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पनवारी कांड: अकोला हिंसा के 32 दोषियों को जमानत...जेल से बाहते ही किया स्वागत, गांव में खुशी की लहर
Thu, 04 Sep 2025 11:56 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Thu, 04 Sep 2025 11:56 PM IST
सार
पिछले दिनों इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कागाराैल में भड़की हिंसा के 32 अपीलकर्ताओं की दोषसिद्धि को निलंबित करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। इसके बाद बृहस्पतिवार को उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया।
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जेल से बाहर आने पर किया स्वागत।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
आगरा के सिकंदरा के गांव पनवारी में 34 साल पहले हुए बवाल के बाद अकोला में भड़की हिंसा में 32 दोषियों को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। बृहस्पतिवार रात उन्हें जेल से रिहा किया गया। दर्जनों गाड़ियों से लोग जेल के गेट पर पहुंच गए थे। जेल से बाहर आते ही सभी का स्वागत किया गया।
सिकंदरा के गांव पनवारी में 22 जून 1990 को अनुसूचित जाति के परिवार की बेटी की बरात चढ़ाने के विवाद में बवाल हुआ। इसके बाद आसपास के क्षेत्र में भी हिंसा भड़क गई थी। 24 जून 1990 को कागाराैल के अकोला में भी हिंसा हुई थी। एक महिला की माैत हो गई थी और 150 से अधिक लोग घायल हुए थे।
इस मामले में 35 लोगों को दोषसिद्ध किया गया था। पिछले दिनों इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कागाराैल में भड़की हिंसा के 32 अपीलकर्ताओं की दोषसिद्धि को निलंबित करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था।
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रिहाई के दौरान जेल के गेट पर विधायक चाैधरी बाबूलाल, रालोद नेता कप्तान सिंह चाहर व अन्य पहुंच गए थे। जेल से बाहर आने पर लोगों का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। स्वागत के लिए कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामनाथ सिकरवार, भाजपा नेता रामेश्वर सिंह, सपा नेता सुरेंद्र चाैधरी, गजेंद्र सिंह नरवार, रंजीत चाैधरी, निर्मल चाहर, अवधेश सोलंकी, सतवीर सिंह रावत, हुकुम सिंह, यशपाल चाहर भी पहुंचे।
जेल से निकलकर एक ही बस से गए
अकोला से जेल परिसर में एक बस लाई गई थी। उसी में करीब 20 लोग घर के लिए रवाना हुए। हिंसा के दोषियों ने न्यायालय का आभार जताया। बोले हमारे साथ न्याय होगा। न्यायालय से हमें पूरी उम्मीद है।
इनको मिली जमानत
जयदेव, राजेंद्र, पप्पू, तेजवीर सिंह, बन्नो, जीतू उर्फ जीतीराम, कुंवर पाल, कल्लो, श्यामवीर, लीलाधर, भूपेंद्र, सत्तो, महेश, नाहर सिंह, रामवीर, सरेंद्र, रामजीत, निरंजन, हरभान, पूरण सिंह, देवी सिंह, उम्मेदी, विज्जो, रामजीत, महेंद्र सिंह, संतो उर्फ संतराम, सुजान, सूडान उर्फ सौदान, महताब, दंगल, रज्जो उर्फ राजू और संपत को हाईकोर्ट से जमानत मिली है।
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सिकंदरा के गांव पनवारी में 22 जून 1990 को अनुसूचित जाति के परिवार की बेटी की बरात चढ़ाने के विवाद में बवाल हुआ। इसके बाद आसपास के क्षेत्र में भी हिंसा भड़क गई थी। 24 जून 1990 को कागाराैल के अकोला में भी हिंसा हुई थी। एक महिला की माैत हो गई थी और 150 से अधिक लोग घायल हुए थे।
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इस मामले में 35 लोगों को दोषसिद्ध किया गया था। पिछले दिनों इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कागाराैल में भड़की हिंसा के 32 अपीलकर्ताओं की दोषसिद्धि को निलंबित करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था।
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रिहाई के दौरान जेल के गेट पर विधायक चाैधरी बाबूलाल, रालोद नेता कप्तान सिंह चाहर व अन्य पहुंच गए थे। जेल से बाहर आने पर लोगों का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। स्वागत के लिए कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामनाथ सिकरवार, भाजपा नेता रामेश्वर सिंह, सपा नेता सुरेंद्र चाैधरी, गजेंद्र सिंह नरवार, रंजीत चाैधरी, निर्मल चाहर, अवधेश सोलंकी, सतवीर सिंह रावत, हुकुम सिंह, यशपाल चाहर भी पहुंचे।
जेल से निकलकर एक ही बस से गए
अकोला से जेल परिसर में एक बस लाई गई थी। उसी में करीब 20 लोग घर के लिए रवाना हुए। हिंसा के दोषियों ने न्यायालय का आभार जताया। बोले हमारे साथ न्याय होगा। न्यायालय से हमें पूरी उम्मीद है।
इनको मिली जमानत
जयदेव, राजेंद्र, पप्पू, तेजवीर सिंह, बन्नो, जीतू उर्फ जीतीराम, कुंवर पाल, कल्लो, श्यामवीर, लीलाधर, भूपेंद्र, सत्तो, महेश, नाहर सिंह, रामवीर, सरेंद्र, रामजीत, निरंजन, हरभान, पूरण सिंह, देवी सिंह, उम्मेदी, विज्जो, रामजीत, महेंद्र सिंह, संतो उर्फ संतराम, सुजान, सूडान उर्फ सौदान, महताब, दंगल, रज्जो उर्फ राजू और संपत को हाईकोर्ट से जमानत मिली है।