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अस्त हो रहे गुरु, अब मांगलिक कार्य इस दिन से होंगे शुरू
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
Updated Wed, 11 Oct 2017 02:29 PM IST
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- फोटो : amarujala
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वैदिक पंचांग के अनुसार सामान्य रुप से देवोत्थान एकादशी के साथ ही सभी मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं। इस बार 31 अक्तूबर को यह तिथि है। लेकिन बड़े ग्रह परिवर्तन के कारण इस बार मांगलिक कार्य कुछ देरी से शुरू होंगे। करीब 10 दिन का विलंब रहेगा।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार गुरु ग्रह के अस्त होने के कारण मांगलिक कार्य 10 नवंबर से प्रारंभ हो सकेंगे। किसी भी विवाह या मांगलिक कार्य में देव गुरु बृहस्पति का पूजन अवश्य होता है। धर्म सिंधु एवं निर्णय सिंधु के अनुसार विवाह कार्यक्रम के समय गुरु का उदय होना अति आवश्यक है।
आचार्य आदित्य पांडेय और आचार्य गौरव शुक्ला ने बताया कि 12 अक्तूबर की रात 9:08 बजे से गुरु ग्रह अस्त हो जाएंगे और 9 नवंबर की रात 11:20 बजे उदय होंगे। अत: सभी मांगलिक कार्य 9 नवंबर के बाद अर्थात 10 नवंबर से ही प्रारंभ होंगे।
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ज्योतिषाचार्यों के अनुसार गुरु ग्रह के अस्त होने के कारण मांगलिक कार्य 10 नवंबर से प्रारंभ हो सकेंगे। किसी भी विवाह या मांगलिक कार्य में देव गुरु बृहस्पति का पूजन अवश्य होता है। धर्म सिंधु एवं निर्णय सिंधु के अनुसार विवाह कार्यक्रम के समय गुरु का उदय होना अति आवश्यक है।
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आचार्य आदित्य पांडेय और आचार्य गौरव शुक्ला ने बताया कि 12 अक्तूबर की रात 9:08 बजे से गुरु ग्रह अस्त हो जाएंगे और 9 नवंबर की रात 11:20 बजे उदय होंगे। अत: सभी मांगलिक कार्य 9 नवंबर के बाद अर्थात 10 नवंबर से ही प्रारंभ होंगे।
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दोष निवारण को करें ये उपाय
ज्योतिषाचार्य हरिकृष्ण पाराशर के मुताबिक जिन लोगों की कुंडली में गुरु का दोष हो अथवा गुरु अस्त हो उनके लिए देवोत्थान एकादशी के दिन केले का दान, पीले वस्त्र का दान और अपने वजन का एक तिहाई अनाज का दान करने से गुरु के दोष समाप्त हो जाता हैं।