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दहेज हत्या के आरोपियों को सात साल कारावास की सजा, जुर्माना
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कासगंज। शनिवार को न्यायालय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश गगन कुमार भारती ने 8 वर्ष पुराने दहेज हत्या के मामले में फैसला सुनाया है। पति, ससुर और सास को सात-सात साल की सजा सुनाई है। दोषियों को जेल भेजा गया है।
23 मार्च 2013 में ढोलना थाने में विवाहिता गौरी के भाई सोनू ने मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें आरोप लगाया था कि ससुरालीनों ने दहेज की खातिर उनकी बहन गौरी की हत्या कर दी। इस मामले में पति सोनू उर्फ सुमित, ससुर लाल सिंह, सास विमला देवी एवं मोनू उर्फ रामकिशन के खिलाफ विवेचक ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। इस मामले में अपर एवं जिला सत्र न्यायाधीश न्यायालय में सुनवाई चल रही थी। शनिवार को पीड़ित पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता और बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता ने बहस की। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुना और फिर निर्णय सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या तृतीय गगन कुमार भारती ने सोनू उर्फ सुमित, मोनू, विमला देवी और लाल सिंह को सात साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई। साथ ही सभी दोषियों पर 5-5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। न्यायालय ने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि जुर्माना जमा नहीं किया जाता है तो 6 माह का अतिरिक्त कारावास होगा। न्यायादेश में लिखा है कि दोष सिद्ध अपराधियों द्वारा पूर्व में जेल में बिताई गई अवधि की सजा समायोजित होगी।
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23 मार्च 2013 में ढोलना थाने में विवाहिता गौरी के भाई सोनू ने मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें आरोप लगाया था कि ससुरालीनों ने दहेज की खातिर उनकी बहन गौरी की हत्या कर दी। इस मामले में पति सोनू उर्फ सुमित, ससुर लाल सिंह, सास विमला देवी एवं मोनू उर्फ रामकिशन के खिलाफ विवेचक ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। इस मामले में अपर एवं जिला सत्र न्यायाधीश न्यायालय में सुनवाई चल रही थी। शनिवार को पीड़ित पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता और बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता ने बहस की। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुना और फिर निर्णय सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या तृतीय गगन कुमार भारती ने सोनू उर्फ सुमित, मोनू, विमला देवी और लाल सिंह को सात साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई। साथ ही सभी दोषियों पर 5-5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। न्यायालय ने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि जुर्माना जमा नहीं किया जाता है तो 6 माह का अतिरिक्त कारावास होगा। न्यायादेश में लिखा है कि दोष सिद्ध अपराधियों द्वारा पूर्व में जेल में बिताई गई अवधि की सजा समायोजित होगी।
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