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कैसे मिलेगा लाभ जब डाटा ही नहीं हुआ संशोधित
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मैनपुरी। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि डाटा की गड़बड़ी कृषि विभाग के लिए परेशानी बनती जा रही है। लाख प्रयास के बाद भी डाटा संशोधन का काम गति नहीं पकड़ पा रहा है। डेढ़ माह में जिले में केवल 20 प्रतिशत किसानों का ही डाटा संशोधित हो सका है।
नवंबर में शासन ने कृषि विभाग को एक सूची भेजी थी। इसमें जिले के 1.55 लाख किसानों का डाटा त्रुटिपूर्ण बताया था। शासन द्वारा बताया गया था कि पंजीकरण में दर्ज किसान का नाम और आधार कार्ड में नाम अलग-अलग है। इस डाटा को संशोधित कराने के आदेश दिए गए थे। इसके बाद कृषि विभाग ने सभी तहसीलों के साथ ही उप कृषि निदेशक कार्यालय में संशोधन काउंटर शुरू किए थे। डेढ़ माह का समय बीतने के बाद भी 1.55 लाख में से केवल 32 हजार किसानों का ही डाटा संशोधित हो पाया है। इससे विभाग की चिंता और बढ़ गई है। क्योंकि अभी 80 प्रतिशत डाटा का संशोधन बाकी है। विभाग इसके लिए किसानों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहरा रहा है। वहीं किसान विभाग की लापरवाही बता रहे हैं। गलती चाहे किसी की भी हो, लेकिन हजारों किसानों को अभी किसान सम्मान निधि का लाभ मिलता दिखाई नहीं दे रहा है।
उप कृषि निदेशक कार्यालय में उमड़ रही भीड़
वैसे तो उप कृषि निदेशक कार्यालय में रोजाना किसान सम्मान निधि न आने को लेकर लोगों की भीड़ उमड़ रही है लेकिन जानकारी और अभिलेखों के अभाव में उनका डाटा संशोधित नहीं हो पाता है। इसी कारण से किसानों को चक्कर लगाने पड़ रहे हैं तो वहीं कृषि विभाग के अधिकारी भी परेशान हैं।
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सभी तहसीलों और उप कृषि निदेशक कार्यालय में डाटा का संशोधन किया जा रहा है। किसानों में जागरूकता की आवश्यकता है, ताकि जल्द से जल्द संशोधन पूरा किया जा सके।
डीवी सिंह, उप कृषि निदेशक।
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नवंबर में शासन ने कृषि विभाग को एक सूची भेजी थी। इसमें जिले के 1.55 लाख किसानों का डाटा त्रुटिपूर्ण बताया था। शासन द्वारा बताया गया था कि पंजीकरण में दर्ज किसान का नाम और आधार कार्ड में नाम अलग-अलग है। इस डाटा को संशोधित कराने के आदेश दिए गए थे। इसके बाद कृषि विभाग ने सभी तहसीलों के साथ ही उप कृषि निदेशक कार्यालय में संशोधन काउंटर शुरू किए थे। डेढ़ माह का समय बीतने के बाद भी 1.55 लाख में से केवल 32 हजार किसानों का ही डाटा संशोधित हो पाया है। इससे विभाग की चिंता और बढ़ गई है। क्योंकि अभी 80 प्रतिशत डाटा का संशोधन बाकी है। विभाग इसके लिए किसानों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहरा रहा है। वहीं किसान विभाग की लापरवाही बता रहे हैं। गलती चाहे किसी की भी हो, लेकिन हजारों किसानों को अभी किसान सम्मान निधि का लाभ मिलता दिखाई नहीं दे रहा है।
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उप कृषि निदेशक कार्यालय में उमड़ रही भीड़
वैसे तो उप कृषि निदेशक कार्यालय में रोजाना किसान सम्मान निधि न आने को लेकर लोगों की भीड़ उमड़ रही है लेकिन जानकारी और अभिलेखों के अभाव में उनका डाटा संशोधित नहीं हो पाता है। इसी कारण से किसानों को चक्कर लगाने पड़ रहे हैं तो वहीं कृषि विभाग के अधिकारी भी परेशान हैं।
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सभी तहसीलों और उप कृषि निदेशक कार्यालय में डाटा का संशोधन किया जा रहा है। किसानों में जागरूकता की आवश्यकता है, ताकि जल्द से जल्द संशोधन पूरा किया जा सके।
डीवी सिंह, उप कृषि निदेशक।