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फर्जी दस्तावेज से नौकरी पाने वाले सात शिक्षक बर्खास्त, विभाग वसूलेगा वेतन के 67 लाख

Thu, 27 Sep 2018 08:43 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा Updated Thu, 27 Sep 2018 08:43 AM IST
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seven teachers dismissed for get jobs on fake documents
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आगरा में बीएसए ने बुधवार को जिले के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में तैनात सात शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया। सत्यापन कराने के बाद पांच शिक्षकों के अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। 
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एक शिक्षक ने बीएसए का फर्जी प्रमाणपत्र लगाया था। जबकि दूसरे के स्नातक के अंकों में भिन्नता पाई गई है। शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर के आदेश संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों को दिया गया है। वेतन की रिकवरी भी की जाएगी। 
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बीएसए आनंद प्रकाश शर्मा के मुताबिक वर्ष 2016 में प्रदेश में हुई 16448 शिक्षक भर्ती में इन सातों शिक्षकों ने जिले में नियुक्ति पाई। इनके प्रमाणपत्रों को सत्यापन के लिए संबंधित संस्थानों को भेजा गया था। सत्यापन रिपोर्ट आने के बाद शिक्षकों पर कार्रवाई की गई है। 
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ये टीचर हुए बर्खास्त

पूजा सिंह, सहायक अध्यापिका, प्राथमिक विद्यालय मिडकौली, बाह, अशोक कुमार, सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय तुर्रक पुरा, जगनेर, वेद प्रकाश, सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय, लालपुरा, पिनाहट, अंजू गुप्ता, सहायक अध्यापिका, प्राथमिक विद्यालय, गढ़ी थाना, शमसाबाद और विकास सिंह प्राथमिक विद्यालय, बड़ा गांव, जैतपुर कला के टीईटी के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं। 

बीएसए ने बताया कि परीक्षा नियामक के पास इन शिक्षकों के नाम से कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं है। वहीं, तन्वी गुप्ता, सहायक अध्यापिका, प्राथमिक विद्यालय नगला धीरे, शमासाबाद की बीएससी की डिग्री सत्यापन रिपोर्ट में फर्जी बताई गई है। 

प्रीति सिकरवार, सहायक अध्यापिका, मंडा की गढ़ी, शमसाबाद के बीकॉम के अंकों में भिन्नता पाई गई है। आवेदन फार्म में जो अंक भरे गए थे, विश्वविद्यालय के रिकार्ड में उससे एक अंक कम था। इन दोनों शिक्षकों ने डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की स्नातक की डिग्री लगाई थी।  

जांच हुई तो और बढ़ेगी संख्या 

सूत्रों की मानें तो वर्ष 2010 से सभी नियुक्तियों की जांच कराई गई तो बड़ी संख्या में शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी निकलेंगे। शासन स्तर से वर्ष 2010 से अब तक की सभी नियुक्तियों के जांच के आदेश दिए हुए हैं। कमेटी बनी हुई है, अभी जांच प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। 

67 लाख रुपये वेतन के रूप में दिए
 
40 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन के हिसाब से इन सात शिक्षकों को विभाग ने दो वर्ष में करीब 67.20 लाख रुपये दिए हैं। इसकी रिकवरी विभाग को करना है। यह भी देखना होगा कि खंड शिक्षा अधिकारी शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर कराते हैं कि नहीं। इसके पहले वर्ष 2014 में 10 शिक्षा मित्र फर्जी पाए गए थे, उन पर एफआईआर आज तक नहीं दर्ज हो सकी है। 
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