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1173 स्कूलों में नहीं मानक के अनुरूप नहीं लगे टाइल्स
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मैनपुरी। शासन के आदेशों की प्रधानाध्यापक और प्रधान धज्जियां उड़ा रहे हैं। आदेशों के बाद भी जिले के 1173 स्कूलों में टाइल्स मानक के अनुसार नहीं लगाए गए। मामले की जानकारी पर बीएसए ने खंड शिक्षाधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है।
जनवरी 2019 में शासन के निर्देश के बाद जिले के सभी स्कूलों व शौचालयों में टाइल्स लगवाए जाने के निर्देश दिए थे। लेकिन हाल ही में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से करवाए गए एक सर्वे में जिले के 1803 स्कूलों में से मात्र 630 में ही टाइल्स मानक के अनुसार लगाए जा सके हैं। शेष 1173 स्कूलों में टाइल्स मानक के अनुसार नहीं लगाए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद बीएसए ने खंड शिक्षाधिकारियों से भी रिपोर्ट मांगी है। बीएसए ने खंड शिक्षाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों के स्कूल व शौचालयों में लगे टाइल्स की जानकारी प्राप्त कर रिपोर्ट उन्हें उपलब्ध कराएं। इससे कि जिलाधिकारी के माध्यम से जिला पंचायत राज विभाग से अधूरे स्कूलों में मानक के अनुसार टाइल्स लगाए जा सकें।
कुछ स्कूलों ने रंगाई पुताई भी नहीं कराई
स्कूलों में मरम्मत के लिए हर साल प्राथमिक स्तर पर पांच हजार तथा उच्च प्राथमिक स्तर पर 10 हजार रुपये भेजे जाते हैं। विद्यालय प्रबंध समिति के माध्यम से मरम्मत का कार्य कराया जाता है। लेकिन जिले के दो दर्जन से अधिक स्कूल ऐसे हैं जहां रंगाई-पुताई तक नहीं की गई है। हाल ही में निरीक्षण के दौरान भी दो स्कूल ऐसे पाए गए थे जहां रंगाई-पुताई नहीं की गई।
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रोका जा सकता है वेतन
टाइल्स और रंगाई-पुताई में यदि प्रधानाध्यापक की लापरवाही पाई जाती है। संबंधित स्कूलों के प्रधानाध्यापकों का वेतन भी रोका जा सकता है। सूत्रों की मानें तो विभाग में इसके लिए तैयारियां जोरों पर चल रहीं हैं।
वर्जन
अधिकतर स्कूलों में टाइल्स बिछवाईं गई हैं। शौचालयों में टाइल्स लगाने में लापरवाही की जानकारी मिली है। इसकी जांच जारी है। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
विजय प्रताप सिंह, बीएसए
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जनवरी 2019 में शासन के निर्देश के बाद जिले के सभी स्कूलों व शौचालयों में टाइल्स लगवाए जाने के निर्देश दिए थे। लेकिन हाल ही में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से करवाए गए एक सर्वे में जिले के 1803 स्कूलों में से मात्र 630 में ही टाइल्स मानक के अनुसार लगाए जा सके हैं। शेष 1173 स्कूलों में टाइल्स मानक के अनुसार नहीं लगाए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद बीएसए ने खंड शिक्षाधिकारियों से भी रिपोर्ट मांगी है। बीएसए ने खंड शिक्षाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों के स्कूल व शौचालयों में लगे टाइल्स की जानकारी प्राप्त कर रिपोर्ट उन्हें उपलब्ध कराएं। इससे कि जिलाधिकारी के माध्यम से जिला पंचायत राज विभाग से अधूरे स्कूलों में मानक के अनुसार टाइल्स लगाए जा सकें।
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कुछ स्कूलों ने रंगाई पुताई भी नहीं कराई
स्कूलों में मरम्मत के लिए हर साल प्राथमिक स्तर पर पांच हजार तथा उच्च प्राथमिक स्तर पर 10 हजार रुपये भेजे जाते हैं। विद्यालय प्रबंध समिति के माध्यम से मरम्मत का कार्य कराया जाता है। लेकिन जिले के दो दर्जन से अधिक स्कूल ऐसे हैं जहां रंगाई-पुताई तक नहीं की गई है। हाल ही में निरीक्षण के दौरान भी दो स्कूल ऐसे पाए गए थे जहां रंगाई-पुताई नहीं की गई।
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रोका जा सकता है वेतन
टाइल्स और रंगाई-पुताई में यदि प्रधानाध्यापक की लापरवाही पाई जाती है। संबंधित स्कूलों के प्रधानाध्यापकों का वेतन भी रोका जा सकता है। सूत्रों की मानें तो विभाग में इसके लिए तैयारियां जोरों पर चल रहीं हैं।
वर्जन
अधिकतर स्कूलों में टाइल्स बिछवाईं गई हैं। शौचालयों में टाइल्स लगाने में लापरवाही की जानकारी मिली है। इसकी जांच जारी है। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
विजय प्रताप सिंह, बीएसए