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UP: आगरा को लग सकता है बड़ा झटका, रडार फैक्टरी के लिए जमीन को तरस रहा 400 करोड़ का निवेश; जानें नया अपडेट
Mon, 03 Aug 2026 01:34 PM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Mon, 03 Aug 2026 01:34 PM IST
सार
आगरा के डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड की 400 करोड़ रुपये की रडार फैक्टरी का प्रस्ताव एक साल बाद भी जमीन के इंतजार में अटका है। टीटीजेड की सख्त पर्यावरणीय पाबंदियां और जमीन अधिग्रहण से जुड़े पेच के कारण 60 हेक्टेयर जमीन का आवंटन नहीं हो सका है।
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आगरा कलेक्ट्रेट
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में 400 करोड़ का निवेश आगरा की झोली से खिसक सकता है। यहां भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) को सर्वे के एक साल बाद भी रडार फैक्टरी लगाने के लिए जमीन नहीं मिल सकी है। टीटीजेड (ताज ट्रेपेजियम जोन) की बंदिशों और पर्यावरण क्लीयरेंस में फंसे पेच के कारण भूमि आवंटन नहीं हो पा रहा है।
उत्तर प्रदेश में रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) ने आगरा, अलीगढ़ सहित छह शहरों में डिफेंस कॉरिडोर विकसित किए हैं। इसमें आगरा नोड को विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, रडार सिस्टम और संबंधित इंजीनियरिंग उद्योगों के लिए केंद्र बनाया जाना है।
इसी कड़ी में बीएचईएल ने पिछले साल सदर तहसील के बिझामई और बिल्हौनी क्षेत्र में रडार निर्माण इकाई लगाने के लिए 60 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की थी। इस प्रोजेक्ट से क्षेत्र में विकास की बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन प्रशासनिक और कानूनी अड़चनों ने इस बड़े निवेश की राह रोक दी है।
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112 हेक्टेयर जमीन खरीदी गई
यूपीडा आगरा नोड के तहत कुल 123.13 हेक्टेयर क्षेत्र में आधारभूत ढांचा विकसित कर रहा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, इसमें से लगभग 112 हेक्टेयर भूमि किसानों से खरीदी जा चुकी है। जो जमीन बच गई है, उसके लिए अनिवार्य अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। यूपीडा ने जमीन पर कब्जा लेकर चहारदीवारी व अन्य का काम शुरू करा दिए हैं।
60 करोड़ से संवरेगा बुनियादी ढांचा
भले ही आवंटन में देरी हो रही हो, लेकिन यूपीडा ने बुनियादी ढांचा तैयार करने का खाका खींच लिया है। अगले 12 महीनों में लगभग 60 करोड़ रुपये की लागत से रोड नेटवर्क, ड्रेनेज, बिजली और पानी की सप्लाई जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। डिफेंस कॉरिडोर में बनने वाले रक्षा उपकरणों के आसान परिवहन के लिए इसे सीधे लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से 100 फीट चौड़ा संपर्क मार्ग (एक्सेस रोड) बनाया जा रहा है।
कंपनियों को नहीं मिली जमीन
जमीन चिह्नित होने के बावजूद बीएचईएल समेत अन्य स्वदेशी और विदेशी रक्षा कंपनियों को प्लॉट नहीं मिल पा रहे हैं। इसके पीछे मुख्य कारण टीटीजेड (ताज ट्रेपेजियम जोन) क्षेत्र होने की वजह से मिलने वाली सख्त पर्यावरण अनुमतियां और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश हैं। इसके अलावा, टुकड़ों (पैच) में बची हुई जमीन का अधिग्रहण न होना भी बाधा बन रहा है।
कानूनी पेच से अटका आवंटन
डीएम मनीष बंसल ने बताया कि जब तक पर्यावरण संबंधी अनुमति नहीं मिल जाती, तब तक यूपीडा कंपनियों को कानूनी तौर पर जमीन का आवंटन नहीं सौंप सकता। इसी कारण ही बीएचईएल को भूमि आवंटन नहीं हुआ है।
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उत्तर प्रदेश में रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) ने आगरा, अलीगढ़ सहित छह शहरों में डिफेंस कॉरिडोर विकसित किए हैं। इसमें आगरा नोड को विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, रडार सिस्टम और संबंधित इंजीनियरिंग उद्योगों के लिए केंद्र बनाया जाना है।
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इसी कड़ी में बीएचईएल ने पिछले साल सदर तहसील के बिझामई और बिल्हौनी क्षेत्र में रडार निर्माण इकाई लगाने के लिए 60 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की थी। इस प्रोजेक्ट से क्षेत्र में विकास की बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन प्रशासनिक और कानूनी अड़चनों ने इस बड़े निवेश की राह रोक दी है।
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112 हेक्टेयर जमीन खरीदी गई
यूपीडा आगरा नोड के तहत कुल 123.13 हेक्टेयर क्षेत्र में आधारभूत ढांचा विकसित कर रहा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, इसमें से लगभग 112 हेक्टेयर भूमि किसानों से खरीदी जा चुकी है। जो जमीन बच गई है, उसके लिए अनिवार्य अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। यूपीडा ने जमीन पर कब्जा लेकर चहारदीवारी व अन्य का काम शुरू करा दिए हैं।
60 करोड़ से संवरेगा बुनियादी ढांचा
भले ही आवंटन में देरी हो रही हो, लेकिन यूपीडा ने बुनियादी ढांचा तैयार करने का खाका खींच लिया है। अगले 12 महीनों में लगभग 60 करोड़ रुपये की लागत से रोड नेटवर्क, ड्रेनेज, बिजली और पानी की सप्लाई जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। डिफेंस कॉरिडोर में बनने वाले रक्षा उपकरणों के आसान परिवहन के लिए इसे सीधे लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से 100 फीट चौड़ा संपर्क मार्ग (एक्सेस रोड) बनाया जा रहा है।
कंपनियों को नहीं मिली जमीन
जमीन चिह्नित होने के बावजूद बीएचईएल समेत अन्य स्वदेशी और विदेशी रक्षा कंपनियों को प्लॉट नहीं मिल पा रहे हैं। इसके पीछे मुख्य कारण टीटीजेड (ताज ट्रेपेजियम जोन) क्षेत्र होने की वजह से मिलने वाली सख्त पर्यावरण अनुमतियां और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश हैं। इसके अलावा, टुकड़ों (पैच) में बची हुई जमीन का अधिग्रहण न होना भी बाधा बन रहा है।
कानूनी पेच से अटका आवंटन
डीएम मनीष बंसल ने बताया कि जब तक पर्यावरण संबंधी अनुमति नहीं मिल जाती, तब तक यूपीडा कंपनियों को कानूनी तौर पर जमीन का आवंटन नहीं सौंप सकता। इसी कारण ही बीएचईएल को भूमि आवंटन नहीं हुआ है।