आगरा: ब्लैक फंगस के दो और मरीजों ने दम तोड़ा, एसएन में एक दिन में दो की मौत का यह पहला मामला
अभी तक एसएन में दम तोड़ चुके सात मरीजों में चार ऐसे रहे, जिनकी आंख निकालनी पड़ी थी। ऑपरेशन के बाद भी मरीजों की हालत में सुधार नहीं हुआ।
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एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती ब्लैक फंगस के दो और मरीजों की मौत हो गई है। इनमें से एक मरीज की आंख भी निकालनी पड़ी थी। एक दिन में फंगस के दो मरीजों की मौत का यह पहला मामला है। ब्लैक फंगस वार्ड के प्रभारी डॉ. अखिल प्रताप सिंह ने बताया कि मैनपुरी की 49 साल की महिला बीते एक महीने से यहां इलाज करा रही थी। दस दिन पहले आंख तक फंगस पहुंचने के कारण आंख निकालनी पड़ी थी। मंगलवार को इनकी मौत हो गई है। एक और मरीज जिनकी उम्र 55 साल थी, उन्होंने शाम को दम तोड़ दिया। यह भी लगभग एक महीने से फंगस वार्ड में भर्ती थे। फंगस जबड़ा और नाक तक पहुंच गया था और ऑपरेशन कर जबड़ा और नाक की हड्डी निकाली गई थी। अब तक ब्लैक फंगस के सात मरीजों की मौत हो चुकी है।
उच्च रक्तचाप, खून की कमी से अटके ऑपरेशन
ब्लैक फंगस के मरीजों में उच्च रक्तचाप और खून की कमी मिल रही है। ऐसे 11 मरीज हैं, जिनके ऑपरेशन टाले गए हैं। ब्लैक फंगस वार्ड के प्रभारी ने बताया कि इनको दवाएं देने के साथ रक्त भी चढ़ाया जा रहा है। अब तक भर्ती हुए 81 मरीजों में से 11 मरीजों के ऑपरेशन आगे के लिए टालने पड़े थे।
आंख में फंगस बना जानलेवा, आंख निकालने के बाद चार की हो चुकी है मौत
आंख में फंगस पहुंचने के बाद जानलेवा स्थिति बन रही है। अभी तक एसएन में दम तोड़ चुके सात मरीजों में चार ऐसे रहे, जिनकी आंख निकालनी पड़ी थी। ऑपरेशन के बाद भी मरीजों की हालत में सुधार नहीं हुआ।
नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. हिमांशु यादव ने बताया कि 13 मरीजों में आंख तक फंगस मिला। इनमें से सात मरीजों में फंगस से कॉर्निया खराब हो गई थी और अंदर तक मवाद पड़ गया था। ऐसे में इनकी पूरी आंख निकालनी पड़ी। इनकी हालत में अन्य अंगों तक पहुंचे फंगस के मुकाबले हालत गंभीर है। अभी वार्ड में आंख निकलची तीन मरीजों का इलाज चल रहा है। ब्लैक फंगस वार्ड के प्रभारी डॉ. अखिल प्रताप सिंह ने बताया कि ऐसे मरीजों में ऑपरेशन के बाद भी खतरा बना हुआ है। इनकी नियमित जांच करने के साथ एंटी फंगल इंजेक्शन भी दिया जा रहा है।
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