जाको राखे साइयां : बालू लदे डंपर ने गर्भवती को कुचला, पेट से बाहर निकल आया बच्चा, जिसने देखा सहम उठा
महिला अपने पति के साथ मायके जा रही थी। फिरोजाबाद के नारखी क्षेत्र में हादसे का शिकार हो गई। उसके शिशु को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वह सही सलामत बताया गया है।
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विस्तार
फिरोजाबाद के थाना नारखी क्षेत्र में बुधवार को दर्दनाक घटना हुई, जिसे देखकर लोगों का कलेजा कांप गया। नारखी क्षेत्र के गांव बरतरा के पास बालू से भरे डंपर ने गर्भवती महिला को कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। उसके पेट में पल रहा शिशु बाहर निकल आया। नवजात शिशु को सौ शैय्या अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वह बालिका है। वह सही सलामत बताई गई है।
पति के साथ अपने मायके जा रही थी महिला
जानकारी के मुताबिक आगरा के धनौली निवासी रामू की पत्नी कामिनी (26) करीब आठ महीने की गर्भवती थी। वह उसे लेकर बाइक से फिरोजाबाद के कोटला फरिहा जा रहा था। कोटला फरिहा में कामिनी का मायका है। थाना नारखी क्षेत्र के गांव बरतरा के पास गलत दिशा से आ रही बाइक को बचाने के चक्कर में रामू की बाइक अनियंत्रित हो गई। बाइक पर पीछे बैठी कामिनी गिर गई। इसी दौरान पीछे से आ रहे बालू भरे डंपर ने कामिनी को कुचल दिया।
मौके पर मां की मौत, शिशु सही सलामत
घटना में कामिनी की मौके पर ही मौत हो गई। उसके गर्भ से शिशु बाहर आ गया। घटना इतनी भयावह थी कि जिसने भी देखा उसका कलेजा कांप गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने नवजात शिशु को अस्पताल भिजवाया। मृतका के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। नारखी थाना प्रभारी फतेह बहादुर सिंह भदौरिया ने बताया कि हादसे के बाद डंपर चालक भाग गया। वाहन को कब्जे में लिया है। चालक के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
पति का रो-रोकर बुरा हाल
हादसे के बाद कामिनी की ससुराल और मायके में कोहराम मच गया है। उसके पति का रो-रोकर बुरा हाल है। इस घटना में जहां मां की जान चली गई, वहीं उसके नवजात शिशु को खरोंच तक नहीं आई है। अबोध को देखकर लोगों का कहना था कि जाको राखे साईंया मार सके ना कोय। फिलहाल उसका उपचार चल रहा है।भतीजी की मौत के आठ घंटे बाद चाचा ने भी तोड़ा दम
नारखी क्षेत्र के गांव नगला मुरली कोटला निवासी कामिनी की सुबह करीब दस बजे सड़क हादसे में मौत हो गई। देर शाम चाचा को कामिनी की मौत के बारे में परिजन ने बताया तो चाचा भतीजी की मौत के सदमे को सहन नहीं कर सका। कुछ देर बाद चाचा की भी सांसे थम गई। आठ घंटे के अंदर चाचा और भतीजी की मौत के बाद परिवारीजन में कोहराम मच गया।कामिनी के भाई दीपक की मानें तो कामिनी के पिता की मौत हो चुकी है। चाचा कामिनी को परिवार के अन्य सदस्यों की अपेक्षा कामिनी को अधिक प्यार करते थे। चाचा कालीचरन की तबियत काफी समय से खराब चल रही थी। वह कामिनी और उसके पति को देखने के लिए काफी समय से जिद कर रहे थे। चाचा कालीचरन (65) कैंसर से पीड़ित होने के कारण वह ठीक से चल फिर भी नहीं पाते थे। चाचा और कामिनी की फोन पर बात भी हुई थी। चाचा ने कामिनी से घर आने के लिए कहा था। इस पर कामिनी पति के साथ चाचा को देखने के लिए आ रही थी। सुबह करीब दस बजे कामिनी की मौत हो गई थी। लेकिन चाचा से इस बात को देर शाम तक छुपा कर रखा गया था। क्योंकि चाचा इस सदमे को सहन करने की स्थिति में नहीं थे। देर शाम चाचा कालीचरन को भतीजी कामिनी की मौत की खबर बताई गई। भतीजी की मौत की खबर सुनकर वह सदमे में आ गए और एक घंटे के भीतर चाचा ने भी दम तोड़ दिया।