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दूध में मिला डिटर्जेंट...घी में पाम ऑयल, 738 नमूनों में से 361 फेल, आप भी कर सकते हैं मिलावट की पहचान
Mon, 26 Oct 2020 01:50 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 26 Oct 2020 01:50 PM IST
सार
- नकली दूध, घी में पाम ऑयल और नमकीन में घटिया मूंगफली
- सबसे ज्यादा मिलावट दूध से निर्मित खाद्य सामग्री में पाई गई
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ग्लूकोज, डिटर्जेंट पाउडर मिला नकली दूध, घी में पाम आयल और नमकीन में घुन लगी मूंगफली। आगरा में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की जांच में यह मिलावट पकड़ी गई हैं। सबसे ज्यादा मिलावट दूध निर्मित खाद्य सामग्री में मिली है। नमकीन के नौ नमूने खतरनाक पाए गए हैं।
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एफएसडीए ने बीते साल दूध, पनीर, घी, नमकीन, पानी, दाल, खोआ, रिफाइंड, मिठाई समेत 738 खाद्य सामग्री के नमूनों की जांच कराई। इसमें से 361 नमूने फेल पाए गए। 298 नमूने अधोमानक, 47 नमूने सेहत के लिए असुरक्षित और 16 नमूने मिथ्या छाप मिले।
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इनमें सबसे ज्यादा दूध के नमूने फेल हुए। 166 नमूनों में से 71 में मिलावट मिली। दो मामले नकली दूध के थे। जिला अभिहित अधिकारी अमित कुमार ने बताया कि मिलावटी और फेल नमूना मिलने पर मुकदमा दर्ज करा दिया है, मामला कोर्ट में चल रहे हैं।
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नमकीन में घटिया तेल-घुन लगी मूंगफली
नमकीन की जांच में सबसे ज्यादा नौ नमूने सेहत के लिए असुरक्षित बताए गए। जांच में नमकीन को घटिया तेल का उपयोग किया गया। घुनी-खराब मूंगफली इस्तेमाल की गई। इनके खाने लोगों को फूड प्वॉयजनिंग और किडनी की बीमारी का ज्यादा खतरा है।
यह मिली मिलावट
सरसों का तेल : घटिया सरसों, रिफाइंड
दूध : पानी, सिंथेटिक
खोआ : स्टार्च और वसा की कम मात्रा
सब्जी-फल : रंग चढ़ा-फलों पर मोम की पॉलिश
पान मसाला : सिंथेटिक कत्था, घटिया तंबाकू
बेसन : सूजी, पीला रंग
हल्दी : पीला रंग,
मिर्च-धनिया : डंठल, लाल रंग
घी : पाम ऑयल, वनस्पति
दाल : पॉलिश
बेसन : मक्का का आटा
यह मिली मिलावट
सरसों का तेल : घटिया सरसों, रिफाइंड
दूध : पानी, सिंथेटिक
खोआ : स्टार्च और वसा की कम मात्रा
सब्जी-फल : रंग चढ़ा-फलों पर मोम की पॉलिश
पान मसाला : सिंथेटिक कत्था, घटिया तंबाकू
बेसन : सूजी, पीला रंग
हल्दी : पीला रंग,
मिर्च-धनिया : डंठल, लाल रंग
घी : पाम ऑयल, वनस्पति
दाल : पॉलिश
बेसन : मक्का का आटा
ऐसे करें मिलावट की पहचान
दूध : एक घूंट दूध मुंह में भरकर कुल्ला कर दें, सिंथेटिक होगा तो शुरू में मीठा और फिर कसैला लगेगा। दूध की कुछ बूंदें जमीन पर गिराएं, पानी होने पर बूंद की आकृति ज्यादा होगी।
मसाले : एक गिलास पानी में एक चम्मच मिर्च या हल्दी डालें, रंग मिला होगा तो पानी में रंग आ जाएगा।
काली मिर्च : काली मिर्च में पपीते के बीज होंगे तो चबाने पर कसैला लगेगा, काली मिर्च तीखी होगी।
- जैसा कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी अवधेश पाराशर ने बताया
बच्चों को विकास होता है प्रभावित :डॉ. अरुण जैन
इंडियन पीडियाट्रिक्स एसोसिएशन के सचिव डॉ. अरुण जैन ने बताया कि नकली या फिर मिलावटी दूध पीने से बच्चों को पोषक तत्वों की कमी होती है। इससे बच्चे का विकास प्रभावित होता है। हड्डियां कमजोर रहती हैं। लंबाई भी प्रभावित होती है। लंबे समय से नकली दूध के उपयोग से मस्तिष्क का विकास भी पूरी तरह से विकसित नहीं होता है।
पेट, किडनी की बढ़ रही बीमारी :डॉ. आशीष गौतम
एसएन मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ डॉ. आशीष गौतम ने बताया कि दूध, घी समेत तमाम खाद्य सामग्री नकली और मिलावटी आ रही हैं। लंबे समय तक इनके उपयोग से पेट और किडनी की बीमारी होने का खतरा है। ऐसे मरीज भी लगातार बढ़ रहे हैं। फूड प्वॉयजनिंग के मामले भी खूब आते हैं।
मसाले : एक गिलास पानी में एक चम्मच मिर्च या हल्दी डालें, रंग मिला होगा तो पानी में रंग आ जाएगा।
काली मिर्च : काली मिर्च में पपीते के बीज होंगे तो चबाने पर कसैला लगेगा, काली मिर्च तीखी होगी।
- जैसा कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी अवधेश पाराशर ने बताया
बच्चों को विकास होता है प्रभावित :डॉ. अरुण जैन
इंडियन पीडियाट्रिक्स एसोसिएशन के सचिव डॉ. अरुण जैन ने बताया कि नकली या फिर मिलावटी दूध पीने से बच्चों को पोषक तत्वों की कमी होती है। इससे बच्चे का विकास प्रभावित होता है। हड्डियां कमजोर रहती हैं। लंबाई भी प्रभावित होती है। लंबे समय से नकली दूध के उपयोग से मस्तिष्क का विकास भी पूरी तरह से विकसित नहीं होता है।
पेट, किडनी की बढ़ रही बीमारी :डॉ. आशीष गौतम
एसएन मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ डॉ. आशीष गौतम ने बताया कि दूध, घी समेत तमाम खाद्य सामग्री नकली और मिलावटी आ रही हैं। लंबे समय तक इनके उपयोग से पेट और किडनी की बीमारी होने का खतरा है। ऐसे मरीज भी लगातार बढ़ रहे हैं। फूड प्वॉयजनिंग के मामले भी खूब आते हैं।