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एक युद्ध पटाखों के विरुद्ध: ‘पटाखों के पैसों से भरेंगे गरीब बच्चों की फीस’

Fri, 13 Nov 2020 11:56 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Fri, 13 Nov 2020 11:56 AM IST
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Say No FireCrackers People Said Fees Will Submit Of Poor Children
एक युद्ध, पटाखों के विरुद्ध - फोटो : अमर उजाला
हम पटाखों में पैसे बर्बाद नहीं करेंगे, हर बार पांच से दस हजार रुपये खर्च हो जाते थे, इस बार इन पैसों से गरीब बच्चों की फीस भरेंगे, इससे बड़ी कोई खुशी नहीं है कि किसी को जिंदगी तालीम से रोशन की जाए... अमर उजाला की पहल ‘एक युद्ध पटाखों के विरुद्ध’ के तहत बृहस्पतिवार को आयोजित वेबिनार में यह संकल्प शहर की प्रमुख महिलाओं ने लिया। उन्होंने कहा कि ताजनगरी से पटाखा रहित दिवाली का संदेश देना है जो पूरे देश में जाएगा। 
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इस दौरान महिलाओं ने पटाखों के नुकसान बताए और पर्यावरण संरक्षण के लिए सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि उन लोगों से पूछों जो आतिशबाजी के दौरान हादसे का शिकार हुए हैं। ताजनगरी में ही हर साल 10 से 15 लोग झुलस जाते हैं। इसके अलावा पटाखों के धुएं से लोगों को सांस लेने में तकलीफ होती है।
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हमारी परंपरा में नहीं है पटाखे 
भगवान राम जब अयोध्या लौटे तो दीप जलाकर उनका स्वागत किया गया। तब पटाखे थे ही नहीं। इसलिए दिवाली पर आतिशबाजी की परंपरा नहीं है। अगर बच्चे जिद करते हैं तो ढोल बजाकर उन्हें खुश करें या फिर गुब्बारे फोड़कर शोर करें। - सुमन गोयल, सेवा आगरा  
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दीये जलाएं और खुशियां बांटे 
पटाखों चलाने में कोई खुशी ही नहीं है। शोर करते हैं, जहरीला धुआं करते हैं। दिवाली खुशियां बांटने का त्योहार है। मिट्टी के दीये जलाएं। हर परिवार एक पौधा लगाए। अगली दिवाली पर जब यह बड़ा हो चुका होगा तो देखकर बहुत खुशी होगी -  अर्चना यादव, आर्किटेक्ट

पर्यावरण संरक्षण सबकी जिम्मेदारी 
हम उन लोगों की मदद करें जो वंचित हैं। इससे खुशी मिलेगी। पटाखे चलाने में कोई खुशी नहीं है। इससे लोगों को नुकसान होता है। इसकी जगह पौधे लगाएं। पर्यावरण संरक्षण हम सबकी जिम्मेदारी है। हरियाली से सकारात्मकता आती है। -  अंजू जैन, कंपनी सेक्रेटरी

हमेशा के लिए लगे पटाखों पर प्रतिबंध 
पटाखों पर हमेशा के लिए प्रतिबंध लगना चाहिए। वोकल फॉर लोकल बनें। निर्धन तबके के मददगार बनें, उन्हें रोजगार देने की कोशिश करें और उनके द्वारा बनाये गए उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराएं।  हमारी संस्था इस दिशा में काम भी कर रही है। - चंचल गुप्ता, एडवोकेट

पटाखों पर प्रतिबंध आगे भी जारी रहे
पटाखों पर प्रतिबंध सिर्फ दिवाली के लिए न हो। यह आगे भी जारी रहे। इस दिवाली पर बच्चों को समझाएं कि वे पटाखे न चलाएं। उपहार उनके हाथों से बंटवाएं, उन्हें खुशी मिलेगी। गरीब बच्चों और जरूरतमंदों को उपहार दें। -  दीपिका मित्तल, चार्टर्ड एकाउंटेंट  

इससे पशुओं को भी होती है परेशानी 
पटाखों के शोर से इंसानों को ही नहीं बल्कि पशुओं को भी परेशानी होती है। वे बहरे तक हो जाते हैं। इसके लिए युवाओं की सोच बदलने की जरूरत है। क्योंकि वे ही समाज को भड़कने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यह कार्य संस्था कर भी रही है। - विनीता अरोरा, संचालिका कैस्पर होम संस्था

गरीब बच्चों की फीस भरें
लॉकडाउन के दौरान ओजोन की परत में सुधार आया था। मगर, हम लोगों ने एक बार पर्यावरण को खराब कर उसे नुकसान पहुंचाया है। जरूरत है इसे फिर सुधारने की। पटाखों की बजाय मिष्ठान वितरण करें और दीप जलाएं। गरीब बच्चों की फीस भरें। - सुरेंद्र मलिक, उद्यमी

दिलों के अंधेरे को दूर करने की जरूरत:
लोगों के दिलों में अंधेरा है। इसे हम सबको मिलकर दूर करने की जरूरत है। इसके लिए गरीब परिवारों को दीये वितरित करें। पटाखों से होने वाली दुर्घटनाओं में हाथ-पैर जलने के अलावा आंखें तक जा चुकी है। संस्था लोगों को जागरूक कर रही है। - पूनम सचदेवा, संस्थापक स्पाइसी क्लब संस्था
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