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फोरलेन- - भूमि अधिग्रहण और मुआवजे में लटका काली नदी पुल का निर्माण
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कासगंज में काली नदी पुल का रुका निर्माण
- फोटो : KASGANJ
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कासगंज। एटा-कासगंज मुख्यालय को जोड़ने की योजना के तहत निर्माणाधीन फोरलेन सड़क का काम कई जगहों पर विवादों में अटका हुआ है। काली नदी पर पुल निर्माण का काम अधर में लटक गया है। योजना में किसानों और पीडब्ल्यूडी अफसरों के बीच भी सामजंस्य नहीं बन पा रहा है। अधिकांश किसान तो अपनी भूमि का अधिग्रहण तो करा चुके हैं, लेकिन एक ही परिवार के चार किसान चार गुने मुआवजे की जिद पर अड़े हैं। ऐसे में भूमि अधिग्रहण न होने के कारण निर्माण कार्य नहीं हो पा रहा है।
फोरलेन सड़क निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। लोक निर्माण विभाग निर्धारित सीमा में सड़क का निर्माण करा रहा है, लेकिन कुछ जगहों पर पुल औरपुलियों के निर्माण में बाधा आ रही है। रेलवे और पीडब्ल्यूडी के बीच अभी तक अंतिम समझौता न होने के कारण नदरई रेल पुल पर अंडरपास का काम अधर में लटका है। इसके अलावा कासगंज से नदरई के बीच काली नदी पुल पर बनाया जाने वाला पुल भूमि अधिग्रहण नहीं होने के कारण सेतु निगम द्वारा पूरा नहीं किया जा पा रहा है।
यहां किसान शमशुद्दीन, शमशाद और उनके परिवार के ही दो अन्य भाई अधिग्रहण के लिए भूमि की रजिस्ट्री नहीं कर रहे हैं। शमशुद्दीन और शमशाद दोनों सेना में नौकरी करते हैं। उनका यहां आना कम रहता है और पीडब्ल्यूडी के अफसर उनसे सहमति के लिए लंबे समय से मुलाकात नहीं कर पा रहे हैं। वहीं उनके दो भाई चार गुना मुआवजे की बात अड़े हैं। लोक निर्माण विभाग और किसानों के बीच सहमति न होने के कारण सेतु निगम काम को आगे नहीं बढ़ा पा रहा है।
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फोरलेन सड़क निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। लोक निर्माण विभाग निर्धारित सीमा में सड़क का निर्माण करा रहा है, लेकिन कुछ जगहों पर पुल औरपुलियों के निर्माण में बाधा आ रही है। रेलवे और पीडब्ल्यूडी के बीच अभी तक अंतिम समझौता न होने के कारण नदरई रेल पुल पर अंडरपास का काम अधर में लटका है। इसके अलावा कासगंज से नदरई के बीच काली नदी पुल पर बनाया जाने वाला पुल भूमि अधिग्रहण नहीं होने के कारण सेतु निगम द्वारा पूरा नहीं किया जा पा रहा है।
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यहां किसान शमशुद्दीन, शमशाद और उनके परिवार के ही दो अन्य भाई अधिग्रहण के लिए भूमि की रजिस्ट्री नहीं कर रहे हैं। शमशुद्दीन और शमशाद दोनों सेना में नौकरी करते हैं। उनका यहां आना कम रहता है और पीडब्ल्यूडी के अफसर उनसे सहमति के लिए लंबे समय से मुलाकात नहीं कर पा रहे हैं। वहीं उनके दो भाई चार गुना मुआवजे की बात अड़े हैं। लोक निर्माण विभाग और किसानों के बीच सहमति न होने के कारण सेतु निगम काम को आगे नहीं बढ़ा पा रहा है।
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