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काम किया अधूरा, वेतन लिया पूरा, जांच में सामने आई सरकारी डॉक्टरों की कामचोरी
Thu, 21 Feb 2019 06:01 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
Published by: मुकेश कुमार
Updated Thu, 21 Feb 2019 06:01 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
मैनपुरी के जिला अस्पताल में डॉक्टरों की मनमानी रोकने के लिए निगरानी कराने के निर्देश दिए गए थे। इस पर सीएमएस ने गोपनीय जांच के लिए एक अधिकारी को नामित किया था। उन्होंने अपनी गोपनीय रिपोर्ट सीएमएस को सौंप दी है। रिपोर्ट में तीन डॉक्टरों की मनमानी सामने आई है। इन डॉक्टरों ने निर्धारित घंटों से आधे समय तक ही काम किया है।
जिला अस्पताल में डॉक्टरों के ओपीडी में न बैठने की शिकायतें लगातार मिलने पर तत्कालीन जिलाधिकारी प्रदीप कुमार ने नाराजगी प्रकट की थी। इस संबंध में उन्होंने सीएमएस को पत्र भेजकर डॉक्टरों के ओपीडी कार्य की जांच कराने के निर्देश दिए थे। सीएमएस ने अपने स्तर से एक अधिकारी को नामित कर डॉक्टरों द्वारा पिछले 20 कार्य दिवसों की जांच कराई।
जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट सीएमएस को सौंप दी। अस्पताल सूत्रों के अनुसार जांच अधिकारी ने जो गोपनीय रिपोर्ट सीएमएस को सौंपी है, उसमें तीन वरिष्ठ डॉक्टरों ने 120 घंटों में से मात्र 60 घंटे से भी कम समय में ओपीडी में कार्य किया है। वहीं, अन्य डॉक्टरों की मनमानी भी जांच में उजागर हुई है।
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जिला अस्पताल में डॉक्टरों के ओपीडी में न बैठने की शिकायतें लगातार मिलने पर तत्कालीन जिलाधिकारी प्रदीप कुमार ने नाराजगी प्रकट की थी। इस संबंध में उन्होंने सीएमएस को पत्र भेजकर डॉक्टरों के ओपीडी कार्य की जांच कराने के निर्देश दिए थे। सीएमएस ने अपने स्तर से एक अधिकारी को नामित कर डॉक्टरों द्वारा पिछले 20 कार्य दिवसों की जांच कराई।
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जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट सीएमएस को सौंप दी। अस्पताल सूत्रों के अनुसार जांच अधिकारी ने जो गोपनीय रिपोर्ट सीएमएस को सौंपी है, उसमें तीन वरिष्ठ डॉक्टरों ने 120 घंटों में से मात्र 60 घंटे से भी कम समय में ओपीडी में कार्य किया है। वहीं, अन्य डॉक्टरों की मनमानी भी जांच में उजागर हुई है।
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अन्य डॉक्टरों की मनमानी भी हुई उजागर
सीएमएस द्वारा कराई गई जांच में कुछ डॉक्टरों की लापरवाही भी उजागर हुई है। जिन्होंने ओपीडी में 120 घंटे कार्य तो किया है, लेकिन औसतन देखे गए मरीजों की संख्या काफी कम है। अब यह देखा जाना है कि आखिर इन डॉक्टरों पर कार्रवाई क्या होती है।
शासनादेश के तहत प्रत्येक डॉक्टर को एक कार्य दिवस में छह घंटे ओपीडी में बैठकर मरीजों को उपचार देना होता है। अधिकतर डॉक्टर दो से तीन घंटे ही ओपीडी में समय दे रहे हैं। इसके चलते मरीजों को उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है।
इस संबंध में सीएमएस डॉ आरके सागर ने बताया कि तत्कालीन डीएम के आदेश पर कराई गई जांच रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। शीघ्र ही इस रिपोर्ट को जिलाधिकारी कार्यालय भेजा जाएगा। सभी डॉक्टरों को निर्देशित भी किया गया है कि वे समय से ओपीडी में बैठकर मरीजों को उपचार दें। लापरवाह डॉक्टरों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
शासनादेश के तहत प्रत्येक डॉक्टर को एक कार्य दिवस में छह घंटे ओपीडी में बैठकर मरीजों को उपचार देना होता है। अधिकतर डॉक्टर दो से तीन घंटे ही ओपीडी में समय दे रहे हैं। इसके चलते मरीजों को उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है।
इस संबंध में सीएमएस डॉ आरके सागर ने बताया कि तत्कालीन डीएम के आदेश पर कराई गई जांच रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। शीघ्र ही इस रिपोर्ट को जिलाधिकारी कार्यालय भेजा जाएगा। सभी डॉक्टरों को निर्देशित भी किया गया है कि वे समय से ओपीडी में बैठकर मरीजों को उपचार दें। लापरवाह डॉक्टरों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।