, किशोरियों, युवक-युवतियों को फीरोजाबाद, कानपुर तथा दूसरे अन्य स्थानों पर शिफ्ट कर दिया गया है। इसको लेकर यहां बचपन गुजार चुकीं युवतियां आक्रोश में हैं।
उनका कहना है कि यदि आश्रम में कुछ गलत हुआ तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए, बच्चों को वहां से क्यों हटाया गया। अपनी इसी मांग को लेकर कई युवतियां अपने बच्चों के साथ गुरुवार को कलक्ट्रेट पहुंची। मगर, राज्यपाल के कार्यक्रम में अधिकारियों के व्यस्त होने के कारण युवतियों की उनसे मुलाकात नहीं हो सकी। घंटों इंतजार के बाद उन्हें खाली हाथ कलक्ट्रेट से लौटना पड़ा।
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पिछले दिनों अनियमितताओं के बाद यमुनापार स्थित अनाथालय को सील कर दिया था। यहां रहने वाले बच्चे, युवक, किशोरियों, युवक-युवतियों को फीरोजाबाद, कानपुर तथा दूसरे अन्य स्थानों पर शिफ्ट कर दिया गया है। इसको लेकर यहां बचपन गुजार चुकीं युवतियां आक्रोश में हैं।
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उनका कहना है कि यदि आश्रम में कुछ गलत हुआ तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए, बच्चों को वहां से क्यों हटाया गया। अपनी इसी मांग को लेकर कई युवतियां अपने बच्चों के साथ गुरुवार को कलक्ट्रेट पहुंची। मगर, राज्यपाल के कार्यक्रम में अधिकारियों के व्यस्त होने के कारण युवतियों की उनसे मुलाकात नहीं हो सकी। घंटों इंतजार के बाद उन्हें खाली हाथ कलक्ट्रेट से लौटना पड़ा।
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अनाथालय में बचपन गुजारी चुकी लता की बड़े होने पर दस साल पहले बल्केश्वर क्षेत्र में शादी हो गई। उनका कहना है कि शादी के बाद भी अनाथ आश्रम से उनका रिश्ता नहीं टूटा। यहां रहने वाले ही उनके भाई और बहन हैं।
अन्य विवाहिताएं जैसे अपने मायके जाती हैं, उसी तरह से वह भी समय-समय इस अनाथ आश्रम में आती हैं। यही उनका मायका है। लता का कहना है कि आश्रम का माहौल बहुत अच्छा था। मगर, यहां इतनी गड़बड़ियां मिली हैं, यह सुनकर वह हैरान हैं।
इसी अनाथ आश्रम में बचपन गुजारी एक अन्य युवती ऋचा की शादी कुछ ही साल पहले मंडी समिति क्षेत्र में हुई है। वह भी आश्रम की गड़बड़ियों को लेकर आश्चर्यचकित हैं। उसका कहना है कि मगर, इसकी सजा बच्चों को नहीं मिलनी चाहिए। बड़े बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से भले ही कहीं और भेज दो लेकिन छोटे बच्चों को वहीं रहने दो।
अन्य विवाहिताएं जैसे अपने मायके जाती हैं, उसी तरह से वह भी समय-समय इस अनाथ आश्रम में आती हैं। यही उनका मायका है। लता का कहना है कि आश्रम का माहौल बहुत अच्छा था। मगर, यहां इतनी गड़बड़ियां मिली हैं, यह सुनकर वह हैरान हैं।
इसी अनाथ आश्रम में बचपन गुजारी एक अन्य युवती ऋचा की शादी कुछ ही साल पहले मंडी समिति क्षेत्र में हुई है। वह भी आश्रम की गड़बड़ियों को लेकर आश्चर्यचकित हैं। उसका कहना है कि मगर, इसकी सजा बच्चों को नहीं मिलनी चाहिए। बड़े बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से भले ही कहीं और भेज दो लेकिन छोटे बच्चों को वहीं रहने दो।