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विश्व रेबीज दिवस: जानवर काटे तो भूलकर भी न करें ये काम...नहीं तो होगा घातक, पढ़ें डॉक्टर की सलाह

Thu, 28 Sep 2023 02:15 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला, आगरा
अमर उजाला, आगरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Thu, 28 Sep 2023 02:15 PM IST
सार

यदि आपको भी कोई जानवर काट लेता है तो भूलकर भी घाव पर मिर्च न लगाएं। नहीं तो यह घातक होगा। आगे पढ़ें और जानें कि इस पर डॉक्टर क्या कहते हैं ? 

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Read doctor advice on what to treat if bitten by an animal and how to protect yourself
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

उत्तर प्रदेश के आगरा में विश्व रेबीज दिवस मनाया गया। यहां अक्सर देखा जाता है कि जानवर के काटने पर लोग घाव पर मिर्च लगाकर पहुंच रहे हैं। ऐसा करने से कीटाणु रक्त में तेजी से प्रभावी होता है। डॉक्टर बताते हैं कि काटने पर घाव को कास्टिक वाले साबुन से अच्छी तरह धोकर 24 घंटे में एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) जरूर लगवाएं।

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प्रमुख अधीक्षिका डॉ. अनीता शर्मा ने बताया कि औसतन रोजाना 400 मरीज एआरवी की ओपीडी में आ रहे हैं। इनमें से 75 फीसदी मामले कुत्ता काटने, 20 फीसदी बंदर काटने के और 5 फीसदी अन्य जानवर काटने के मरीज आ रहे हैं। इनमें रोजाना 20-25 ऐसे मरीज मिलते हैं, जो घाव पर मिर्च और अन्य देशी दवा लगाकर पहुंचते हैं। मिर्च लगाने से रक्त का संचार तेजी से होने पर कीटाणु तेजी से सक्रिय होता है। घाव पर मिर्च लगाकर आने वालों में ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों की संख्या अधिक है। 

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कास्टिक सोडा वाले साबुन से घाव को धोएं

नगर निगम के मुख्य पशु चिकित्सक डॉ. अजय कुमार सिंह ने कहा कि कुत्ता-बंदर समेत अन्य जानवर काटता है तो घाव को कास्टिक सोडा वाले साबुन से नल के नीचे 8-10 मिनट अच्छी तरह धोएं, इससे कीटाणु काफी हद तक नष्ट हो जाएगा। एआरवी की पहली डोज 24 घंटे में जरूर लगवा लें।

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ऊंट, घोड़ा काटे तो डॉक्टरी परामर्श जरूरी

नगर निगम के मुख्य पशु चिकित्सक ने बताया कि कुत्ता के अलावा बंदर, नेवला, सियार समेत जंगली जानवर काटता है तो एआरवी जरूर लगवा लें। इनमें रैबीज फैलने का खतरा अधिक होता है। अगर घोड़ा, गधा, ऊंट, बकरी समेत अन्य पालतू जानवर काटते हैं तो इसमें डॉक्टर को दिखा लें, जरूरत और लक्षण प्रतीत होने पर एआरवी लगाई जाती है।

रेबीज के लक्षण

  • मांसपेशियों में दर्द, चक्कर आना, थकान, बुखार, भूख न लगना
  • उल्टी आना, मांसपेशियों में ऐंठन, लार अधिक आना, आक्रामकता।
  • चिड़चिड़ापन, गर्दन में अकड़न, निगलने में देर होना, सुधबुध खोना।
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