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आगरा में बिना परमिट बस की सीज: 12 घंटे तक भटकते रहे छतरपुर के श्रमिक, भूख-प्यास से बिलखे बच्चे

Fri, 25 Feb 2022 10:57 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 25 Feb 2022 10:57 AM IST
सार

छतरपुर से 130 सवारियों को लेकर दिल्ली जा रही प्राइवेट स्लीपर बस को आगरा के आरटीओ के प्रवर्तन दल ने कुबेरपुर इंटरचेंज से पकड़कर सीज कर दिया।, लेकिन बस में सवार यात्रियों के जाने के लिए वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए। जिससे गरीब श्रमिक 12 घंटे तक बच्चों को साथ लेकर भूखे-प्यासे भटकते रहे। 

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RTO seized bus without permit but officials did not make alternate arrangements for passengers in agra
जमीन पर लेटी महिला श्रमिक की बेटी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा में प्रवर्तन दल ने बिना परमिट बस पकड़ी। 130 सवारियों को उतारकर आरटीओ के सामने लाकर छोड़ दिया और बस सीज कर दी। लेकिन यात्रियों के लिए वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए। बृहस्पतिवार तड़के चार बजे से शाम चार बजे तक किराया वापस मिलने के इंतजार में श्रमिक महिला-पुरुष और उनके बच्चे भूखे-प्यासे बैठे रहे। महिलाओं ने अधिकारियों से गुहार लगाई, प्रदर्शन किया। आरटीओ अफसरों ने दूसरी बस का इंतजाम करने में और किराया वापस दिलवाने में असमर्थता जता दी। 

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छतरपुर के रहने वाले सुनील कुमार, राकेश, विनोद ने बताया कि वह दिल्ली में मजदूरी करते हैं। प्राइवेट बस में छतरपुर से दिल्ली तक के लिए प्रति व्यक्ति 600 रुपये किराया दिया था। वह परिवार के साथ काम करने जा रहे थे। आरटीओ की टीम ने कुबेरपुर पर बृहस्पतिवार को चार बजे पकड़ा। लेकिन अभी तक न तो बस का इंतजाम किया और न ही किराया ही बस वालों से दिलवाया है। 

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भूख-प्यार से बेहाल हुए बच्चे

दो बच्चों के साथ आई शांति ने बताया कि बच्चे भूखे-प्यासे हैं। पैसा किराये में दे दिया, अब बच्चों को क्या खिलाएं। दोपहर के दो बजे गए हैं मगर अभी तक कुछ नहीं खाया है। बच्चे बेहाल हो रहे हैं। शाम चार बजे तक न किसी बस का इंतजाम किया गया न यात्रियों को किराया वापस दिलाया गया। परेशान श्रमिक अपने परिवारों के साथ आईएसबीटी चले गए। यहां से रोडवेज बसों, डग्गेमार की बसों में सवार होकर दिल्ली के लिए रवाना हो गए। 

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बच्चा भूखा है, दूध नहीं मिला

छतरपुर निवासी राधादेवी ने बताया कि बच्चा भूखा है। दूध नहीं मिला है। पति भी साथ आए हैं मगर बस नहीं भेजी तो किराये के लिए पैसा बचाना है। गीता देवी ने कहा कि अधिकारियों को गरीबों के लिए व्यवस्था तो करनी चाहिए। वह बस वाले पर भी दबाव नहीं बना रहे कि किराया ही वापस कर दे।

अफसर बोले, बस वाले को मारो

छतरपुर की काशी देवी ने कहा कि खुद भूखे रह लेंगे मगर बच्चों को क्या खिलाएं। आरटीओ वाले कह रहे हैं कि बस वाले को मारो, हम क्यों मारे। हमारे पैसे वापस दिला दो। 

जिम्मेदार बोले, सवारियों को दिक्कत तो होती है

आरटीओ (प्रवर्तन) के केडी सिंह ने बताया कि दूर की सवारियों को दिक्कत तो होती है और कोई विकल्प भी नहीं होता है। बस वाले ने भुगतान कर दिया होता तो सवारियों को इतनी दिक्कत नहीं होती। दूसरी बस की व्यवस्था तो तभी करते जबकि पकड़ी गई बस का चालक किराया देने को तैयार होता। 
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