बैंक में तैनात सराफ ने किया खेल: नकली जेवर रखवाकर दिलाया लाखों का लोन, खुलासा हुआ तो अधिकारियों के उड़े होश
आगरा में बैंक में जेवरात की जांच के लिए तैनात सराफ ने बड़ा खेल कर दिया। उन्होंने नकली जेवर गिरवी रखवाकर लाखों का लोन पास करा दिया। खुलासा हुआ तो अधिकारियों के होश उड़ गए।
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उत्तर प्रदेश के आगरा में केनरा बैंक की शाखा में सोने के जेवरात की जांच के लिए नियुक्त दो सराफ ने ही 34.68 लाख रुपये का गबन कर दिया। नकली सोने के जेवरात की जांच कर अधिक वजन और कीमत बताकर मजदूरों के नाम पर ऋण पास करा दिया। पता फर्जी दिया गया। बैंक में किस्त नहीं जमा होने पर ऋणदाताओं को नोटिस भेजे गए। मगर, पते पर वो नहीं मिले। इससे मामला खुल गया। बैंक के सहायक महाप्रबंधक ने दोनों सराफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस विवेचना कर रही है।
मुकदमे में दो आरोपियों को किया गया नामजद
मामला हरिपर्वत थाना क्षेत्र का है। यहां केनरा बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय के सहायक महाप्रबंधक मुरबाग सिंह ने मुकदमा दर्ज कराया है। इसमें धोखाधड़ी और अमानत में खयानत का आरोप है। सराफ देवरी रोड निवासी गिरीशचंद और नगला पदी निवासी प्रदीप कुमार वर्मा को नामजद किया है। बैंक स्वर्ण योजना के तहत लोगों को सोने के जेवरात रखने पर ऋण देता है। जेवरात की शुद्धता की जांच कर कीमत का आकलन बैंक में नियुक्त सराफ करते हैं। इसके बाद ही ऋण दिया जाता है।
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नोटिस भेजे गए, लेकिन नहीं मिला कोई जवाब
बैंक से 22 लोगों के नाम पर 34.68 लाख का ऋण लिया गया था। इसमें उनके कागजात लगाए गए। जेवरात भी रखे गए। ऋण लेने के बाद भी बैंक में किस्त जमा नहीं हो रही थीं। इस पर ऋणदाताओं के पते पर बैंक की तरफ से नोटिस भेजे गए। मगर, कोई जवाब नहीं मिला। बाद में रिकवरी टीम को भेजा गया। मगर, उक्त पते पर कोई नहीं मिला। बैंक ने दूसरे सराफ से जेवरात की जांच कराई। इसमें नकली होने का पता चला।कीमत से अधिक ले लिया लोन
सामने आया कि जो जेवरात बैंक में गिरवी रखे गए उनका षड्यंत्र के तहत गलत आकलन आरोपी प्रदीप कुमार और गिरीशचंद ने किया था। अत्यधिक कीमत बताई गई थी। वर्तमान दर से अधिक कीमत लगाई गई। जेवरात के नकली होने पर भी कीमत से अधिक ऋण प्राप्त कर लिया।यह भी पढ़ेंः- बेटे की हत्या करके थाने पहुंचा पिता; बोला-मार दिया है, उठा लाओ, मौके पर पहुंची पुलिस तो
मजदूरों से लिए थे दस्तावेज
थाना प्रभारी निरीक्षक अरविंद कुमार ने बताया कि बैंक में जो दस्तावेज लगाए गए, वो मजदूरों के हैं। मजदूरों को ऋण दिलाने का आश्वासन दिया गया था। मगर, उन्हें कोई ऋण नहीं दिया गया। आधार कार्ड भी फर्जी लगाए थे। जेवरात भी नकली थे। आरोपियों की तलाश की जा रही है।इनके नाम पर लिया ऋण
ऋण के लिए अचल शर्मा, नीरज पटेल, धर्मेंद्र सिंह, सुरेश चौधरी, बृजकिशोर, कैलाश सिंह, विशाल, मनीष विसन, भूरी सिंह, अर्जुन सिंह, अमर सिंह, अजय विक्रम सिंह, राजल सिंह, नरेंद्र शर्मा, शकुंतला देवी, प्रीति चौधरी, मौजीराम, राजेश कुमार, धर्मेंद्र कुमार, नाथू सिंह, दीपक कुमार, लाखन सिंह नाम के दस्तावेज लगाए गए थे।यह भी पढ़ेंः- संबंध नहीं बनाने की इच्छा भी है बीमारी: घबराएं नहीं, इलाज संभव है, पढ़ें विशेषज्ञों की सलाह, कारण