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जो मन पर अनुशासन रखता है वही मनुष्य है
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असंग देव ।
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। शहर के क्रिश्चियन मैदान में चल रहे तीन दिवसीय असंग साहेब के सत्संग कार्यक्रम का सोमवार की देर शाम समापन हो गया। अंतिम दिन असंग देव साहिब ने मानव जीवन के लिए महारतनों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जो मन पर अनुशासन रखता है वही मनुष्य है।
असंग देव ने कहा कि दया, धर्म, संतोष, धैर्य, कर्मठता, विवेक, विचार, संयम, उद्यम, साहस और प्रसन्नता यह 11 महारत्न रूपी सद्गुण हैं। जीवन के सर्वांगीण विकास के लिए पग पग पर मदद करते हैं। इन सद्गुणों का खजाना सद्गुरु की कृपा और उनकी दृष्टि से जीवन को सहज ही प्राप्त हो जाता है।
आदमी यदि आदमी बनने का दृढ़ संकल्प ले तो आदमी से महान और उसकी तुलना में दूसरा कोई प्राणी नहीं है। जो मन पर अनुशासन रखता है, वही मनुष्य है। जो प्रेम सेवा संयम का स्वरूप है वह श्रेष्ठ आदमी है। जो हिंसा चोरी के विचार और अभिमान को लेकर चलता है, वह आदमी होते हुए भी सिंह सा जानवर है। आदमी बनने के लिए अहंकार का त्याग अति आवश्यक है।
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समापन अवसर पर कार्यक्रम संयोजक शिशुपाल सिंह श्रीवास्तव, सुरेंद्र सिंह यादव, महेश यादव लेखपाल, बलवीर सिंह यादव एडवोकेट, रामसेवक राजपूत, जितेंद्र यादव, पंकज यादव प्रधान, संतोष श्रीवास्तव, शैलेंद्र प्रधान, राजपाल सिंह, सुनील यादव, सुरेंद्र यादव आदि लोग मौजूद रहे।
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असंग देव ने कहा कि दया, धर्म, संतोष, धैर्य, कर्मठता, विवेक, विचार, संयम, उद्यम, साहस और प्रसन्नता यह 11 महारत्न रूपी सद्गुण हैं। जीवन के सर्वांगीण विकास के लिए पग पग पर मदद करते हैं। इन सद्गुणों का खजाना सद्गुरु की कृपा और उनकी दृष्टि से जीवन को सहज ही प्राप्त हो जाता है।
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आदमी यदि आदमी बनने का दृढ़ संकल्प ले तो आदमी से महान और उसकी तुलना में दूसरा कोई प्राणी नहीं है। जो मन पर अनुशासन रखता है, वही मनुष्य है। जो प्रेम सेवा संयम का स्वरूप है वह श्रेष्ठ आदमी है। जो हिंसा चोरी के विचार और अभिमान को लेकर चलता है, वह आदमी होते हुए भी सिंह सा जानवर है। आदमी बनने के लिए अहंकार का त्याग अति आवश्यक है।
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समापन अवसर पर कार्यक्रम संयोजक शिशुपाल सिंह श्रीवास्तव, सुरेंद्र सिंह यादव, महेश यादव लेखपाल, बलवीर सिंह यादव एडवोकेट, रामसेवक राजपूत, जितेंद्र यादव, पंकज यादव प्रधान, संतोष श्रीवास्तव, शैलेंद्र प्रधान, राजपाल सिंह, सुनील यादव, सुरेंद्र यादव आदि लोग मौजूद रहे।