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आरटीओ में मंडलायुक्त से दलाल ने मांगे 1000 रुपये
आरटीओ में मंडलायुक्त से दलाल ने मांगे 1000 रुपये
Updated Sun, 28 May 2017 01:01 AM IST
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संभागीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में शनिवार को दोपहर 12 बजे मंडलायुक्त के राममोहन राव फरियादी बनकर पहुंच गए। ड्राइविंग लाइसेंस पटल पर आवेदकों की भीड़ थी। वहां घूम रहे दलाल से आटो के लाइसेंस के लिए की बात की। उसने 1200 रुपये मांगे। कमिश्नर ने ज्यादा बताए। दलाल ने कहा कि एक हजार रुपये लाओ, बनवा दूंगा। इस पर कमिश्नर ने कहा कि ये ज्यादा हैं, सात सौ रुपये दूंगा। कमिश्नर आगे बढ़ गए। दफ्तरों में सीटों पर कर्मचारी कम और दलाल ज्यादा थे। तकरीबन 45 मिनट तक वह आरटीओ परिसर में घूम कर हालात का जायजा लेते रहे। उन्हें कई स्थानों पर गंदगी भी मिली।
आरटीओ में जाने के लिए उन्होंने अपनी गाड़ी और अर्दली को ट्रांसपोर्ट नगर में छोड़ दिया। इसके बाद टहलते हुए परिसर में पहुंचे। ड्राइविंग लाइसेंस पटल के बाद वह रिकार्ड रूम में पहुंचे। यहां दो तीन कर्मचारी बैठे सुस्ता रहे थे। उन्होंने वहां रखी फाइलों को जमीन पर गिरा दिया लेकिन किसी कर्मचारी ने उन्हें टोकने की जहमत नहीं उठाई। उन्होंने परमिट बनवाने आए दो व्यक्तियों से बात की। इसके बाद एक कर्मचारी से वाहन पंजीकरण कार्यालय के बारे में पूछा। उन्होंने एक दिव्यांग चपरासी से भी बातचीत की। पुरानी इमारत में फाइलों की अलमारियों के पास कुछ युवक लेनदेन की बातें कर रहे थे। कमिश्नर के जाने के बाद भी आरटीओ अफसरों को उनके निरीक्षण की भनक तक नहीं लग सकी।
एडीए में स्कूटर से पहुंचे मंडलायुक्त
आरटीओ से जाने से पहले पूर्वाह्न 11:15 बजे मंडलायुक्त के राममोहन राव स्कूटर से आगरा विकास प्राधिकरण गए। गेट नंबर एक से प्रवेश किया और एक के बाद एक कार्यालय में चक्कर लगाते हुए मानचित्र विभाग तक पहुंच गए। उन्हें अधिकांश कार्यालय में कर्मचारी और अधिकारी नहीं मिले। कमिश्नर बिना किसी से बात किए वहां लौट गए। कमिश्नर जब लौट रहे थे तब कुछ लोगों ने उन्हें पहचाना। इसके बाद तो एडीए में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में अधिकारी दौड़े लेकिन कमिश्नर से जा चुके थे।
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आरटीओ में जाने के लिए उन्होंने अपनी गाड़ी और अर्दली को ट्रांसपोर्ट नगर में छोड़ दिया। इसके बाद टहलते हुए परिसर में पहुंचे। ड्राइविंग लाइसेंस पटल के बाद वह रिकार्ड रूम में पहुंचे। यहां दो तीन कर्मचारी बैठे सुस्ता रहे थे। उन्होंने वहां रखी फाइलों को जमीन पर गिरा दिया लेकिन किसी कर्मचारी ने उन्हें टोकने की जहमत नहीं उठाई। उन्होंने परमिट बनवाने आए दो व्यक्तियों से बात की। इसके बाद एक कर्मचारी से वाहन पंजीकरण कार्यालय के बारे में पूछा। उन्होंने एक दिव्यांग चपरासी से भी बातचीत की। पुरानी इमारत में फाइलों की अलमारियों के पास कुछ युवक लेनदेन की बातें कर रहे थे। कमिश्नर के जाने के बाद भी आरटीओ अफसरों को उनके निरीक्षण की भनक तक नहीं लग सकी।
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एडीए में स्कूटर से पहुंचे मंडलायुक्त
आरटीओ से जाने से पहले पूर्वाह्न 11:15 बजे मंडलायुक्त के राममोहन राव स्कूटर से आगरा विकास प्राधिकरण गए। गेट नंबर एक से प्रवेश किया और एक के बाद एक कार्यालय में चक्कर लगाते हुए मानचित्र विभाग तक पहुंच गए। उन्हें अधिकांश कार्यालय में कर्मचारी और अधिकारी नहीं मिले। कमिश्नर बिना किसी से बात किए वहां लौट गए। कमिश्नर जब लौट रहे थे तब कुछ लोगों ने उन्हें पहचाना। इसके बाद तो एडीए में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में अधिकारी दौड़े लेकिन कमिश्नर से जा चुके थे।
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