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ब्रह्मलीन हुए महामंडलेश्वर शारदानंद सरस्वती

Tue, 08 Nov 2022 12:11 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 08 Nov 2022 12:11 AM IST
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shardanand maharaj no more
07एमएनपी-12-अंतिम यात्रा में एक वाहन पर रखा स्वामी शारदानंद सरस्वती का पार्थिव शरीर - फोटो : MAINPURI
मैनपुरी। दैवीय सम्पद मंडल के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर शारदानंद सरस्वती ब्रह्मलीन हो गए। रविवार की रात उन्होंने गुरुग्राम के मेदांता हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। वह लंबे से अस्वस्थ चल रहे थे। 80 वर्ष की उम्र में उनका निधन हुआ। रात में ही उनका पार्थिव शरीर श्रीएकरसानंद आश्रम लाया गया। सोमवार को हजारों श्रद्धालुओं ने आश्रम पहुंचकर उनके अंतिम दर्शन किए। दोपहर बाद उनकी अंतिम यात्रा शहर में निकाली गई। शाम चार बजे श्रीएकरसानन्द आश्रम परिसर में उनको समाधिस्थ किया गया।
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महामंडलेश्वर शारदानंद सरस्वती ने दैवीय सम्पद मंडल का विस्तार पूरे भारत में किया। हर प्रदेश में आश्रमों की स्थापना की। भक्ति से ओतप्रोत शारदानंद सरस्वती ने दैवीय सम्पद मंडल को सूर्य के प्रकाश की भांति पूरे भारतवर्ष में फैलाना शुरू कर दिया। उन्होंने गुरु आशीर्वाद से कई आश्रम बनवाए। वर्ष 1988 में स्वामी भजनानंद सरस्वती के ब्रह्मलीन होने पर शारदानंद सरस्वती को महामंडलेश्वर की पदवी से विभूषित कर दिया गया था। महामंडलेश्वर बनने के बाद दैवीय सम्पद मंडल का विस्तार पूरे भारत में किया। हर प्रदेश में आश्रमों की स्थापना की। महामंडलेश्वर हरिहरानंद महाराज ने बताया कि महामंडलेश्वर शारदानंद सरस्वती महाराज कई दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। उनका उपचार गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में चल रहा था। रविवार रात करीब 10 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। महामंडलेश्वर स्वामी हरिहरानंद सरस्वती ने समाधि का संकल्प लिया। आचार्य इंद्रपाल त्रिपाठी के नेतृत्व में दिल्ली से आए वैदिक विद्वानों ने संकल्प पाठ कराया।
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शारदानंद सरस्वती के अंतिम दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में लोग सुबह से ही श्रीएकरसानंद आश्रम पहुंचने लगे। पूर्व मंत्री रामनरेश अग्निहोत्री, स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ऋषिकेश, स्वामी नरेंद्रनंद सरस्वती जयपुर, स्वामी हरिद्रानंद सरस्वती जयपुर, स्वामी असंगानंद सरस्वती हरिद्वार, डीएम अविनाश कृष्ण सिंह, एसपी कमलेश दीक्षित, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रदीप चौहान, पूर्व विधायक अशोक चौहान, संजीव मिश्रा वैद्य, अखिल भारतीय वैश्य एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर सुमंत कुमार गुप्ता, अरविंद तोमर ने आश्रम पहुंचकर शारदानंद सरस्वती को अंतिम विदाई दी।
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प्रमुख मार्गों से निकली अंतिम यात्रा
महामंडलेश्वर शारदानंद सरस्वती की अंतिम यात्रा दोपहर बाद एकरसानंद आश्रम से शुरू हुई। एकरसानंद आश्रम से शुरू हुई अंतिम यात्रा पंजाबी कॉलोनी, स्टेशन रोड, भांवत चौराहा, करहल बाईपास चौराहा, करहल रोड, सदर बाजार, क्रिश्चियन तिराहा होती हुई एकरसानंद आश्रम पहुंची। जहां महामंडलेश्वर शारदानंद सरस्वती को समाधिस्थ किया गया। अंतिम यात्रा में सुमित चौहान, पुरुषोत्तम गुप्ता, पीयूष चंदेल, अजयपाल सिंह, अमित गुप्ता, सुभाष मिश्रा, कमल शर्मा, संदीप चतुर्वेदी, वीरसिंह भदौरिया, अशोक गुप्ता पप्पू, रमेशचंद्र वर्मा सर्राफ, ग्याप्रसाद दुबे, जगदीश वशिष्ठ, साधना तिवारी, अमृता चौहान मौजूद रहे।

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अज्ञात बालक बना महा मंडलेश्वर
शारदानंद सरस्वती बाल्यकाल में स्वामी भजनानंद के पास आए थे। वह अपना नाम और पता भी नहीं बता सके। भजनानंद ने उन्हें आश्रम में रख लिया। आश्रम में ही शिक्षा दीक्षा दिलाई। महामंडलेश्वर स्वामी हरिहारानंद महाराज ने बताया कि बड़ा होने पर स्वामी भजनानंद ने उन्हें वेदों के अध्ययन के लिए काशी भेज दिया। काशी से वापस आने पर स्वामी भजनानंद ने बालक के विरक्त स्वभाव को देखकर वर्ष 1976 में ऋषिकेश में गंगा तट पर संन्यास की दीक्षा दे दी। वेदांत की शिक्षा के बाद वह सन्यास ग्रहण करते ही महामंडलेश्वर शारदानंद सरस्वती हो गए।
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07एमएनपी-09-महामंडलेश्वर स्वामी शारदानंद सरस्वती महाराज का फाइल फोटो

07एमएनपी-09-महामंडलेश्वर स्वामी शारदानंद सरस्वती महाराज का फाइल फोटो- फोटो : MAINPURI

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