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बाजार में मचा हाहाकार, छोटे नोटों को तरसे ग्राहक
बाजार में मचा हाहाकार, छोटे नोटों को तरसे ग्राहक
Updated Thu, 10 Nov 2016 12:52 AM IST
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बाजार में मचा हाहाकार, छोटे नोटों को तरसे ग्राहक
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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आधी रात से 500 और एक हजार रुपये के नोट बंद होने से बुधवार सुबह से ही बाजार में हाहाकार मच गया। सुबह के दूध, नाश्ते से लेकर रोजमर्रा की चीजें खरीदने के लिए भी लोग तरस गए। घरों में 500-एक हजार रुपये की करेंसी तो थी, लेकिन छोटे नोटों की कमी से जरूरत की चीजें भी लोग खरीद नहीं सके। यही वजह रही कि शहर के बाजारों में सुबह से रात तक सन्नाटा पसरा रहा। 10-20-50-100 रुपये के नोट न होने से किराना, कपड़ा, एफएमसीजी, खाद्यान्न और सब्जी मंडी में कारोबारी हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहे।
500 रुपये के नोट खपाने के लिए लोगों ने पेट्रोल पंपों की दौड़ लगाई, लेकिन शहर के अधिकांश पेट्रोल पंपों ने नोट लेने से ही इंकार कर दिया। जिन्होंने नोट लिए, उन्होंने पूरी रकम का पेट्रोल डालने की शर्त रख दी। रेलवे स्टेशन पर बुकिंग काउंटर और रिजर्वेशन सेंटरों पर भी कर्मचारियों ने 500-1000 रुपये के नोट नहीं लिए। पेट्रेाल पंपों से लेकर रेलवे कर्मचारियों ने अपने पास चिल्लर खत्म होने का हवाला देते हुए बड़े नोट लेने से ही इंकार कर दिया।
200 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित
बड़े नोट बंद होने से शहर में करीब 200 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। सहालग शुरू होने से ऑटोमोबाइल और सराफा के साथ कपड़ों, इलेक्ट्रानिक्स की मांग जबर्दस्त चल रही थी, लेकिन पांच सौ और एक हजार रुपये का नोट बंद होने से बुधवार को कारोबार हुआ ही नहीं। मोटर साइकिल शोरूमों पर पांच सौ रुपये के नोट लेकर पहुंचे, लेकिन डिलीवरी नहीं दी गई। यही हाल कार बाजार का हुआ। शादियों के लिए जिन परिवारों को ज्वेलरी और कपड़े खरीदने थे, उनके सामने सबसे ज्यादा मुश्किल रही। ज्वेलरी शोरूमों में सन्नाटा पसरा रहा तो वहीं कपड़े, साड़ी शोरूमों को ग्राहकों के लिए तरसना पड़ा। पुराने भरोसेमंद ग्राहकों को से तो चेक लिए गए, लेकिन बाकी लोगों ने खरीद से परहेज किया। शादी वाले घराें को सबसे ज्यादा मुसीबत झेलनी पड़ रही है। दूध, पनीर, सब्जी, मिठाईयों और हलवाई के सामान के लिए भी उन्हें कैश नहीं मिल पा रहा।
500 रुपये के नोट खपाने के लिए लोगों ने पेट्रोल पंपों की दौड़ लगाई, लेकिन शहर के अधिकांश पेट्रोल पंपों ने नोट लेने से ही इंकार कर दिया। जिन्होंने नोट लिए, उन्होंने पूरी रकम का पेट्रोल डालने की शर्त रख दी। रेलवे स्टेशन पर बुकिंग काउंटर और रिजर्वेशन सेंटरों पर भी कर्मचारियों ने 500-1000 रुपये के नोट नहीं लिए। पेट्रेाल पंपों से लेकर रेलवे कर्मचारियों ने अपने पास चिल्लर खत्म होने का हवाला देते हुए बड़े नोट लेने से ही इंकार कर दिया।
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200 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित
बड़े नोट बंद होने से शहर में करीब 200 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। सहालग शुरू होने से ऑटोमोबाइल और सराफा के साथ कपड़ों, इलेक्ट्रानिक्स की मांग जबर्दस्त चल रही थी, लेकिन पांच सौ और एक हजार रुपये का नोट बंद होने से बुधवार को कारोबार हुआ ही नहीं। मोटर साइकिल शोरूमों पर पांच सौ रुपये के नोट लेकर पहुंचे, लेकिन डिलीवरी नहीं दी गई। यही हाल कार बाजार का हुआ। शादियों के लिए जिन परिवारों को ज्वेलरी और कपड़े खरीदने थे, उनके सामने सबसे ज्यादा मुश्किल रही। ज्वेलरी शोरूमों में सन्नाटा पसरा रहा तो वहीं कपड़े, साड़ी शोरूमों को ग्राहकों के लिए तरसना पड़ा। पुराने भरोसेमंद ग्राहकों को से तो चेक लिए गए, लेकिन बाकी लोगों ने खरीद से परहेज किया। शादी वाले घराें को सबसे ज्यादा मुसीबत झेलनी पड़ रही है। दूध, पनीर, सब्जी, मिठाईयों और हलवाई के सामान के लिए भी उन्हें कैश नहीं मिल पा रहा।
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