{"_id":"66e8f9c3da0329a93502c337","slug":"responsible-did-not-even-go-to-look-where-turtles-died-2024-09-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Agra: ये तो हद ही हो गई...जहां मरे कछुए, वहीं झांकने तक नहीं गए जिम्मेदार; इस तरह की गई खानापूर्ति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Agra: ये तो हद ही हो गई...जहां मरे कछुए, वहीं झांकने तक नहीं गए जिम्मेदार; इस तरह की गई खानापूर्ति
Tue, 17 Sep 2024 09:08 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Tue, 17 Sep 2024 09:08 AM IST
सार
आगरा के सैंया क्षेत्र के जिस तालाब में बड़ी संख्या में कछुओं की मौत हुई, वहां जिम्मेदार झांकने तक नहीं पहुंचे। इतना जरूर है कि तालाब में पंप लगाकर पानी खाली करा दिया गया।
विज्ञापन
कछुए। फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आगरा के सैंया ब्लॉक की बिरहरू ग्राम पंचायत में गांव नगला धाना के जिस तालाब में कछुए मरे पड़े हैं, वहां कोई जिम्मेदार पांच दिन बाद भी झांकने नहीं पहुंचा। रास्तों में भरे गंदे पानी को पंप से निकालने का काम शनिवार को शुरू हुआ। कछुए कैसे मरे, यह पता नहीं चल सका है।
नगला धाना में दो बीघा क्षेत्र में फैला पुराना तालाब है। वर्षों से यहां कछुए पल रहे हैं। आरोप है कि प्रधान, सचिव और राजस्वकर्मियों की लापरवाही से तालाब किनारे कब्जे हो गए हैं। अब तालाब एक बीघा से भी कम रह गया है। कीचड़ व गंदगी भरी है। गंदा पानी गांव के रास्तों में भर गया है। तालाब में पल रहे कछुए दम तोड़ रहे हैं।
सरपंच बनवारी सिंह ने बताया कि 12 सितंबर को उन्होंने कलेक्ट्रेट में एडीएम प्रशासन से कछुए मरने और तालाब पाटे जाने की शिकायत की थी। एडीएम ने एसडीएम खेरागढ़ को मौका मुआयना के निर्देश दिए। पांच दिन बाद भी कोई अफसर नहीं पहुंचा। केवल पंचायत सचिव ने गंदे पानी की निकासी के लिए एक पंप सेट लगा दिया है। वो भी दो घंटे बाद हटा लिया। मामले में एडीएम प्रशासन अजय कुमार ने संबंधित से रिपोर्ट तलब करने की बात कही है।
विज्ञापन
संतुलन में अहम भूमिका
जलीय जीव विशेषज्ञ प्रो. पीके सिंह के अनुसार जलीय कछुए मरे हुए जानवर, पौधे व बीमार मछलियों को खाते हैं। इससे तालाब के पानी की गुणवत्ता में सुधार होता है। कछुए पारिस्थितिकी संतुलन में अहम भूमिका निभाते हैं।
विज्ञापन
नगला धाना में दो बीघा क्षेत्र में फैला पुराना तालाब है। वर्षों से यहां कछुए पल रहे हैं। आरोप है कि प्रधान, सचिव और राजस्वकर्मियों की लापरवाही से तालाब किनारे कब्जे हो गए हैं। अब तालाब एक बीघा से भी कम रह गया है। कीचड़ व गंदगी भरी है। गंदा पानी गांव के रास्तों में भर गया है। तालाब में पल रहे कछुए दम तोड़ रहे हैं।
विज्ञापन
सरपंच बनवारी सिंह ने बताया कि 12 सितंबर को उन्होंने कलेक्ट्रेट में एडीएम प्रशासन से कछुए मरने और तालाब पाटे जाने की शिकायत की थी। एडीएम ने एसडीएम खेरागढ़ को मौका मुआयना के निर्देश दिए। पांच दिन बाद भी कोई अफसर नहीं पहुंचा। केवल पंचायत सचिव ने गंदे पानी की निकासी के लिए एक पंप सेट लगा दिया है। वो भी दो घंटे बाद हटा लिया। मामले में एडीएम प्रशासन अजय कुमार ने संबंधित से रिपोर्ट तलब करने की बात कही है।
विज्ञापन
संतुलन में अहम भूमिका
जलीय जीव विशेषज्ञ प्रो. पीके सिंह के अनुसार जलीय कछुए मरे हुए जानवर, पौधे व बीमार मछलियों को खाते हैं। इससे तालाब के पानी की गुणवत्ता में सुधार होता है। कछुए पारिस्थितिकी संतुलन में अहम भूमिका निभाते हैं।